बिहारशरीफ में मां काली का पट खुलते ही उमड़ी भीड़:बीजेपी विधायक ने उतारी आरती; पंडाल में पहाड़ी और ग्रामीण जनजीवन का दृश्य, 30 से ज्यादा प्रतिमाएं

बिहारशरीफ में मां काली का पट खुलते ही उमड़ी भीड़:बीजेपी विधायक ने उतारी आरती; पंडाल में पहाड़ी और ग्रामीण जनजीवन का दृश्य, 30 से ज्यादा प्रतिमाएं

शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी पर बिहार शरीफ के ऐतिहासिक भैंसासुर काली चौराहा पर मां काली की पूजा-अर्चना की जा रही है। दर्शन के लिए पूजा पंडाल का पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्थानीय बीजेपी विधायक डॉ. सुनील कुमार ने माता की विधिवत आरती उतारी। समस्त देश और क्षेत्रवासियों के कल्याण, सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। 3200 वर्गफीट में उकेरा गया पहाड़ी, तराई और ग्रामीण जनजीवन का दृश्य इस वर्ष भैंसासुर का पूजा पंडाल अपनी अनूठी और प्राकृतिक थीम के चलते पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 3200 वर्गफीट क्षेत्र में फैले इस विशाल पंडाल में मां काली को पहाड़ की प्राकृतिक कंदराओं के बीच विराजित किया गया है। पंडाल के अंदर पहाड़ की तराई में बसे गांवों की पारंपरिक संस्कृति, रहन-सहन और जीवनशैली को हूबहू दर्शाया गया है। इसमें कृषि, बागवानी, गो-पालन, जलस्रोत, सड़क, ग्रामीण स्कूल और अस्पताल से जुड़े कई दृश्य सजीव रूप में पेश किए गए हैं। दृश्य को वास्तविक और जीवंत रूप देने के लिए 30 से अधिक मानव प्रतिमाओं के साथ-साथ दर्जनों पेड़-पौधों के स्वरूप तैयार किए गए हैं, जिसे कारीगरों की टीम ने दिन-रात मेहनत कर तैयार किया है।
माता के आशीर्वाद से ही लगातार छठी बार विधायक: डॉ. सुनील कुमार पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि नवरात्रि 10 दिनों तक चलने वाला सनातन आस्था का महापर्व है, जिसमें मां दुर्गा व मां काली के विभिन्न स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। भैंसासुर की काली पूजा ऐतिहासिक रही है और यह हमेशा से बिहार शरीफ का मुख्य आकर्षण केंद्र रहा है। कई वर्षों से मुझे इस पंडाल के उद्घाटन का सौभाग्य मिलता रहा है। माता की कृपा और जनता के आशीर्वाद से ही मैं लगातार छठी बार बिहार शरीफ का विधायक बना हूं। 150 साल पुरानी है परंपरा, मन्नत मांगने पहुंचे श्रद्धालु पूजा व्यवस्था से जुड़े गोपाल कृष्ण पांडे ने बताया कि भैंसासुर चौराहा पर मां काली की स्थापना करीब 150 वर्षों से होती आ रही है। सप्तमी को पट खुलते ही श्रद्धालु अपने परिवार, बच्चों और समाज की खुशहाली की कामना लेकर मां के दरबार में माथा टेकने पहुंचे। आकर्षक पंडाल और माता के अलौकिक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी हुई है। शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी पर बिहार शरीफ के ऐतिहासिक भैंसासुर काली चौराहा पर मां काली की पूजा-अर्चना की जा रही है। दर्शन के लिए पूजा पंडाल का पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्थानीय बीजेपी विधायक डॉ. सुनील कुमार ने माता की विधिवत आरती उतारी। समस्त देश और क्षेत्रवासियों के कल्याण, सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। 3200 वर्गफीट में उकेरा गया पहाड़ी, तराई और ग्रामीण जनजीवन का दृश्य इस वर्ष भैंसासुर का पूजा पंडाल अपनी अनूठी और प्राकृतिक थीम के चलते पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 3200 वर्गफीट क्षेत्र में फैले इस विशाल पंडाल में मां काली को पहाड़ की प्राकृतिक कंदराओं के बीच विराजित किया गया है। पंडाल के अंदर पहाड़ की तराई में बसे गांवों की पारंपरिक संस्कृति, रहन-सहन और जीवनशैली को हूबहू दर्शाया गया है। इसमें कृषि, बागवानी, गो-पालन, जलस्रोत, सड़क, ग्रामीण स्कूल और अस्पताल से जुड़े कई दृश्य सजीव रूप में पेश किए गए हैं। दृश्य को वास्तविक और जीवंत रूप देने के लिए 30 से अधिक मानव प्रतिमाओं के साथ-साथ दर्जनों पेड़-पौधों के स्वरूप तैयार किए गए हैं, जिसे कारीगरों की टीम ने दिन-रात मेहनत कर तैयार किया है।
माता के आशीर्वाद से ही लगातार छठी बार विधायक: डॉ. सुनील कुमार पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि नवरात्रि 10 दिनों तक चलने वाला सनातन आस्था का महापर्व है, जिसमें मां दुर्गा व मां काली के विभिन्न स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। भैंसासुर की काली पूजा ऐतिहासिक रही है और यह हमेशा से बिहार शरीफ का मुख्य आकर्षण केंद्र रहा है। कई वर्षों से मुझे इस पंडाल के उद्घाटन का सौभाग्य मिलता रहा है। माता की कृपा और जनता के आशीर्वाद से ही मैं लगातार छठी बार बिहार शरीफ का विधायक बना हूं। 150 साल पुरानी है परंपरा, मन्नत मांगने पहुंचे श्रद्धालु पूजा व्यवस्था से जुड़े गोपाल कृष्ण पांडे ने बताया कि भैंसासुर चौराहा पर मां काली की स्थापना करीब 150 वर्षों से होती आ रही है। सप्तमी को पट खुलते ही श्रद्धालु अपने परिवार, बच्चों और समाज की खुशहाली की कामना लेकर मां के दरबार में माथा टेकने पहुंचे। आकर्षक पंडाल और माता के अलौकिक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी हुई है।  

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