भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने से इनकार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक करना ‘शक्तियों के बंटवारे’ के सिद्धांत के खिलाफ होगा। सीजेआई ने 11 अक्टूबर को लिखे एक पत्र में कांग्रेस नेताओं की उस अपील को ठुकरा दिया, जिसमें उन्होंने सोमवार को मुलाकात का समय मांगा था। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च से पहले एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। सीईसी के इस्तीफ़े के अलावा, इस मेमोरेंडम में वोट की चोरी को रोकने, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को बंद करने और पेपर बैलेट सिस्टम को फिर से शुरू करने की मांग भी की जानी थी। 11 अक्टूबर को लिखे अपने पत्र में सीजेआई कांत ने कहा कि उनकी अपील में उठाए गए मुद्दे पहले से ही कोर्ट में विचाराधीन हैं और किसी मीटिंग में लंबित मामलों पर चर्चा करना न्यायिक मर्यादा के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का पूरी तरह से उल्लंघन होगा, जो भारतीय संविधान के मूल ढांचे के सिद्धांत का एक अहम हिस्सा है।
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लेटर में आगे सीजेआई कांत ने साफ़ किया कि कांग्रेस नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास प्रशासनिक अधिकार नहीं हैं। हालाँकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोर्ट का यह फ़र्ज़ है कि वह न्यायिक कार्यवाही के ज़रिए नागरिकों के अधिकारों पर असर डालने वाले मामलों पर विचार करे। लेटर में कहा गया कि भारत का सुप्रीम कोर्ट भारत के हर नागरिक के मौलिक अधिकारों को बनाए रखने और उनकी रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराता है।” इसमें यह भी कहा गया कि नागरिकों को कानून द्वारा तय प्रक्रिया के ज़रिए इन अधिकारों को लागू करवाने की माँग करने का अधिकार है।
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सीजेआई ने आगे कहा कि प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन सौंपने के बजाय, गाँधी और खड़गे के लिए सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करना ज़्यादा सही होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह के मुद्दों वाले मामलों की सुनवाई मंगलवार को होनी है। लेटर में कहा गया अगर सलाह दी जाए, तो आप सोमवार को अपनी याचिका या तो भारत के सुप्रीम कोर्ट में सुबह 10.30 बजे से शाम 4.30 बजे के बीच खुद जाकर जमा कर सकते हैं, या फिर ई-फाइलिंग ऑप्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे किसी भी दिन और किसी भी समय फाइलिंग की जा सकती है। सीजेआई ने नेताओं को भरोसा दिलाया कि कानून के मुताबिक, फाइल की गई किसी भी याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी। 9 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक की कई पार्टियों के नेताओं ने संसद से विजय चौक तक मार्च किया और बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा। खड़गे ने कहा था कि विपक्ष के नेता CJI को अपनी चिंताओं से अवगत कराना चाहते थे और उन्होंने कहा कि वे केवल बैठक का अनुरोध कर सकते थे।
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राज्यसभा सांसद ने उस समय कहा था, हमने (CJI से) समय मांगा है। हम उन्हें जानकारी देंगे, क्योंकि हम मांग नहीं कर सकते। हम केवल हाथ जोड़कर उनसे अनुरोध कर सकते हैं। चुनाव में कथित गड़बड़ियों को लेकर अपनी मांगों के समर्थन में ‘इंडिया’ गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट तक चलो दिल्ली – लोकतंत्र के लिए मार्च विरोध प्रदर्शन सोमवार को शुरू होना है। यह मार्च बाराखंबा रोड जंक्शन से शुरू होगा। राहुल गांधी के अनुसार, इस मार्च में अलग-अलग राजनीतिक दलों, लिंग, जाति, समुदाय और राज्यों के लोग एक साथ आएंगे।
Here is a copy of CJI Shri Surya Kant’s letter to Congress President & LoP in Rajya Sabha Shri @kharge and LoP in Lok Sabha Shri @RahulGandhi. https://t.co/n76NmufJ9P
— Congress (@INCIndia) October 12, 2026

