हाईकोर्ट से बीएसएनएल को दी बड़ी राहत:कोर्ट ने कहा 75 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट बिना होगी अवार्ड के खिलाफ सुनवाई

हाईकोर्ट से बीएसएनएल को दी बड़ी राहत:कोर्ट ने कहा 75 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट बिना होगी अवार्ड के खिलाफ सुनवाई

​इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत संचार निगम लिमिटेड को एक अहम मामले में राहत प्रदान की है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कमर्शियल कोर्ट आगरा में एमएसएमई फैसिलिटेशन काउंसिल के पंचाट (अवॉर्ड) के खिलाफ दायर धारा 34 की याचिका पर 75 फीसदी राशि पूर्व-जमा की शर्त के बिना शीघ्र सुनवाई पूरी की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने बीएसएनएल की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया है। क्या है मामला जानिये बीएसएनएल और विपक्षी पार्टी के बीच वर्ष 2017 में जयपुर क्षेत्र में हाउसकीपिंग व अन्य सेवाओं को लेकर अनुबंध हुआ था। विवाद होने पर मामला उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सुविधा परिषद आगरा के समक्ष गया। काउंसिल ने 15 फरवरी 2025 को विपक्षी के पक्ष में अवार्ड पारित कर दिया।
इस अवार्ड को चुनौती देते हुए बीएसएनएल ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम1996 की धारा 34 के तहत कमर्शियल कोर्ट संख्या-1 आगरा में याचिका दाखिल की। कमर्शियल कोर्ट ने 4 जुलाई 2026 को आदेश दिया कि एमएसएमई एक्ट 2006 की धारा 19 के तहत कुल राशि का 75 प्रतिशत जमा करने के बाद ही याचिका पर विचार किया जाएगा। प्री-डिपॉजिट के आदेश के खिलाफ केस कमर्शियल कोर्ट के इस प्री-डिपॉजिट के आदेश के खिलाफ बीएसएनएल ने यह याचिका की। बीएसएनएल के अधिवक्ता ने एमटीएनएल बनाम एमएसएमई काउंसिल मामले में सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें धारा 34 की कार्यवाही बिना प्री-डिपॉजिट की बाध्यता के संचालित करने का निर्देश दिया गया था। क्लेमेंट के अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि उनके मुवक्किल 75 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट की शर्त पर जोर नहीं दे रहे हैं ताकि मामले के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो और कमर्शियल कोर्ट जल्द अंतिम निर्णय दे सके। निष्पक्ष फैसला सुनाने के लिए स्वतंत्र है ​कोर्ट ने ​दोनों पक्षों की सहमति और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों को संज्ञान में लेते हुए याचिकाओं को निस्तारित करते हुए निर्देश दिया कि कमर्शियल कोर्ट आगरा बिना 75 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट पर जोर दिए धारा 34 के तहत दायर याचिका पर त्वरित सुनवाई करे। यह भी कहा कि मामले में बेवजह तारीखें न दी जाएं। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही सुनवाई स्थगित की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की गई है इसलिए कमर्शियल कोर्ट विधि सम्मत निष्पक्ष फैसला सुनाने के लिए स्वतंत्र है।

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