भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज में MBBS फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट ने सीनियर स्टूडेंट्स पर रैगिंग और धमकाने के आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) में शिकायत की है। शिकायत के मुताबिक, सेकंड और थर्ड ईयर के कुछ स्टूडेंट्स परीक्षा में फेल कराने, बैक लगवाने और कॉलेज की गतिविधियों से दूर रखने की धमकियां देते हैं। स्टूडेंट ने अपने माता-पिता को भी डराने का आरोप लगाया है। NMC के एंटी रैगिंग सेल ने 16 अक्टूबर को कॉलेज प्रबंधन से 24 घंटे में जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। सीनियर स्टूडेंट्स पर जूनियर पर दबाव बनाने का आरोप शिकायत में बताया गया कि सेकंड और थर्ड ईयर के कुछ सीनियर स्टूडेंट्स फर्स्ट ईयर के छात्रों पर रैगिंग में शामिल होने और उनकी बात मानने का दबाव बनाते हैं। मना करने पर परीक्षा में फेल कराने, बैक लगवाने, क्लास में नहीं बैठने देने, जिम जाने से रोकने और खेल मैदान में नहीं खेलने देने की धमकी देने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, सीनियर स्टूडेंट्स बाल कटवाने का दबाव भी बनाते हैं। विरोध करने वाले छात्रों को देख लेने की बात कही जाती है। स्टूडेंट्स के साथ होता है दुर्व्यवहार शाम और रात में कॉलेज मैदान तथा हॉस्टलों में निर्धारित समय पर पहुंचने के लिए दबाव बनाने की शिकायत भी की गई है। मेडिकल स्टूडेंट के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत लेकर जब उसके माता-पिता कॉलेज पहुंचे तो उन्हें भी दबाव और डराने वाली स्थिति का सामना करना पड़ा। 15 अक्टूबर को कॉलेज के सामने स्थित ऑक्सटेल हॉस्टल में कई सीनियर स्टूडेंट्स इकट्ठा हुए। स्टूडेंट्स व उसके पेरेंट्स को डराने-धमकाने की कोशिश की। एनएमसी ने कॉलेज प्रबंधन से 24 घंटे में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी एनएमसी ने कॉलेज प्रबंधन से 24 घंटे में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की बार-बार सामने आ रही शिकायतों को लेकर यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि रैगिंग पूरी तरह से बंद होनी चाहिए। स्टूडेंट के माता पिता को भी धमकाया शिकायत में आरोप है कि स्टूडेंट् के माता-पिता प्रिंसिपल से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने धमकी से संबंधित वीडियो होने की जानकारी भी दी। पेरेंट्स के साथ बातचीत के दौरान प्रिंसिपल की ओर से कथित तौर पर यह कहे जाने का आरोप है कि, “क्या आपका बच्चा पहली बार घर से बाहर निकला है?” शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सीनियर स्टूडेंट्स से तत्काल पूछताछ नहीं की गई और शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे के बाद ऑक्सटेल हॉस्टल में कई वरिष्ठ छात्रों के एकत्र होने और छात्र व उसके माता-पिता पर दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में प्रिंसिपल डॉ. पूजा गंगराड़े को कई बार फोन किया गया, व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। मैदान-हॉस्टल में जबरन बुलाते हैं स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स को खेल मैदान और हॉस्टल के कमरों में जबरन बुलाकर परेशान करते हैं। शाम को 4 बजे मैदान में बुलाया जाता है और 6 बजे तक वही रखा जाता है। फिर 6:30 बजे बुलाते हैं और 7:30 बजे छोड़ते हैं। रात 10 बजे फिर से बुलाया जाता है। स्टूडेंट ने इस सिस्टम की जांच की मांग की। छात्र ने आशंका जताई कि यदि समय रहते इसकी इस स्थिति को न रोका गया तो विद्यार्थी मानसिक दबाव में आकर अपने लिए कोई गंभीर नुकसानदायक कदम उठा सकता है। 15 अक्टूबर का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के एंटी रैगिंग सेल ने 16 अक्टूबर को कॉलेज के प्रिंसिपल से 24 घंटे में जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने 15 अक्टूबर की घटना, परीक्षा में फेल कराने की कथित धमकियों, अभिभावकों को डराने और कॉलेज की एंटी रैगिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर जवाब मांगा है। साथ ही ऑक्सटेल हॉस्टल के प्रवेश द्वार, परिसर और आसपास के CCTV फुटेज, विशेषकर 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे के बाद की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को कहा है। आयोग ने पिछले छह महीनों में एंटी-रैगिंग कमेटी, एंटी रैगिंग स्क्वॉड और हॉस्टल कमेटी की बैठकों, निरीक्षणों, ड्यूटी रोस्टर तथा पूर्व शिकायतों पर हुई कार्रवाई के रिकॉर्ड भी तलब किए हैं। शिकायत मिली है लेकिन जांच को लेकर मीटिंग नहीं हुई भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज एंटी रैगिंग कमेटी के डॉ. अनुपम बंसल ने बताया कि-रैगिंग की शिकायत मिली तो है, लेकिन कॉलेज प्रिंसिपल और मैनेजमेंट की ओर से इस मामले में मीटिंग भी नहीं हुई कि जांच करनी है।

