भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू इन दिनों काफी चर्चा में हैं। अरबों डॉलर की नेटवर्थ होने के बावजूद वेम्बू गांव में रहते हैं और साइकिल से चलते हैं। वेम्बू ने कहा है कि कंपनी इस साल कर्मचारियों की नियमित वेतन वृद्धि नहीं कर पाएगी। वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि कंपनी ने मार्केटिंग बजट में कटौती की है। कर्मचारियों को भी बता दिया गया है कि इस साल सामान्य तौर पर होने वाली सैलरी बढ़ोतरी संभव नहीं होगी। उन्होंने इसके लिए कर्मचारियों से माफी भी मांगी। उनके मुताबिक, कंपनी में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही सर्वर और डेटा सेंटर से जुड़ा खर्च भी बढ़ गया है। उन्होंने सर्वर की कीमतों में चार गुना उछाल का जिक्र किया। सॉफ्टवेयर कारोबार का भविष्य भी फिलहाल स्पष्ट नहीं है और दुनिया के मुश्किल आर्थिक हालात दबाव बढ़ा रहे हैं।
कितनी है श्रीधर वेम्बू की कुल संपत्ति?
फोर्ब्स के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक श्रीधर वेम्बू और उनके दो भाई-बहनों की संयुक्त संपत्ति करीब 5.8 अरब डॉलर थी। इस संपत्ति के साथ परिवार भारत के सबसे अमीर लोगों की फोर्ब्स सूची में 46वें स्थान पर था। जोहो एक निजी कंपनी है और वेम्बू का परिवार इसमें बहुमत हिस्सेदारी रखता है। कंपनी के विस्तार के साथ परिवार की संपत्ति में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। फोर्ब्स के अनुसार, 2020 में वेम्बू के पास जोहो की करीब 88% हिस्सेदारी थी। उस समय उनकी संपत्ति लगभग 2.44 अरब डॉलर आंकी गई थी। इसके बाद संपत्ति में दोगुने से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।
IIT मद्रास से प्रिंसटन यूनिवर्सिटी तक पढ़ाई
श्रीधर वेम्बू का जन्म 1968 में हुआ था। उनका पालन-पोषण तमिलनाडु के एक साधारण परिवार में हुआ। उन्होंने IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और 1989 में अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। उन्होंने न्यू जर्सी की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और पीएचडी हासिल की। वेम्बू ने अपने करियर की शुरुआत अमेरिका की क्वालकॉम कंपनी में वायरलेस इंजीनियर के तौर पर की।
छोटे सॉफ्टवेयर कारोबार से कैसे बनी Zoho?
वेम्बू ने 1996 में अपने भाई-बहनों और तीन अन्य सहयोगियों के साथ एडवेंटनेट की शुरुआत की। शुरुआती दौर में कंपनी नेटवर्किंग हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों को सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराती थी। समय के साथ कंपनी ने अपना कारोबार बढ़ाया और क्लाउड बेस्ड सॉफ्टवेयर पर ध्यान केंद्रित किया। साल 2009 में एडवेंटनेट का नाम बदलकर जोहो कॉरपोरेशन कर दिया गया। आज जोहो कंपनियों को ग्राहक प्रबंधन यानी CRM और कारोबार चलाने के लिए कई तरह के सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराती है। कंपनी ने दुनिया के अलग-अलग बाजारों में अपनी पहचान बनाई है।
बड़े शहर के बजाए गांव में रहना चुना
श्रीधर वेम्बू ने 2019 में तमिलनाडु के तेनकासी में रहना शुरू किया। उनका यह फैसला इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि आम तौर पर बड़ी टेक कंपनियों के संस्थापक महानगरों या प्रमुख कारोबारी केंद्रों में रहते हैं। वेम्बू का विचार तकनीक को छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के विकास से जोड़ने का रहा है। वह चाहते हैं कि तकनीकी क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के अवसर केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें। भारत सरकार ने तकनीकी उद्योग में उनके योगदान और अर्थव्यवस्था में भूमिका के लिए 2021 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। वे अक्सर साइकिल से चलते दिख जाते हैं। अरबों की संपत्ति के बावजूद उनके सादा जीवन के काफी चर्चे हुए हैं।
क्या Zoho में कर्मचारियों की छंटनी भी होगी?
जोहो में सैलरी नहीं बढ़ाने के फैसले के बीच कर्मचारियों की नौकरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वेम्बू ने कहा है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 18 महीनों में जोहो ने अपने कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई है। वेम्बू के मुताबिक, सॉफ्टवेयर सेक्टर में नौकरियों का फ्यूचर चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।
उनकी चिंता केवल कंपनी के खर्च तक सीमित नहीं है। वे AI के कारण पूरी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में होने वाले बदलावों को लेकर भी आशंकित हैं। अगर एआई कई ऐसे काम करने लगे, जिनके लिए पहले विशेषज्ञों की जरूरत होती थी, तो रोजगार के पुराने तौर-तरीके बदल सकते हैं।
AI से इंसानी इंटेलिजेंस को भी चुनौती: वेम्बू
वेम्बू ने एक दूसरी पोस्ट में एआई के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि समाज में लंबे समय से बौद्धिक क्षमता को बहुत महत्व दिया जाता रहा है, लेकिन AI इस सोच को चुनौती दे रहा है। उन्होंने लिखा कि आधुनिक समाज, खासकर पश्चिमी समाज, इंटेलिजेंस को बहुत ऊंचा स्थान देता है। लेकिन अब यह मान्यता नए सवालों के घेरे में है।
वेम्बू ने शुद्ध गणित का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे इंसानों की सबसे ऊंची बौद्धिक गतिविधियों में गिना जाता है, लेकिन एआई इस क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री समेत कई बौद्धिक कामों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
उनका सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI इंसानों से कौन से काम छीन सकता है। असली सवाल यह भी है कि जब केवल बौद्धिक क्षमता किसी व्यक्ति को दूसरों से अलग पहचान नहीं दिला पाएगी, तब इंसान को आगे क्या करना चाहिए।

