महोबा में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित गरबा और डांडिया महोत्सव में 350 से अधिक महिलाओं और बच्चियों ने हिस्सा लिया। यहां गरबा और डांडिया की धुन पर नृत्य के साथ युवतियों ने हाथों में तलवारें लहराकर महिला सशक्तिकरण और आत्मरक्षा का संदेश दिया। 15 सहेलियों की मां चंडिका उत्सव समिति की ओर से महानगरों की तर्ज पर आयोजित यह कार्यक्रम देर रात तक चला। शहर के सरस्वती विद्या मंदिर कॉलेज में मंगलवार देर रात एक बजे तक गरबा और डांडिया महोत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां दुर्गा के चित्र के सामने दीप प्रज्वलन और बच्चियों की गणेश वंदना से हुई। इसके बाद महिलाओं और युवतियों ने गरबा और डांडिया प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। तलवार डांस रहा आकर्षण का केंद्र महोत्सव में युवतियों का तलवार डांस आकर्षण का केंद्र रहा। रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य से प्रेरित प्रस्तुति के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए अन्याय और गलत आचरण का विरोध करने में भी सक्षम हैं। आयोजन में शामिल महिलाओं ने भक्ति के साथ साहस और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया।
समिति की शुरुआत निधि रावत और उनकी 14 सहेलियों ने की थी। पिछले नौ साल से लगातार आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम के लिए 350 महिलाओं और बच्चियों को 10 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रज्ञा द्विवेदी, अंजलि पचौरी और छाया तिवारी ने बताया कि पहले गरबा और डांडिया के आयोजन बड़े महानगरों तक सीमित माने जाते थे, लेकिन अब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिल रहा है। कार्यक्रम में जाति और वर्ग के भेदभाव के बिना महिलाओं, बहुओं और बच्चियों ने हिस्सा लिया। परिवार के पुरुषों और सास-ससुर के सहयोग से महिलाओं ने घर की चहारदीवारी से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। देर रात तक चले इस आयोजन को देखने के लिए विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

