ग्वालियर के महाराज बाड़ा स्थित शासकीय गजराराजा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को विशेष शिविर लगाया गया। इसमें 41 दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को इलेक्ट्रॉनिक साइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र सहित अन्य सहायक उपकरण बांटे गए। शिविर का आयोजन राष्ट्रीय वयोश्री योजना और दिव्यांग सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत किया गया। इसका उद्देश्य दिव्यांगों और बुजुर्गों को सहायक उपकरण देकर उनका जीवन आसान बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इलेक्ट्रॉनिक साइकिल से आना-जाना होगा आसान शिविर में इलेक्ट्रॉनिक साइकिल पाने वाली दिव्यांग महिला सीता ने बताया कि वह लंबे समय से चलने-फिरने की समस्या से परेशान थीं। अब साइकिल मिलने से उनका आना-जाना आसान हो जाएगा। उन्होंने इसे दिव्यांगों के हित में सरकार की अच्छी पहल बताया। इलेक्ट्रॉनिक साइकिल पाने वाले 57 वर्षीय ओमप्रकाश पंजवानी ने बताया कि पहले उन्हें रोजमर्रा के काम और बाजार जाने में परेशानी होती थी। साधारण साइकिल से पहुंचने में अक्सर देरी हो जाती थी। अब इलेक्ट्रॉनिक साइकिल मिलने से सफर सुविधाजनक होगा और समय की बचत भी होगी। दो साल से व्हीलचेयर का इंतजार था शिविर में व्हीलचेयर पाने वाले 72 वर्षीय गोविंद लखेरा ने बताया कि वह दो साल से अधिक उम्र और शारीरिक अक्षमता के कारण चलने-फिरने में परेशानी महसूस कर रहे थे। अब व्हीलचेयर मिलने से उन्हें आने-जाने में आसानी होगी और रोजमर्रा के कामों में राहत मिलेगी। 8 अक्टूबर को हुआ था स्वास्थ्य परीक्षण सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अनुसार, उपकरण वितरण के लिए पहले से योजना बनाई गई थी। 8 अक्टूबर को आयोजित प्राथमिक शिविर में विशेषज्ञों की टीम ने शहर के सैकड़ों दिव्यांगजनों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण किया था। परीक्षण के आधार पर 41 पंजीकृत लाभार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, वॉकिंग स्टिक, श्रवण यंत्र और बैसाखियों के लिए चुना गया था। शुक्रवार को इन्हें उपकरण वितरित किए गए। लाभार्थियों की सुविधा के लिए इंतजाम शिविर में शुक्रवार सुबह से ही लाभार्थियों और उनके परिजनों का आना शुरू हो गया था। जिला प्रशासन और विभाग की ओर से पेयजल, छायादार बैठने की व्यवस्था और सहायता डेस्क का इंतजाम किया गया था। विभाग ने कहा कि प्रयास है कि कोई भी बुजुर्ग या दिव्यांग नागरिक संसाधनों की कमी के कारण बेबस महसूस न करे। सहायक उपकरणों से उन्हें दैनिक कामकाज और आजीविका से जुड़ी गतिविधियां करने में मदद मिलेगी और दूसरों पर निर्भरता कम होगी।

