बेटे को चोरी के मामले में फंसाने का आरोप:मैनपुरी एसपी से पिता ने जांच की मांग की, बोले- पुरानी रंजिश में फंसाया जा रहा

बेटे को चोरी के मामले में फंसाने का आरोप:मैनपुरी एसपी से पिता ने जांच की मांग की, बोले- पुरानी रंजिश में फंसाया जा रहा

मैनपुरी में पड़ोसी के घर हुई चोरी के मामले में बेटे का नाम सामने आने पर पिता ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर जांच की मांग की है। घटना 19 अगस्त रात की है। आरोप है कि घटना के करीब डेढ़ महीने बाद उनके बेटे पर पड़ोसी ने चोरी का आरोप लगाया है। मामला बेवर थाना क्षेत्र के गांव गंगरवाला का है। मामले में कुछ आरोपियों को पुलिस जेल भेज चुकी है। जानिए पूरा मामला… बेवर थाना क्षेत्र के गांव गंगरवाला निवासी राजेंद्र कुमार ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि पुरानी रंजिश के चलते उनके बेटे अभिषेक को चोरी के मामले में झूठा फंसाने की कोशिश की जा रही है। पिता का कहना है कि घटना के करीब डेढ़ महीने बाद उनके बेटे पर चोरी का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है। पीड़ित ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज करवाया था मामला राजेंद्र कुमार के मुताबिक, 19 अगस्त 2026 की रात गांव में उनके पड़ोसी दिलीप पिता रामप्रकाश और गांव के ही अजेंद्र पिता रामस्वरूप के घर चोरी की घटनाएं हुई थीं। इस संबंध में 20 अगस्त को बेवर थाने में अज्ञात चोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। राजेंद्र का कहना है कि अजेंद्र के यहां हुई चोरी के मामले में कुछ आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि अब दिलीप उनके बेटे अभिषेक पर अपने घर में चोरी करने का आरोप लगा रहा है। पुरानी रंजिश में बेटे को फंसाने का आरोप राजेंद्र ने आरोप लगाया कि उनके और दिलीप के परिवार के बीच पहले से विवाद चला आ रहा है। इसी रंजिश के कारण उनके बेटे का नाम चोरी की घटना में जोड़ा जा रहा है। उनका आरोप है कि दिलीप आए दिन मुकदमे में फंसाने की धमकी देता है। उनके परिवार के खिलाफ दूसरे मुकदमे भी दर्ज कराए जाएंगे। पिता का कहना है कि चोरी की घटना के समय उनके बेटे ने वारदात नहीं की थी, इसके बावजूद उसे आरोपी बनाए जाने की कोशिश की जा रही है। पिता बोले- परिवार पुलिस जांच में सहयोग को तैयार राजेंद्र कुमार ने कहा कि उनका परिवार पुलिस की जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से अपील है कि किसी भी आरोप को अंतिम सच मानने के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जाए।

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