मिर्जापुर की सुप्रसिद्ध श्री रंगारंग राघवेन्द्र रामलीला समिति, पड़री के छठे दिन की लीला में प्रभु श्रीराम-केवट संवाद, सीता हरण और जटायु-रावण संग्राम के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पद कमल धोइ चढ़ाइ नाव न आउ जौं केवट कहेउ
प्रभु श्रीराम और केवट संवाद ने पंडाल को भक्ति रस में डुबो दिया। जब श्रीराम ने गंगा पार जाने को नाव मांगी, तब केवट का प्रेम देख दर्शक भावुक हो गए। ‘मांगी नाव न केवट आना। कहइ तुम्हार मरम मैं जाना॥’
चरण धोने और चरणामृतपान का मर्मस्पर्शी दृश्य देख सबकी आंखें नम हो गईं।
हरि प्रेरित तेहि अवसर धाई सुनि प्रिय बचन सीत मन भाई पंचवटी में मायावी रावण के स्वर्ण मृग छल और लक्ष्मण रेखा कटने पर माता सीता के हरण का प्रसंग आया। ‘तब मारीच तहां तेइ आवा। कपट रूप धरि सीतहि भावा॥’
माता के करुण विलाप और चीत्कार ने उपस्थित मातृशक्ति सहित हर दर्शक का हृदय झकझोर दिया। धर्म की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग
मां जानकी की रक्षा के लिए वृद्ध गिद्धराज जटायु और रावण का भीषण संग्राम हुआ। रावण के वार से घायल होने पर भी जटायु का अंतिम श्वास तक संघर्ष करना साहस और कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल बन गया।
कार्यक्रम में पुरुषों के साथ महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए थानाध्यक्ष पड़री प्रदीप सिंह पुलिस बल के साथ पूरी तरह मुस्तैद रहे।

