भास्कर न्यूज | अमृतसर बीआरटीएस प्रोजेक्ट को डिस्मेंटल करने के मामले में मंगलवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई हुई। नगर निगम द्वारा प्रोजेक्ट के रूट को तोड़ने के लिए टेंडर जारी कर काम शुरू करवाने के फैसले को अमृतसर विकास मंच ने पीआईएल (जनहित याचिका) के जरिए चुनौती दी है। मंच का तर्क है कि करीब 600 करोड़ की लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट को बिना ठोस कारण बंद करने से सरकारी पैसे की बर्बादी होगी और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली डबल बेंच में सरकार ने अपना पक्ष रखा। अदालत ने अगली सुनवाई 27 अक्टूबर तय की है। फिलहाल बीआरटीएस रूट को तोड़ने का काम बंद है। अमृतसर विकास मंच की याचिका में बीआरटीएस प्रोजेक्ट को हटाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए सार्वजनिक धन के नुकसान की बात कही गई है। अब 27 अक्टूबर की सुनवाई में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

