विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार:AIMIM नेता हाजी नाहिद गनी पटना से पकड़ाया, हजारों युवाओं से लाखों ठगे

विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार:AIMIM नेता हाजी नाहिद गनी पटना से पकड़ाया, हजारों युवाओं से लाखों ठगे

विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर सीमांचल के हजारों बेरोजगार युवाओं से मोटी रकम की ठगी करने और अवैध तरीके से विदेश भेजने के मामले में किशनगंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने विशेष टीम और एसटीएफ की मदद से मामले के मुख्य आरोपी हाजी नाहिद गनी और उसके सहयोगी मो. तवरेज को आज अहले सुबह पटना से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पूर्णिया के रहने वाले हैं। पुलिस के अनुसार, इनके खिलाफ किशनगंज और पूर्णिया में विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी हाजी नाहिद गनी प्राइवेट लिमिटेड और ताईबा इंटरनेशनल टूर एंड ट्रेवल्स के माध्यम से युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। आरोप है कि दुबई, सऊदी अरब, थाईलैंड और मलेशिया में रोजगार दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये वसूले जाते थे। इसके बाद कुछ युवाओं को अवैध रास्तों से विदेश भेजा जाता था। विदेश पहुंचने के बाद उन्हें वीजा और तय रोजगार के अनुसार काम नहीं मिलने तथा जबरन दूसरा काम कराने की शिकायतें भी सामने आई हैं। मलेशिया भेजने के लिए 1.80 लाख रुपये लेने का आरोप पुलिस के अनुसार, विशनपुर थाना क्षेत्र में दर्ज कांड संख्या 47/26 में वादी मो. सुलेमान ने आरोप लगाया कि उसके बेटे नूरजफर को विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद 9 सितंबर 2026 को उसे पटना से दिल्ली और फिर दिल्ली से थाईलैंड के क्राबी शहर भेजा गया। आरोप है कि 18 सितंबर को उसे कथित डंकी रूट के जरिए अवैध रूप से मलेशिया में प्रवेश कराया गया। शिकायत के मुताबिक, मलेशिया पहुंचने के बाद नूरजफर को कई अन्य युवकों के साथ एक कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद उसे जोहोर के सेनाई स्थित Biocean Sdn Bhd में काम पर लगाया गया। इसी दौरान मलेशियाई आव्रजन अधिकारियों की छापेमारी में कई युवकों को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई। पीड़ित नूरजफर किसी तरह जंगल में छिपकर गिरफ्तारी से बचा और बाद में स्थानीय एजेंट की मदद से भारत लौट आया। तय नौकरी की जगह दूसरा काम कराने का आरोप पुलिस के अनुसार, अन्य मामलों में भी पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन्हें दुबई और सऊदी अरब में विशेष काम दिलाने का भरोसा देकर वीजा के नाम पर रकम ली गई, लेकिन विदेश पहुंचने के बाद उनसे दूसरा काम कराया गया। कुछ शिकायतकर्ताओं ने जबरन काम कराने और बंधुआ मजदूरी जैसी परिस्थितियों में रखे जाने का आरोप भी लगाया है। शिकायतों के मुताबिक, विदेश में फंसने के बाद जब युवाओं ने आरोपियों से भारत वापस बुलाने की मांग की, तो कथित तौर पर उनसे अतिरिक्त रकम मांगी गई। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि विदेश भेजने के इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं साथ ही युवाओं से वसूली गई रकम कहां इस्तेमाल की गई। एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-01 किशनगंज के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ के सहयोग से दोनों आरोपियों को पटना से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। उनके द्वारा संचालित अन्य गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। साथ ही मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस आरोपियों की कथित आपराधिक कमाई से अर्जित संपत्ति का पता लगाकर उसे जब्त करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की भी तैयारी कर रही है। पूर्व विधायक ने लड़कों से वीडियो कॉल पर बात की विदेश में फंसे अमौर के लड़कों का वीडियो देख पूर्व विधायक मुजाहिद ने उनके बारे में पता किया था। फिर उन लड़कों का नंबर लिया। इसके बाद पूर्व विधायक ने उन लड़कों को वीडियो कॉल कर बातचीत की। इस दौरान दुबई में फंसे एक लड़के