रोहतक की अनाजमंडी में धान व बाजरे की सरकारी खरीद न होने के कारण किसान परेशान नजर आ रहे है। पिछले 15 दिन से किसान ढेरिया लेकर बैठे हैं, लेकिन उनकी फसल को खरीदा नहीं जा रहा। विवश होकर कुछ किसान आढ़तियों को औने-पौने दामों में फसल बेचने को विवश हो गए है। अनाजमंडी में पहुंचे किसान बालकराम सहरावत ने बताया कि धान की सरकारी खरीद नहीं हो रही। जमीदारों को परेशान करने का काम चल रहा है। आढ़ती भी फसल में नमी अधिक बताकर 300 से 400 रुपए कम में फसल खरीद रहे है। सरकार ने पीआर धान का 2461 रुपए मूल्य निर्धारित कर रखा है, लेकिन आढ़ती 2000 से 2100 रुपए में फसल ले रहे है। सरकार की करनी व कथनी में अंतर
गांव रिटोली से किसान यूनियन के उपप्रधान लाहौर सिंह ने बताया कि किसान की फसल में पहले ही नमी बता दी जाती है और बरसात के बाद नमी ओर बढ़ गई है। तिरपाल पर अब भी रात को हुई बारिश का पानी जमा है। किसान की हालत आसमान से गिरा और खजूर में अटके जैसी हो गई है। लाहौर सिंह ने बताया कि सरकार के कागजों व बातों में फसल की खरीद हो रही है, जबकि हकीकत में किसान की फसल मंड़ियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी है। किसान विवश होकर आढ़तियों को कम दाम में फसल बेच रहा है। सरकार की कथनी और करनी में काफी अंतर है। मार्केट कमेटी के नहीं मिलते अधिकारी
लाहौर सिंह ने बताया कि जमीदार 15 दिन से फसल लेकर बैठा है, लेकिन कोई खरीद के लिए नहीं आया। इसको लेकर यूनियन की तरफ से ज्ञापन देने मार्केट कमेटी सचिव के पास गए, लेकिन वहां कोई नहीं मिलता। विवश होकर उन्हें वापस आना पड़ता है। सरकार हर बात खरीद का दावा करती है, लेकिन खरीद नहीं हो रही। किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे आढ़ती
किसान कालूराम निवासी गांव रिठाल फौगाट ने बताया कि जमीदार की कोई सुनने वाला नहीं है। सरकारी खरीद नहीं हो रही। जब किसान घर पहुंच जाता है तब अधिकारी आते है, जिसका कोई फायदा नहीं। आढ़ती भी किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे है। भूखे प्यासे बैठे किसान अपनी फसल को निर्धारित मूल्य से कम में बेचने को विवश हो जाता है।

