MIL के वरिष्ठ अधिकारी और SMPP के सीईओ रिश्वत मामले में गिरफ्तार, CBI ने बरामद किए 2.23 करोड़

MIL के वरिष्ठ अधिकारी और SMPP के सीईओ रिश्वत मामले में गिरफ्तार, CBI ने बरामद किए 2.23 करोड़

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) के एक वरिष्ठ अधिकारी और गोला-बारूद उत्पादन फर्म एसएमपीपी के सीईओ को गिरफ्तार किया है, जिनपर 500 करोड़ रुपये की आपूर्ति निविदा से जुड़ी ‘‘संवेदनशील रक्षा जानकारी’’ लीक करने के एवज में रिश्वत लेने का आरोप है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। एजेंसी ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि एमआईएल के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार ने कुछ निजी ठेकेदारों और विक्रेताओं के साथ मिलकर, सरकारी फायदा पहुंचाने और सरकारी संस्था के ‘‘रक्षा उत्पादन, खरीद और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी’’ लीक करने के एवज में अवैध रूप से पैसे लिए।

सीबीआई का आरोप है कि लीक जानकारी से देश के रणनीतिक और सुरक्षा हितों को नुकसान पहुंच सकता है, साथ ही ‘‘रक्षा-संबंधी प्रक्रियाओं की अखंडता कमजोर हो सकती है और राष्ट्रीय सुरक्षा व सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।’’
इस घटनाक्रम पर एसएमपीपी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा, ‘‘एजेंसी ने सोमवार को उक्त आरोपी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोप है कि पुणे में म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक के पद पर रहते हुए, आरोपी ने कुछ निजी ठेकेदारों/विक्रेताओं के साथ मिलकर फायदा पहुंचाने के एवज में गैर-कानूनी तौर पर रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार किया।’’
कुमार के अलावा, सीबीआई ने इस मामले में उनके भाई बी. हर्षवर्धन और एसएमपीपी के सीईओ आशीष कंसल को भी गिरफ्तार किया है।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पुणे में आरोपी सरकारी कर्मचारी के ठिकानों पर तलाशी के दौरान 1.73 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा, मैसूरु, बेंगलुरु और दिल्ली में आरोपी के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई और लगभग 50 लाख रुपये नकद तथा आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए।’’
एजेंसी ने आरोप लगाया कि एसएमपीपी लिमिटेड के सीईओ और प्रवर्तक निदेशक कंसल — जो ड्रोन प्रौद्योगिकी और गोला-बारूद बनाने का काम करती है — ने एमआईएल को गोला-बारूद आपूर्ति करने के लिए एसएमपीपी को मिले 500 करोड़ रुपये के सरकारी अनुबंध के सिलसिले में एक साल तक कुमार से लगातार संपर्क बनाए रखा। सीबीआई का आरोप है कि साजिश के तहत, एसएमपीपी का कर्मचारी रवित कुमार तेवतिया भी कुमार के संपर्क में था।

प्राथमिकी में कहा गया है कि कुमार अपनी पत्नी और भाई के जरिए गैर-कानूनी कमाई के बड़े हिस्से की हेराफेरी करता था। सीबीआई ने कहा कि कुमार की पत्नी और भाई पर पैसे छिपाने और अपने पास रखने में मदद करके अपराध में सहायता करने का आरोप है।

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