ने बताया था कि हम लोग 17 दिनों से दुबई में फंसे हैं। अब हमारे पास खाने-पीने और रहने के भी पैसे नहीं बचे हैं। पूर्व विधायक ने जब पूछा कि आप लोग खाने-पीने की व्यवस्था कैसे कर रहे हैं, तो लड़कों ने बताया कि घर से जो पैसे लेकर आए थे, उसी से अब तक गुजारा कर रहे थे, लेकिन अब सारे पैसे खत्म हो चुके हैं। भूखे रहने को मजबूर हैं। कई थानों में दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, किशनगंज जिले के बहादुरगंज, कोचाधामन और विशनपुर थाना क्षेत्रों में आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज हैं। इसके अलावा पूर्णिया जिले में भी विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़े मामले सामने आए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हाजी नाहिद गनी, पिता स्व. मो. मुस्लिम, निवासी वैसा, थाना रौटा, जिला पूर्णिया और मो. तवरेज, पिता अबु हासिव, निवासी कलठिया, वार्ड संख्या-9, थाना अनगढ़, जिला पूर्णिया के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कितने युवाओं को कथित तौर पर इस नेटवर्क के जरिए विदेश भेजा गया और ठगी की कुल रकम कितनी है। जानें दुबई से पूर्णिया कैसे लौटे सीमांचल के सभी 7 लड़के? सीमांचल के सभी 7 लड़कों ने जब वीडियो बनाया तो उसमें कोचाधामन विधानसभा सीट से पूर्व विधायक मुजाहिद आलम से मदद मांगी। इसके बाद मास्टर मुजाहिद ने सभी लड़कों से वीडियो कॉल पर बात की। इसके बाद मामला पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव तक पहुंचा। पप्पू यादव ने विदेश मंत्रालय से लड़कों को वापस लाने की मांग की। सांसद पप्पू यादव के मुताबिक, उन्होंने युवकों की स्वदेश वापसी को लेकर विदेश सचिव से लेकर विदेश मंत्री तक से बातचीत की। विदेश मंत्रालय को चिट्ठी भी लिखी गई। तब जाकर युवकों की गुहार केंद्र सरकार तक पहुंच पाई। पप्पू यादव के चिट्ठी लिखने के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से इस दिशा में पहल की गई। युवकों के लिए खाने-पीने के साथ भारत वापसी की टिकट कंफर्म की गई। सभी लड़के 23 अगस्त को बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट पर उतरे। इसके बाद अपने घर पहुंचे थे। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर सीमांचल के हजारों बेरोजगार युवाओं से मोटी रकम की ठगी करने और अवैध तरीके से विदेश भेजने के मामले में किशनगंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने विशेष टीम और एसटीएफ की मदद से मामले के मुख्य आरोपी हाजी नाहिद गनी और उसके सहयोगी मो. तवरेज को आज अहले सुबह पटना से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पूर्णिया के रहने वाले हैं। पुलिस के अनुसार, इनके खिलाफ किशनगंज और पूर्णिया में विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी हाजी नाहिद गनी प्राइवेट लिमिटेड और ताईबा इंटरनेशनल टूर एंड ट्रेवल्स के माध्यम से युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। आरोप है कि दुबई, सऊदी अरब, थाईलैंड और मलेशिया में रोजगार दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये वसूले जाते थे। इसके बाद कुछ युवाओं को अवैध रास्तों से विदेश भेजा जाता था। विदेश पहुंचने के बाद उन्हें वीजा और तय रोजगार के अनुसार काम नहीं मिलने तथा जबरन दूसरा काम कराने की शिकायतें भी सामने आई हैं। मलेशिया भेजने के लिए 1.80 लाख रुपये लेने का आरोप पुलिस के अनुसार, विशनपुर थाना क्षेत्र में दर्ज कांड संख्या 47/26 में वादी मो. सुलेमान ने आरोप लगाया कि उसके बेटे नूरजफर को विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद 9 सितंबर 2026 को उसे पटना से दिल्ली और फिर दिल्ली से थाईलैंड के क्राबी शहर भेजा गया। आरोप है कि 18 सितंबर को उसे कथित डंकी रूट के जरिए अवैध रूप से मलेशिया में प्रवेश कराया गया। शिकायत के मुताबिक, मलेशिया पहुंचने के बाद नूरजफर को कई अन्य युवकों के साथ एक कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद उसे जोहोर के सेनाई स्थित Biocean Sdn Bhd में काम पर लगाया गया। इसी दौरान मलेशियाई आव्रजन अधिकारियों की छापेमारी में कई युवकों