नोएडा सिग्नेचर ब्रिज के नीचे बनना है अंडरपास:सात दिन में IIT से आ जाएगी DPR, 80 करोड़ बजट , 18 महीने में होगा पूरा

नोएडा सिग्नेचर ब्रिज के नीचे बनना है अंडरपास:सात दिन में IIT से आ जाएगी DPR, 80 करोड़ बजट , 18 महीने में होगा पूरा

नोएडा के पर्थला चौक और एफएनजी कॉरिडोर पर रोज लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। यहां सिग्नेचर ब्रिज के नीचे 6 लेन का अंडरपास बनाया जाएगा। इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) अगले हफ्ते नोएडा प्राधिकरण को मिल जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट बोर्ड के सामने रखी जाएगी। मंजूरी मिलने पर टेंडर जारी कर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अंडरपास बनाने पर करीब 80 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। प्राधिकरण इसका डिजाइन जारी कर चुका है। डिजाइन की जांच IIT दिल्ली से कराई जा रही है। इसके बाद प्रोजेक्ट की वास्तविक लागत तय होगी। फिर मिट्टी की जांच समेत निर्माण से जुड़ी दूसरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। 710 मीटर लंबा होगा अंडरपास प्रस्तावित अंडरपास करीब 710 मीटर लंबा होगा। इसमें दोनों तरफ तीन-तीन लेन बनाई जाएंगी। योजना के मुताबिक, 110 मीटर लंबा RCC बॉक्स, 20 मीटर का खुला हिस्सा और दोनों तरफ 280-280 मीटर लंबे पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे। बारिश में पानी भरने की समस्या से निपटने के लिए दो संप और पंपिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा। निर्माण में डायफ्राम वॉल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे खुदाई के दौरान आसपास की जमीन और मौजूदा ढांचे को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। पर्थला चौक पर दिनभर रहता है वाहनों का दबाव पर्थला चौक एफएनजी कॉरिडोर और विकास मार्ग का प्रमुख जंक्शन है। यहां से गाजियाबाद, एनएच-9, मेरठ एक्सप्रेसवे, नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले वाहन गुजरते हैं। भविष्य में फरीदाबाद की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी बढ़ने से भी इस रास्ते की अहमियत बढ़ेगी। अभी सुबह और शाम के व्यस्त समय में यहां वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। अंडरपास बनने से इस दबाव को कम करने और यातायात सुचारु करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इन इलाकों के लोगों को होगा फायदा अंडरपास बनने से सेक्टर-66, 71, 121, 122, छिजारसी और किसान चौक के आसपास रहने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे एफएनजी कॉरिडोर पर आवाजाही आसान हो सकती है। साथ ही लोगों का यात्रा समय घटने और सड़क सुरक्षा बेहतर होने की भी उम्मीद है। परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय प्रस्तावित किया गया है। फिलहाल DPR मिलने, डिजाइन की जांच और बोर्ड से मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होनी है। इसके बाद टेंडर जारी होने पर निर्माण का काम आगे बढ़ेगा।

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