इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर में मरीजों की स्थिति का तुरंत आकलन कर बेहतर इलाज देने के लिए झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के लेक्चरर हॉल में शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड तकनीक पर कार्यशाला हुई। विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर झालावाड़ और भारतीय एनेस्थीसिया सोसाइटी की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में करीब 70 से 80 डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने डॉक्टरों को मौके पर ही अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी के जरिए मरीज की स्थिति समझने और बीमारी की पहचान करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय पोरवाल मुख्य अतिथि रहे। इमरजेंसी में मौके पर ही मरीज की जांच कार्यशाला में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक की मदद से मरीज को अल्ट्रासाउंड कक्ष में ले जाए बिना ही मौके पर उसकी स्थिति का आकलन किया जा सकता है। इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर में यह सुविधा मरीज की स्थिति को तेजी से समझने और इलाज संबंधी निर्णय लेने में मददगार साबित होती है। ऑपरेशन के तीनों चरणों में तकनीक का इस्तेमाल डॉक्टरों को ऑपरेशन से पहले, ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद अल्ट्रासाउंड तकनीक के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्देश्य एनेस्थीसिया विशेषज्ञों सहित अन्य डॉक्टरों को इस तकनीक के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना और मरीजों की जांच व इलाज को अधिक प्रभावी बनाना रहा। कई मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों ने लिया हिस्सा कार्यशाला में एम्स जोधपुर के साथ अजमेर, उदयपुर, भीलवाड़ा समेत विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से आए करीब 70 से 80 डॉक्टर शामिल हुए। विशेषज्ञों ने तकनीक के उपयोग से जुड़ी जानकारी साझा की, ताकि डॉक्टर आपात स्थितियों में इसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकें। ये डॉक्टर्स रहे मौजूद कार्यशाला में आयोजक डॉ. राजननन्दा, डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. प्रीतिलता सिंह, डॉ. अतुलराज मेहता, डॉ. नवीन मल्होत्रा, डॉ. राधाकृष्णन राव, डॉ. एएल मीनाक्षी सुंदरम, डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. हिना चाहनवाल, डॉ. मनोज कमल, डॉ. अरुण गोर, डॉ. भारत पालीवाल, डॉ. गीता सिंगारिया, डॉ. प्रतीक कोलवाल, डॉ. पूजा मेहता, डॉ. जेबी नांगल, डॉ. उषा दरिया और डॉ. अनीता चौहान मौजूद रहे।

