समस्तीपुर में शनिवार सुबह मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। तेज हवा के साथ बारिश हुई। बारिश होने से गर्मी से राहत मिली है, लेकिन खेतों में तैयार धान की फसल गिर गई। जबकि सब्जियों की खेती को भी भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में जलजमाव से फूलगोभी, बंदगोभी, बैंगन, मिर्च, बरबट्टी, नेनुआ, कद्दू, सीम और केले की फसल प्रभावित हुई है। कई जगह पेड़-पौधे उखड़कर गिर गए। वहीं, मकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है। आंधी-पानी का सबसे ज्यादा असर ताजपुर प्रखंड में देखने को मिला है। जिले के अन्य प्रखंडों में भी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। समस्तीपुर सदर, मोरवा, खानपुर, सरायरंजन, बिथान और हसनपुर सहित कई इलाकों में आंधी-बारिश से किसानों को नुकसान हुआ है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। माले और किसान महासभा की टीम ने नुकसान का जायजा लिया आंधी-पानी से बर्बाद हुई फसलों का जायजा लेने के लिए भाकपा माले और अखिल भारतीय किसान महासभा की संयुक्त टीम ने ताजपुर प्रखंड के विभिन्न इलाकों का दौरा किया। टीम ने प्रभावित खेतों में पहुंचकर फसलों को हुए नुकसान का निरीक्षण किया। इसका नेतृत्व भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह और अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने किया। निरीक्षण के बाद नेताओं ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों, पेड़-पौधों और मकानों को हुए नुकसान की तत्काल जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आंधी-पानी ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। तैयार धान की फसल खेतों में गिरने और सब्जियों की खेती बर्बाद होने से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। किसानों को मुआवजा और अगली फसल के लिए मुफ्त संसाधन देने की मांग माले और किसान महासभा के नेताओं ने सरकार से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को अगली फसल लगाने के लिए खाद, बीज, बिजली, पानी और कृषि यंत्र निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही कृषि ऋण माफ करने की भी मांग उठाई, ताकि किसान प्राकृतिक आपदा से उबरकर दोबारा खेती शुरू कर सकें। नेताओं ने प्रशासन से क्षति का निष्पक्ष आकलन कराकर प्रभावित किसानों को अविलंब राहत और मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि समय पर सहायता नहीं मिली तो फसल बर्बाद होने से आर्थिक संकट झेल रहे किसानों के लिए अगली फसल की तैयारी करना मुश्किल हो सकता है। समस्तीपुर में शनिवार सुबह मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। तेज हवा के साथ बारिश हुई। बारिश होने से गर्मी से राहत मिली है, लेकिन खेतों में तैयार धान की फसल गिर गई। जबकि सब्जियों की खेती को भी भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में जलजमाव से फूलगोभी, बंदगोभी, बैंगन, मिर्च, बरबट्टी, नेनुआ, कद्दू, सीम और केले की फसल प्रभावित हुई है। कई जगह पेड़-पौधे उखड़कर गिर गए। वहीं, मकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है। आंधी-पानी का सबसे ज्यादा असर ताजपुर प्रखंड में देखने को मिला है। जिले के अन्य प्रखंडों में भी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। समस्तीपुर सदर, मोरवा, खानपुर, सरायरंजन, बिथान और हसनपुर सहित कई इलाकों में आंधी-बारिश से किसानों को नुकसान हुआ है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। माले और किसान महासभा की टीम ने नुकसान का जायजा लिया आंधी-पानी से बर्बाद हुई फसलों का जायजा लेने के लिए भाकपा माले और अखिल भारतीय किसान महासभा की संयुक्त टीम ने ताजपुर प्रखंड के विभिन्न इलाकों का दौरा किया। टीम ने प्रभावित खेतों में पहुंचकर फसलों को हुए नुकसान का निरीक्षण किया। इसका नेतृत्व भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह और अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने किया। निरीक्षण के बाद नेताओं ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों, पेड़-पौधों और मकानों को हुए नुकसान की तत्काल जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आंधी-पानी ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। तैयार धान की फसल खेतों में गिरने और सब्जियों की खेती बर्बाद होने से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। किसानों को मुआवजा और अगली फसल के लिए मुफ्त संसाधन देने की मांग माले और किसान महासभा के नेताओं ने सरकार से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को अगली फसल लगाने के लिए खाद, बीज, बिजली, पानी और कृषि यंत्र निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही कृषि ऋण माफ करने की भी मांग उठाई, ताकि किसान प्राकृतिक आपदा से उबरकर दोबारा खेती शुरू कर सकें। नेताओं ने प्रशासन से क्षति का निष्पक्ष आकलन कराकर प्रभावित किसानों को अविलंब राहत और मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि समय पर सहायता नहीं मिली तो फसल बर्बाद होने से आर्थिक संकट झेल रहे किसानों के लिए अगली फसल की तैयारी करना मुश्किल हो सकता है।

