किशनगंज में मिड-डे मील के भुगतान पर फंसा पेंच:स्कूलों ने गैर-पंजीकृत दुकानदारों से खरीदी फल-सब्जियां, अब GST बिल मांगने से असमंजस

किशनगंज में मिड-डे मील के भुगतान पर फंसा पेंच:स्कूलों ने गैर-पंजीकृत दुकानदारों से खरीदी फल-सब्जियां, अब GST बिल मांगने से असमंजस

किशनगंज के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के भुगतान पर एक नया पेंच फंस गया है। बच्चों को फल और सब्जियां खिलाई जा चुकी हैं, लेकिन अब उनके बिलों के लिए जीएसटी वाउचर मांगे जा रहे हैं। यह मामला जून से सितंबर 2026 तक के बकाया भुगतान से जुड़ा है। स्कूल अक्सर स्थानीय दुकानदारों और छोटे विक्रेताओं से फल-सब्जियां खरीदते हैं, जिनमें से कई जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं हैं। किशनगंज के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने तत्काल जीएसटी बिल-वाउचर उपलब्ध कराने को कहा है। यह निर्देश पटना में हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद आया है, जिसमें SNA SPARSH के जरिए भुगतान के लिए जीएसटी बिल जरूरी बताए गए हैं। फल और सब्जियां कर-मुक्त होती हैं

जीएसटी नियमों के अनुसार, ताजे फल और सब्जियां कर-मुक्त होती हैं, इसलिए इन विक्रेताओं को पंजीकरण की जरूरत नहीं होती। ऐसे में बिना जीएसटी नंबर वाले बिल कैसे दिए जाएं, इस पर असमंजस बना हुआ है। मध्याह्न भोजन के लिए खरीदे गए फल-सब्जियों का इस्तेमाल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने में हो चुका है। ऐसे में अब पुराने बिल-वाउचर जुटाना विद्यालयों के लिए चुनौती बन सकता है। यदि खरीद के समय दुकानदार से GST बिल नहीं लिया गया था और वह GST पंजीकृत भी नहीं है, तो विद्यालय प्रधान भुगतान का दावा किन दस्तावेजों के आधार पर करेंगे? सभी विद्यालयों का भुगतान रोका हालांकि, उपलब्ध पत्र से यह स्पष्ट नहीं होता कि सभी विद्यालयों का भुगतान रोक दिया गया है या मध्याह्न भोजन की आपूर्ति प्रभावित हुई है। बकाया भुगतान में देरी होने पर स्थानीय दुकानदारों और छोटे वेंडरों की कार्यशील पूंजी पर असर पड़ सकता है। छोटे कारोबारी अक्सर उधार या सीमित पूंजी के आधार पर विद्यालयों को सामग्री उपलब्ध कराते हैं। समय पर भुगतान नहीं मिलने से उन्हें आगे भी सामान आपूर्ति करने में परेशानी हो सकती है। वहीं, विद्यालय प्रधानों के सामने बच्चों को नियमित भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पुराने खरीद रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी दस्तावेज तैयार करने की जिम्मेदारी भी है। मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों को नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया और जमीनी स्तर पर खरीदारी की व्यवस्था के बीच तालमेल जरूरी है। किशनगंज के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के भुगतान पर एक नया पेंच फंस गया है। बच्चों को फल और सब्जियां खिलाई जा चुकी हैं, लेकिन अब उनके बिलों के लिए जीएसटी वाउचर मांगे जा रहे हैं। यह मामला जून से सितंबर 2026 तक के बकाया भुगतान से जुड़ा है। स्कूल अक्सर स्थानीय दुकानदारों और छोटे विक्रेताओं से फल-सब्जियां खरीदते हैं, जिनमें से कई जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं हैं। किशनगंज के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने तत्काल जीएसटी बिल-वाउचर उपलब्ध कराने को कहा है। यह निर्देश पटना में हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद आया है, जिसमें SNA SPARSH के जरिए भुगतान के लिए जीएसटी बिल जरूरी बताए गए हैं। फल और सब्जियां कर-मुक्त होती हैं

जीएसटी नियमों के अनुसार, ताजे फल और सब्जियां कर-मुक्त होती हैं, इसलिए इन विक्रेताओं को पंजीकरण की जरूरत नहीं होती। ऐसे में बिना जीएसटी नंबर वाले बिल कैसे दिए जाएं, इस पर असमंजस बना हुआ है। मध्याह्न भोजन के लिए खरीदे गए फल-सब्जियों का इस्तेमाल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने में हो चुका है। ऐसे में अब पुराने बिल-वाउचर जुटाना विद्यालयों के लिए चुनौती बन सकता है। यदि खरीद के समय दुकानदार से GST बिल नहीं लिया गया था और वह GST पंजीकृत भी नहीं है, तो विद्यालय प्रधान भुगतान का दावा किन दस्तावेजों के आधार पर करेंगे? सभी विद्यालयों का भुगतान रोका हालांकि, उपलब्ध पत्र से यह स्पष्ट नहीं होता कि सभी विद्यालयों का भुगतान रोक दिया गया है या मध्याह्न भोजन की आपूर्ति प्रभावित हुई है। बकाया भुगतान में देरी होने पर स्थानीय दुकानदारों और छोटे वेंडरों की कार्यशील पूंजी पर असर पड़ सकता है। छोटे कारोबारी अक्सर उधार या सीमित पूंजी के आधार पर विद्यालयों को सामग्री उपलब्ध कराते हैं। समय पर भुगतान नहीं मिलने से उन्हें आगे भी सामान आपूर्ति करने में परेशानी हो सकती है। वहीं, विद्यालय प्रधानों के सामने बच्चों को नियमित भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पुराने खरीद रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी दस्तावेज तैयार करने की जिम्मेदारी भी है। मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों को नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया और जमीनी स्तर पर खरीदारी की व्यवस्था के बीच तालमेल जरूरी है।  

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