पौआखाली में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित:श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की, शांति व्यवस्था के लिए पुलिस तैनात रही

पौआखाली में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित:श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की, शांति व्यवस्था के लिए पुलिस तैनात रही

किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड के पौआखाली नगर पंचायत स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा हुई। मंदिर में भक्ति का माहौल रहा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की रात करीब 9:30 बजे सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई। आचार्य सुजीत पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह प्रक्रिया पूरी कराई। प्रतिमा स्थापना के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे, जिनमें काफी उत्साह दिखा। मान्यता है कि मां कात्यायनी शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। नवरात्रि के छठे दिन मां के इस स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। भक्तों ने श्रद्धाभाव से मां की आराधना कर क्षेत्र में शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। पूजा के दौरान शांति बनाए रखने के लिए पौआखाली थाना प्रभारी शंखराज कर्ण के निर्देश पर स्थानीय चौकीदार तैनात किए गए थे। पुलिस प्रशासन ने व्यवस्था पर नजर रखी, ताकि धार्मिक आयोजन शांति से संपन्न हो सके। किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड के पौआखाली नगर पंचायत स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा हुई। मंदिर में भक्ति का माहौल रहा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की रात करीब 9:30 बजे सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई। आचार्य सुजीत पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह प्रक्रिया पूरी कराई। प्रतिमा स्थापना के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे, जिनमें काफी उत्साह दिखा। मान्यता है कि मां कात्यायनी शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। नवरात्रि के छठे दिन मां के इस स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। भक्तों ने श्रद्धाभाव से मां की आराधना कर क्षेत्र में शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। पूजा के दौरान शांति बनाए रखने के लिए पौआखाली थाना प्रभारी शंखराज कर्ण के निर्देश पर स्थानीय चौकीदार तैनात किए गए थे। पुलिस प्रशासन ने व्यवस्था पर नजर रखी, ताकि धार्मिक आयोजन शांति से संपन्न हो सके।  

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