भारतीय मुक्केबाजी फेडरेशन में अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। फेडरेशन ने अपने महासचिव प्रमोद कुमार को कथित वित्तीय गड़बड़ियों, जांच में सहयोग नहीं करने और अधिकारों के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बीच तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। फेडरेशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया। हालांकि, यह कार्रवाई जांच पूरी होने तक के लिए की गई है और इसे आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा।मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रमोद कुमार पर नवंबर 2025 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी फाइनल्स कप के प्रसारण से जुड़े काम में जरूरी मंजूरी लिए बिना कार्यादेश जारी करने का आरोप है। इस मामले में पिनेकल ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शंस ने करीब 1.5 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा किया है। फेडरेशन के मुताबिक, कुमार ने पहले अध्यक्ष को लिखे पत्र में बताया था कि कंपनी ने आयोजन के प्रायोजन और प्रसारण के लिए 2 करोड़ रुपये देने का भरोसा दिया था। हालांकि, कंपनी ने ऐसी किसी प्रतिबद्धता से इनकार किया है। इस वजह से पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं।निलंबन आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रसारण से जुड़ा कार्यादेश फेडरेशन की वित्त समिति की जरूरी मंजूरी के बिना जारी किया गया था। इस मामले में वित्तीय जिम्मेदारी और प्रक्रिया का पालन किए जाने को लेकर जांच की जा रही है। फिलहाल इन आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।प्रमोद कुमार पर एक राष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता रद्द होने के मामले में भी जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया है। एलीट पुरुष और महिला ओपन मुक्केबाजी चैंपियनशिप हिमाचल प्रदेश के नाहन में 16 से 23 अगस्त तक आयोजित होनी थी, लेकिन इसे अंतिम समय पर रद्द कर दिया गया। इस घटना की जांच के लिए 17 अगस्त को समिति बनाई गई थी। निलंबन आदेश के अनुसार, कुमार ने बार-बार अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन समिति के सवालों का जवाब नहीं दिया।गौरतलब है कि निलंबन से एक दिन पहले कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर फेडरेशन के अध्यक्ष अजय सिंह और कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश रोकने के लिए उन्हें डराया-धमकाया गया। हालांकि, अरुण मलिक ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।फेडरेशन में विवाद का एक अन्य कारण अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश भी है। पिछले सप्ताह कुमार ने 28 अक्टूबर को विशेष आम बैठक बुलाने की घोषणा की थी। उनका दावा था कि कई राज्य इकाइयों का समर्थन उनके साथ है। निलंबन आदेश में कहा गया है कि फेडरेशन के संविधान के तहत जरूरी मंजूरी के बिना उन्हें इस तरह की बैठक बुलाने या वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं था।आदेश के मुताबिक, कुमार ने फेडरेशन के अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसे संदेश भी भेजे, जिनमें अध्यक्ष के अधिकार को नजरअंदाज करने और प्रशासन पर अपना नियंत्रण होने का दावा करने की बात कही गई है। निलंबन के बाद उन्हें महासचिव के तौर पर काम करने, फेडरेशन की ओर से आधिकारिक संदेश भेजने और जांच से जुड़े रिकॉर्ड तक पहुंचने से रोक दिया गया है।फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने, जांच में बाधा डालने या अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने पर आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल जांच पूरी होने तक प्रमोद कुमार महासचिव की जिम्मेदारियां नहीं निभा सकेंगे। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और फेडरेशन के नियमों के तहत आगे होने वाली कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।
भारतीय मुक्केबाजी फेडरेशन में अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। फेडरेशन ने अपने महासचिव प्रमोद कुमार को कथित वित्तीय गड़बड़ियों, जांच में सहयोग नहीं करने और अधिकारों के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बीच तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। फेडरेशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया। हालांकि, यह कार्रवाई जांच पूरी होने तक के लिए की गई है और इसे आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रमोद कुमार पर नवंबर 2025 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी फाइनल्स कप के प्रसारण से जुड़े काम में जरूरी मंजूरी लिए बिना कार्यादेश जारी करने का आरोप है। इस मामले में पिनेकल ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शंस ने करीब 1.5 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा किया है। फेडरेशन के मुताबिक, कुमार ने पहले अध्यक्ष को लिखे पत्र में बताया था कि कंपनी ने आयोजन के प्रायोजन और प्रसारण के लिए 2 करोड़ रुपये देने का भरोसा दिया था। हालांकि, कंपनी ने ऐसी किसी प्रतिबद्धता से इनकार किया है। इस वजह से पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं।
निलंबन आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रसारण से जुड़ा कार्यादेश फेडरेशन की वित्त समिति की जरूरी मंजूरी के बिना जारी किया गया था। इस मामले में वित्तीय जिम्मेदारी और प्रक्रिया का पालन किए जाने को लेकर जांच की जा रही है। फिलहाल इन आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
प्रमोद कुमार पर एक राष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता रद्द होने के मामले में भी जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया है। एलीट पुरुष और महिला ओपन मुक्केबाजी चैंपियनशिप हिमाचल प्रदेश के नाहन में 16 से 23 अगस्त तक आयोजित होनी थी, लेकिन इसे अंतिम समय पर रद्द कर दिया गया। इस घटना की जांच के लिए 17 अगस्त को समिति बनाई गई थी। निलंबन आदेश के अनुसार, कुमार ने बार-बार अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन समिति के सवालों का जवाब नहीं दिया।
गौरतलब है कि निलंबन से एक दिन पहले कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर फेडरेशन के अध्यक्ष अजय सिंह और कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश रोकने के लिए उन्हें डराया-धमकाया गया। हालांकि, अरुण मलिक ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
फेडरेशन में विवाद का एक अन्य कारण अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश भी है। पिछले सप्ताह कुमार ने 28 अक्टूबर को विशेष आम बैठक बुलाने की घोषणा की थी। उनका दावा था कि कई राज्य इकाइयों का समर्थन उनके साथ है। निलंबन आदेश में कहा गया है कि फेडरेशन के संविधान के तहत जरूरी मंजूरी के बिना उन्हें इस तरह की बैठक बुलाने या वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं था।
आदेश के मुताबिक, कुमार ने फेडरेशन के अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसे संदेश भी भेजे, जिनमें अध्यक्ष के अधिकार को नजरअंदाज करने और प्रशासन पर अपना नियंत्रण होने का दावा करने की बात कही गई है। निलंबन के बाद उन्हें महासचिव के तौर पर काम करने, फेडरेशन की ओर से आधिकारिक संदेश भेजने और जांच से जुड़े रिकॉर्ड तक पहुंचने से रोक दिया गया है।
फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने, जांच में बाधा डालने या अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने पर आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल जांच पूरी होने तक प्रमोद कुमार महासचिव की जिम्मेदारियां नहीं निभा सकेंगे। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और फेडरेशन के नियमों के तहत आगे होने वाली कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।
Hindi News – News in Hindi – Latest News in Hindi | Prabhasakshi

