बिहार के वैशाली के राघोपुर में मंगलवार रात करीब 8:30 बजे गंगा नदी में एक नाव पलट गई। उसपर करीब 30 लोग सवार थे। हादसे में 20 से ज्यादा लोग डूब गए। अब तक 13 बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं। घटना के करीब 10 घंटे बाद भी लापता लोगों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मृतकों की उम्र 6 से 18 साल के बीच थी। इनमें तीन सगी बहनें शामिल थीं। हादसे के बाद सात लोगों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया। उन्हें पटना के NMCH भेजा गया है। आखिर हादसा हुआ कैसे? नाव पर सवार एक लड़की ने दो मासूम भतीजों की कैसे जान बचाई। ये सब सिलसिलेवार ढंग से जानिए मंगलवार की रात करीब 8.10 बजे राघोपुर की रामपुर श्यामचंद पंचायत के एक ही टोले के 25 लोग एक नाव पर सवार होते हैं। सभी लोग पड़ोसी गांव में श्राद्ध का भोज खाने जा रहे थे। नाव किनारे से आगे निकलती है। कुछ दूर जाने के बाद नाव में तेजी से पानी भरने लगता है। नाव पर सवार लोग समझ नहीं पाते कि अब करना क्या है। देखते-देखते नाव में काफी पानी भर जाता है। नाव बीच गंगा में तेजी से डगमगाने लगती है। नाव में मौजूद ज्यादातर बच्चे चिल्लाने लगते हैं। कुछ लोग जान बचाने के लिए नाव से कूद जाते हैं। नाव पर मौजूद लोग कुछ समझ पाते तब तक नाव पानी में समा जाती है। नाव पर मौजूद 15 साल की चांदनी कुमारी अपने दो मासूम भतीजों को डूबते देखती है। वो तेजी से उनका हाथ पकड़ती है और दोनों को 30 मीटर तक खींचती हुई किनारे तक पहुंच जाती है। चांदनी बताती है कि भतीजों को बचाने के बाद वो फिर पानी में लगभग एक घंटे तक रहती है। ताकि और लोगों को बचा सके। भतीजों को बचाने में वो कामयाब हो जाती है। लेकिन उसके बाद उसकी तबीयत खराब होती है। उसे पटना के NMCH में भर्ती कराया जाता है।
अब जानिए नाव पर सवार मासूमों ने क्या बताया नाव पर सवार 7 साल का आदित्य कुमार बताता है कि नाव में एक छोटा सा छेद था, जिससे पानी अंदर आने लगा था। जब नाव डूबने लगी, तो और ज्यादा पानी अंदर आने लगा। आखिरकार, नाव पलट गई। जो लोग समय रहते नाव से बाहर नहीं निकल पाए, वे बच नहीं सके। मैंने एक आदमी का पैर पकड़ लिया। उसने मुझे अपने कंधों पर उठा लिया। उसने एक और आदमी को बुलाया, जिसने मुझे पकड़ने के लिए पेड़ की एक मोटी टहनी दी, फिर वह मेरे साथ तैरकर मुझे किनारे ले आया। इस तरह मैं बच पाया।” वहीं 6 साल का अभिराज ने हादसे के बारे में बताया कि नाव में लगभग 20 लोग थे। अचानक, नाव पलटने लगी। नाव में एक छेद था। नाव के पूरी तरह पलटने से पहले ही मैं पानी में कूद गया। मेरे दादाजी ने मुझे बचाया। मेरे साथ मौजूद बाकी लोग डूब गए। अस्पताल में एक साथ 13 लाश देखकर सहम गए लोग हादसे के बाद अनुमंडल अस्पताल का 13 लाशें सफेद चादर से लिपटीं पड़ी थीं। उन लाशों के बीच कोई अपने बच्चे की पहचान में जुटा था तो कोई इस कोशिश में था कि अब उनका बेटा बोल पड़ेगा। मृतक की मां से मिलकर रो पड़ी वैशाली की डीएम जब DM वर्षा सिंह घटनास्थल पर पहुंचीं, तो वहां मौजूद लोगों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों की मांग थी कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। कुछ लोगों ने स्थानीय अंचल अधिकारी (CO) के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग भी की। उनका कहना था कि अगर पहले की गई शिकायतों पर कार्रवाई हुई होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया। देर रात करीब एक बजे पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद बचाव अभियान जारी रहा। हादसे की खबर के बाद जिले की डीएम वर्षा सिंह मौके पर पहुंची। लेकिन के बीच नाराजगी थी। लोगों ने विरोध करना शुरू किया, लेकिन समझाने के बाद मामला शांत हो गया। एक महिला डीएम के पास आई। वो उनको गले पकड़कर रोने लगी। डीएम भी भावुक हो गईं। ————– ये खबर भी पढ़ें भास्कर एक्सक्लूसिव- बिहार- ‘मेरे सामने सारे बच्चे छटपटाते हुए डूब गए’:पिता बोले- लकड़ी लेकर लाश ढूंढी, डेढ़ घंटे बाद आई रेस्क्यू टीम; नाव हादसे की आंखों देखी मेरी आंखों के सामने 15 से ज्यादा बच्चे डूब रहे थे। हमलोग लकड़ी के सहारे शवों को बाहर निकाल रहे थे। हम लोगों ने तीन साल पहले प्रशासन से नाव की खराब हालत की शिकायत की थी। हर बार आश्वासन मिलता कि मरम्मत करा दी जाएगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आज हमारे परिवार के सात बच्चों की मौत हो गई। अब हम क्या मांग सकते हैं?” पूरी खबर पढ़ें