को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई। पीड़ित नूरजफर किसी तरह जंगल में छिपकर गिरफ्तारी से बचा और बाद में स्थानीय एजेंट की मदद से भारत लौट आया। तय नौकरी की जगह दूसरा काम कराने का आरोप पुलिस के अनुसार, अन्य मामलों में भी पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन्हें दुबई और सऊदी अरब में विशेष काम दिलाने का भरोसा देकर वीजा के नाम पर रकम ली गई, लेकिन विदेश पहुंचने के बाद उनसे दूसरा काम कराया गया। कुछ शिकायतकर्ताओं ने जबरन काम कराने और बंधुआ मजदूरी जैसी परिस्थितियों में रखे जाने का आरोप भी लगाया है। शिकायतों के मुताबिक, विदेश में फंसने के बाद जब युवाओं ने आरोपियों से भारत वापस बुलाने की मांग की, तो कथित तौर पर उनसे अतिरिक्त रकम मांगी गई। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि विदेश भेजने के इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं साथ ही युवाओं से वसूली गई रकम कहां इस्तेमाल की गई। एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-01 किशनगंज के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ के सहयोग से दोनों आरोपियों को पटना से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। उनके द्वारा संचालित अन्य गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। साथ ही मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस आरोपियों की कथित आपराधिक कमाई से अर्जित संपत्ति का पता लगाकर उसे जब्त करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की भी तैयारी कर रही है। पूर्व विधायक ने लड़कों से वीडियो कॉल पर बात की विदेश में फंसे अमौर के लड़कों का वीडियो देख पूर्व विधायक मुजाहिद ने उनके बारे में पता किया था। फिर उन लड़कों का नंबर लिया। इसके बाद पूर्व विधायक ने उन लड़कों को वीडियो कॉल कर बातचीत की। इस दौरान दुबई में फंसे एक लड़के ने बताया था कि हम लोग 17 दिनों से दुबई में फंसे हैं। अब हमारे पास खाने-पीने और रहने के भी पैसे नहीं बचे हैं। पूर्व विधायक ने जब पूछा कि आप लोग खाने-पीने की व्यवस्था कैसे कर रहे हैं, तो लड़कों ने बताया कि घर से जो पैसे लेकर आए थे, उसी से अब तक गुजारा कर रहे थे, लेकिन अब सारे पैसे खत्म हो चुके हैं। भूखे रहने को मजबूर हैं। कई थानों में दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, किशनगंज जिले के बहादुरगंज, कोचाधामन और विशनपुर थाना क्षेत्रों में आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज हैं। इसके अलावा पूर्णिया जिले में भी विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़े मामले सामने आए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हाजी नाहिद गनी, पिता स्व. मो. मुस्लिम, निवासी वैसा, थाना रौटा, जिला पूर्णिया और मो. तवरेज, पिता अबु हासिव, निवासी कलठिया, वार्ड संख्या-9, थाना अनगढ़, जिला पूर्णिया के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कितने युवाओं को कथित तौर पर इस नेटवर्क के जरिए विदेश भेजा गया और ठगी की कुल रकम कितनी है। जानें दुबई से पूर्णिया कैसे लौटे सीमांचल के सभी 7 लड़के? सीमांचल के सभी 7 लड़कों ने जब वीडियो बनाया तो उसमें कोचाधामन विधानसभा सीट से पूर्व विधायक मुजाहिद आलम से मदद मांगी। इसके बाद मास्टर मुजाहिद ने सभी लड़कों से वीडियो कॉल पर बात की। इसके बाद मामला पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव तक पहुंचा। पप्पू यादव ने विदेश मंत्रालय से लड़कों को वापस लाने की मांग की। सांसद पप्पू यादव के मुताबिक, उन्होंने युवकों की स्वदेश वापसी को लेकर विदेश सचिव से लेकर विदेश मंत्री तक से बातचीत की। विदेश मंत्रालय को चिट्ठी भी लिखी गई। तब जाकर युवकों की गुहार केंद्र सरकार तक पहुंच पाई। पप्पू यादव के चिट्ठी लिखने के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से इस दिशा में पहल की गई। युवकों के लिए खाने-पीने के साथ भारत वापसी की टिकट कंफर्म की गई। सभी लड़के 23 अगस्त को बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट पर उतरे। इसके बाद अपने घर पहुंचे थे।  

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