बिहार पंचायत रोजगार सेवक संघ के आह्वान पर बुधवार को औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में कार्यरत पंचायत रोजगार सेवकों ने बैठक कर अपनी समस्याओं और लंबित मांगों पर चर्चा की। इस दौरान रोजगार सेवकों ने मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, सेवा स्थायीकरण और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वर्षों से अनुबंध पर काम करने के बावजूद उन्हें अब तक स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिल पाया है। रोजगार सेवकों ने बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2007 में लिखित परीक्षा के आधार पर हुई थी। तब से वे लगातार पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों और मानदेय में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबे समय से कार्यरत रोजगार सेवकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और उनकी मांगों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। मनरेगा से लेकर सर्वेक्षण और चुनाव तक निभाते हैं जिम्मेदारी बैठक में रोजगार सेवकों ने कहा कि वे मनरेगा और वर्तमान में वीबी जीरामजी योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा पंचायत स्तर पर जनगणना, कृषि भूमि सर्वेक्षण, आवास सर्वेक्षण, राशन वितरण, चुनाव तथा सरकार की अन्य योजनाओं से संबंधित कार्यों का भी निष्पादन करते हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर योजनाओं को धरातल पर उतारने, सरकारी निर्देशों के अनुपालन और रोजगार सृजन से जुड़े कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कई बार उन्हें नियमित जिम्मेदारियों के अलावा अन्य सरकारी कार्यों का भी दायित्व निभाना पड़ता है। रोजगार सेवकों का कहना है कि काम का दायरा और जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके अनुरूप मानदेय में वृद्धि नहीं की गई है। उनका दावा है कि वर्तमान में उन्हें 20 हजार रुपये से भी कम मानदेय मिलता है। वहीं, समय पर भुगतान नहीं होने से घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में परेशानी होती है। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप मानदेय निर्धारित करने की मांग की। मुख्यमंत्री से सकारात्मक पहल करने की अपील पंचायत रोजगार सेवकों ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, वर्षों से अनुबंध पर कार्यरत कर्मियों की सेवा स्थायी करने पर ठोस निर्णय और मानदेय का भुगतान समय पर सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया था। उस समय समस्याओं के समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन रोजगार सेवकों को अब भी अपनी मांगों पर सकारात्मक निर्णय का इंतजार है। रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री से अपील की कि उनकी समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए जल्द आवश्यक पहल की जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा देने वाले कर्मियों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां मिलनी चाहिए। बैठक में पंचायत रोजगार सेवक संघ के जिला सचिव मुकेश कुमार, अमित प्रकाश, मनोज कुमार, आशीष सहित अन्य रोजगार सेवक मौजूद रहे। बैठक के माध्यम से रोजगार सेवकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने और उनके शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई। बिहार पंचायत रोजगार सेवक संघ के आह्वान पर बुधवार को औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में कार्यरत पंचायत रोजगार सेवकों ने बैठक कर अपनी समस्याओं और लंबित मांगों पर चर्चा की। इस दौरान रोजगार सेवकों ने मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, सेवा स्थायीकरण और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वर्षों से अनुबंध पर काम करने के बावजूद उन्हें अब तक स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिल पाया है। रोजगार सेवकों ने बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2007 में लिखित परीक्षा के आधार पर हुई थी। तब से वे लगातार पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों और मानदेय में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबे समय से कार्यरत रोजगार सेवकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और उनकी मांगों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। मनरेगा से लेकर सर्वेक्षण और चुनाव तक निभाते हैं जिम्मेदारी बैठक में रोजगार सेवकों ने कहा कि वे मनरेगा और वर्तमान में वीबी जीरामजी योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा पंचायत स्तर पर जनगणना, कृषि भूमि सर्वेक्षण, आवास सर्वेक्षण, राशन वितरण, चुनाव तथा सरकार की अन्य योजनाओं से संबंधित कार्यों का भी निष्पादन करते हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर योजनाओं को धरातल पर उतारने, सरकारी निर्देशों के अनुपालन और रोजगार सृजन से जुड़े कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कई बार उन्हें नियमित जिम्मेदारियों के अलावा अन्य सरकारी कार्यों का भी दायित्व निभाना पड़ता है। रोजगार सेवकों का कहना है कि काम का दायरा और जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके अनुरूप मानदेय में वृद्धि नहीं की गई है। उनका दावा है कि वर्तमान में उन्हें 20 हजार रुपये से भी कम मानदेय मिलता है। वहीं, समय पर भुगतान नहीं होने से घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में परेशानी होती है। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप मानदेय निर्धारित करने की मांग की। मुख्यमंत्री से सकारात्मक पहल करने की अपील पंचायत रोजगार सेवकों ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, वर्षों से अनुबंध पर कार्यरत कर्मियों की सेवा स्थायी करने पर ठोस निर्णय और मानदेय का भुगतान समय पर सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया था। उस समय समस्याओं के समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन रोजगार सेवकों को अब भी अपनी मांगों पर सकारात्मक निर्णय का इंतजार है। रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री से अपील की कि उनकी समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए जल्द आवश्यक पहल की जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा देने वाले कर्मियों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां मिलनी चाहिए। बैठक में पंचायत रोजगार सेवक संघ के जिला सचिव मुकेश कुमार, अमित प्रकाश, मनोज कुमार, आशीष सहित अन्य रोजगार सेवक मौजूद रहे। बैठक के माध्यम से रोजगार सेवकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने और उनके शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई।