बिहार के वैशाली के राघोपुर में मंगलवार रात करीब 8:30 बजे गंगा नदी में एक नाव पलट गई। उसपर करीब 30 लोग सवार थे। हादसे में 20 से ज्यादा लोग डूब गए। अब तक 13 बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं। घटना के करीब 10 घंटे बाद भी लापता लोगों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मृतकों की उम्र 6 से 18 साल के बीच थी। इनमें तीन सगी बहनें शामिल थीं। हादसे के बाद सात लोगों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया। उन्हें पटना के NMCH भेजा गया है। आखिर हादसा हुआ कैसे? नाव पर सवार एक लड़की ने दो मासूम भतीजों की कैसे जान बचाई। ये सब सिलसिलेवार ढंग से जानिए मंगलवार की रात करीब 8.10 बजे राघोपुर की रामपुर श्यामचंद पंचायत के एक ही टोले के 25 लोग एक नाव पर सवार होते हैं। सभी लोग पड़ोसी गांव में श्राद्ध का भोज खाने जा रहे थे। नाव किनारे से आगे निकलती है। कुछ दूर जाने के बाद नाव में तेजी से पानी भरने लगता है। नाव पर सवार लोग समझ नहीं पाते कि अब करना क्या है। देखते-देखते नाव में काफी पानी भर जाता है। नाव बीच गंगा में तेजी से डगमगाने लगती है। नाव में मौजूद ज्यादातर बच्चे चिल्लाने लगते हैं। कुछ लोग जान बचाने के लिए नाव से कूद जाते हैं। नाव पर मौजूद लोग कुछ समझ पाते तब तक नाव पानी में समा जाती है। नाव पर मौजूद 15 साल की चांदनी कुमारी अपने दो मासूम भतीजों को डूबते देखती है। वो तेजी से उनका हाथ पकड़ती है और दोनों को 30 मीटर तक खींचती हुई किनारे तक पहुंच जाती है। चांदनी बताती है कि भतीजों को बचाने के बाद वो फिर पानी में लगभग एक घंटे तक रहती है। ताकि और लोगों को बचा सके। भतीजों को बचाने में वो कामयाब हो जाती है। लेकिन उसके बाद उसकी तबीयत खराब होती है। उसे पटना के NMCH में भर्ती कराया जाता है।
अब जानिए नाव पर सवार मासूमों ने क्या बताया नाव पर सवार 7 साल का आदित्य कुमार बताता है कि नाव में एक छोटा सा छेद था, जिससे पानी अंदर आने लगा था। जब नाव डूबने लगी, तो और ज्यादा पानी अंदर आने लगा। आखिरकार, नाव पलट गई। जो लोग समय रहते नाव से बाहर नहीं निकल पाए, वे बच नहीं सके। मैंने एक आदमी का पैर पकड़ लिया। उसने मुझे अपने कंधों पर उठा लिया। उसने एक और आदमी को बुलाया, जिसने मुझे पकड़ने के लिए पेड़ की एक मोटी टहनी दी, फिर वह मेरे साथ तैरकर मुझे किनारे ले आया। इस तरह मैं बच पाया।” वहीं 6 साल का अभिराज ने हादसे के बारे में बताया कि नाव में लगभग 20 लोग थे। अचानक, नाव पलटने लगी। नाव में एक छेद था। नाव के पूरी तरह पलटने से पहले ही मैं पानी में कूद गया। मेरे दादाजी ने मुझे बचाया। मेरे साथ मौजूद बाकी लोग डूब गए। अस्पताल में एक साथ 13 लाश देखकर सहम गए लोग हादसे के बाद अनुमंडल अस्पताल का 13 लाशें सफेद चादर से लिपटीं पड़ी थीं। उन लाशों के बीच कोई अपने बच्चे की पहचान में जुटा था तो कोई इस कोशिश में था कि अब उनका बेटा बोल पड़ेगा। मृतक की मां से मिलकर रो पड़ी वैशाली की डीएम जब DM वर्षा सिंह घटनास्थल पर पहुंचीं, तो वहां मौजूद लोगों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों की मांग थी कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। कुछ लोगों ने स्थानीय अंचल अधिकारी (CO) के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग भी की। उनका कहना था कि अगर पहले की गई शिकायतों पर कार्रवाई हुई होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया। देर रात करीब एक बजे पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद बचाव अभियान जारी रहा। हादसे की खबर के बाद जिले की डीएम वर्षा सिंह मौके पर पहुंची। लेकिन के बीच नाराजगी थी। लोगों ने विरोध करना शुरू किया, लेकिन समझाने के बाद मामला शांत हो गया। एक महिला डीएम के पास आई। वो उनको गले पकड़कर रोने लगी। डीएम भी भावुक हो गईं। ————– ये खबर भी पढ़ें भास्कर एक्सक्लूसिव- बिहार- ‘मेरे सामने सारे बच्चे छटपटाते हुए डूब गए’:पिता बोले- लकड़ी लेकर लाश ढूंढी, डेढ़ घंटे बाद आई रेस्क्यू टीम; नाव हादसे की आंखों देखी मेरी आंखों के सामने 15 से ज्यादा बच्चे डूब रहे थे। हमलोग लकड़ी के सहारे शवों को बाहर निकाल रहे थे। हम लोगों ने तीन साल पहले प्रशासन से नाव की खराब हालत की शिकायत की थी। हर बार आश्वासन मिलता कि मरम्मत करा दी जाएगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आज हमारे परिवार के सात बच्चों की मौत हो गई। अब हम क्या मांग सकते हैं?” पूरी खबर पढ़ें

