पीपल के टहनियों पर पर्चियों में बंधी हजारों मुरादें:जिन बाबा स्थान पर हिंदू सोमवार को और मुस्लिम शुक्रवार को आते है

पीपल के टहनियों पर पर्चियों में बंधी हजारों मुरादें:जिन बाबा स्थान पर हिंदू सोमवार को और मुस्लिम शुक्रवार को आते है

पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड की डुमरी पंचायत में जिन बाबा का एक पौराणिक स्थान है। यह जगह हिंदू और मुस्लिम समुदाय की आस्था का केंद्र है। यहां दोनों धर्मों के लोग अपनी मुरादें लेकर पहुंचते हैं। इस स्थान की खासियत यहां का पीपल का पेड़ है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं और परेशानियां कागज की पर्चियों पर लिखकर पेड़ की टहनियों में बांध देते हैं। लोगों का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है। सोमवार को हिंदू, शुक्रवार को मुस्लिम आते है यहां हर दिन श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सोमवार को हिंदू और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों की ज्यादा भीड़ होती है। मनोकामना पूरी होने पर लोग दोबारा आकर श्रद्धा जताते हैं। यहां खीर का भोग लगाया जाता है और प्रसाद बांटा जाता है। पश्चिम चंपारण के अलावा बिहार के अन्य जिलों, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड की डुमरी पंचायत में जिन बाबा का एक पौराणिक स्थान है। यह जगह हिंदू और मुस्लिम समुदाय की आस्था का केंद्र है। यहां दोनों धर्मों के लोग अपनी मुरादें लेकर पहुंचते हैं। इस स्थान की खासियत यहां का पीपल का पेड़ है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं और परेशानियां कागज की पर्चियों पर लिखकर पेड़ की टहनियों में बांध देते हैं। लोगों का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है। सोमवार को हिंदू, शुक्रवार को मुस्लिम आते है यहां हर दिन श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सोमवार को हिंदू और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों की ज्यादा भीड़ होती है। मनोकामना पूरी होने पर लोग दोबारा आकर श्रद्धा जताते हैं। यहां खीर का भोग लगाया जाता है और प्रसाद बांटा जाता है। पश्चिम चंपारण के अलावा बिहार के अन्य जिलों, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।  

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