ISI ने भारत में जासूसी बजट बढ़ाकर किया 1,300 करोड़, HUMINT नेटवर्क के ज़रिए नेवी और एयरफोर्स को निशाना बनाने का प्लान

ISI ने भारत में जासूसी बजट बढ़ाकर किया 1,300 करोड़, HUMINT नेटवर्क के ज़रिए नेवी और एयरफोर्स को निशाना बनाने का प्लान

पाकिस्तान (Pakistan) की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस यानी आईएसआई (Inter-Services Intelligence – ISI) ने भारत (India) के खिलाफ अपना जासूसी बजट बढ़ा दिया है। खुफिया अधिकारियों के अनुसार पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद आईएसआई ने भारत के खिलाफ जासूसी के लिए अपना सालाना बजट बढ़ाकर 1,300 करोड़ पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। इस बजट का मुख्य उद्देश्य भारतीय नेवी और एयरफोर्स वायु के भीतर एक ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ (HUMINT) नेटवर्क तैयार करना है।

पहले कितना था बजट?

भारत के इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले भारत के खिलाफ जासूसी के लिए आईएसआई का बजट 800 से 900 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के बीच था। भारत के हाथों करारी मात खाने के बाद आईएसआई ने इसे बढ़ाने का फैसला लिया। बजट बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण यह है कि पाकिस्तान भारत के रक्षाबलों में मौजूद अहम लोगों को अपने जाल में फंसाना चाहता है जिससे उनसे खुफिया जानकारी निकलवाई जा सके।

ह्यूमन इंटेलिजेंस नेटवर्क पर काम कर रहा है आईएसआई

पिछले कुछ महीनों में आईएसआई ने विशेष रूप से भारतीय नेवी और एयरफोर्स के भीतर एक बड़ा ह्यूमन इंटेलिजेंस नेटवर्क बनाने पर काम किया है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि आईएसआई लंबे समय से भारतीय सेना के भीतर ह्यूमन इंटेलिजेंस नेटवर्क बनाने की कोशिश जार रहा है। इस नेटवर्क के ज़रिए आईएसआई संवेदनशील जानकारी संभालने वाले अधिकारियों को ‘हनी-ट्रैप’ के ज़रिए या सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर निशाना बनाने की कोशिश करना चाहते हैं। पिछले एक साल में ऐसे नेटवर्क बनाने की लागत काफी बढ़ गई है। अब इन महत्वपूर्ण लक्ष्यों को 15 लाख से 25 लाख पाकिस्तानी रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है, जबकि ऑपरेशन सिंदूर से पहले यह रकम 10 लाख से 15 लाख पाकिस्तानी रुपये के बीच हुआ करती थी।

ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार का बदला लेना चाहता है पाकिस्तान

जानकारी के अनुसार पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर में भारत के हाथों मिली हार और नुकसान का बदला लेना चाहता है। कई उच्च-स्तरीय बैठकों में भारत में जासूसी गतिविधियों के लिए खर्च बढ़ाने का फैसला लिया गया। ह्यूमन इंटेलिजेंस नेटवर्क के अलावा, लॉजिस्टिक्स, सिम कार्ड नेटवर्क, CCTV सर्विलांस मॉड्यूल, और डिजिटल व मीडिया प्रोपेगैंडा के लिए भी अलग से फंड रखा गया है। इससे पहले भी, पाकिस्तान के रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा ऐसी ही गतिविधियों के लिए रखा जाता था।

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