जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने 2009-10 शैक्षणिक सत्र से दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में पंजीकृत अधिवक्ताओं के लिए वकालत करने हेतु अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (प्रशासन) मोहम्मद यासीन बेग ने शनिवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। अधिसूचना के अनुसार, अदालत की पूर्ण पीठ की बैठक आठ अक्टूबर को हुई और उसने 19 अगस्त, 2026 को नियम समिति द्वारा की गई सिफारिशों को मंजूरी दे दी।
इसमें कहा गया, ‘‘सभी विधि स्नातक (प्रोफेशनल) जो जम्मू कश्मीर और लद्दाख बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हैं तथा जिन्होंने 2009-10 में या उसके बाद विधि स्नातक की है, उन्होंने यदि भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के नियमों के अध्याय-तीन, भाग-छह के नियम नौ, 10 और 11 के संदर्भ में अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) उत्तीर्ण नहीं की है तो उन्हें यह परीक्षा पास करनी होगी।’’
अधिसूचना में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख विधिज्ञ परिषद के साथ अनंतिम रूप से पंजीकृत नए विधि स्नातकों और अधिवक्ताओं को दो साल के भीतर एआईबीई उत्तीर्ण करने और बीसीआई द्वारा जारी वकालत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के बाद ही नामांकन का अंतिम प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।

