चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 में देशभर से आए 200 से ज्यादा MBBS छात्रों ने मरीजों के इलाज में काम आने वाली जरूरी मेडिकल प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग ली। छात्रों को टांके लगाने की तकनीक और सांस की नली को संभालने का व्यावहारिक अभ्यास करवाया गया। इसके साथ ही मेडिकल क्विज, केस प्रेजेंटेशन और रिसर्च से जुड़े सत्रों के जरिए छात्रों को अपनी जानकारी और अनुभव साझा करने का मौका मिला। जीएमसीएच-32 में पहली बार आयोजित दो दिवसीय मेडिकल कॉन्फ्रेंस ‘मेडमॉर्फोसिस’ का 11 अक्टूबर को समापन हुआ। संस्थान के रिसर्च सेल की ओर से 10 और 11 अक्टूबर को आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में उत्तर भारत के विभिन्न संस्थानों से MBBS छात्र शामिल हुए। इसका उद्देश्य मेडिकल की पढ़ाई के दौरान छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ मरीजों के इलाज से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव देना था। टांके लगाने और एयरवे मैनेजमेंट की ट्रेनिंग कॉन्फ्रेंस में छात्रों के लिए बेसिक स्यूचरिंग यानी घाव पर टांके लगाने की तकनीक और एयरवे मैनेजमेंट यानी मरीज की सांस की नली को खुला रखने और सांस लेने में मदद करने से संबंधित वर्कशॉप आयोजित की गईं। इन सत्रों में छात्रों को जरूरी क्लिनिकल प्रक्रियाओं की जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा मेडिकल क्विज और केस प्रेजेंटेशन प्रतियोगिताओं में छात्रों ने हिस्सा लिया। केस प्रेजेंटेशन से उन्हें मेडिकल मामलों को समझने, अपनी रिसर्च प्रस्तुत करने और दूसरे छात्रों के साथ विचार साझा करने का अवसर मिला। फैकल्टी सदस्यों ने भी छात्रों को मार्गदर्शन दिया और क्लिनिकल निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। अब हर साल आयोजित होगी कॉन्फ्रेंस संस्थान की डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. रवनीत कौर की पहल पर शुरू की गई ‘मेडमॉर्फोसिस’ को हर साल आयोजित करने की योजना है। इसका उद्देश्य मेडिकल छात्रों की थ्योरी और अस्पताल में मरीजों के इलाज के दौरान होने वाली प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के बीच की दूरी कम करना है, ताकि भविष्य के डॉक्टर बेहतर क्लिनिकल समझ और कौशल के साथ तैयार हो सकें। कॉन्फ्रेंस में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विशाल गुलानी, प्रोफेसर इंचार्ज एकेडमिक्स डॉ. उमा हांडा और रिसर्च सेल के कन्वीनर डॉ. सुक्षम जैन ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का समन्वय MBBS फाइनल ईयर के छात्र अतिशय जैन और अर्नव चुग ने किया।

