नालंदा मंडल कारा में बड़ी चूक:रिहा होना था सतीश को, बाहर आ गया चंद्रदीप; जेल उपाधीक्षक समेत तीन कर्मी सस्पेंड

नालंदा मंडल कारा में बड़ी चूक:रिहा होना था सतीश को, बाहर आ गया चंद्रदीप; जेल उपाधीक्षक समेत तीन कर्मी सस्पेंड

नालंदा स्थित मंडल कारा में घोर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। जेल प्रशासन ने रिहाई के आदेश पर एक बंदी की जगह दूसरे विचाराधीन बंदी को जेल से बाहर भेज दिया। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जेल उपाधीक्षक समेत तीन अधिकारियों-कर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। नाम और पिता के नाम में उलझा प्रशासन अस्थावां थाना कांड संख्या 201/26 और 203/26 के तहत विचाराधीन बंदी सोयवापर गांव निवासी नागो बिंद के बेटे सतीश चौहान उर्फ सतीश बिंद की रिहाई का आदेश आया था। 24 सितंबर को जेल प्रशासन ने सत्यापन में भारी चूक करते हुए सतीश की जगह उसी गांव और पिता के नाम वाले दूसरे विचाराधीन बंदी चंद्रदीप चौहान उर्फ चंद्रदीप बिंद को अनाधिकृत रूप से रिहा कर दिया। चंद्रदीप अस्थावां थाना कांड संख्या 362/25 का आरोपी था। गलती सुधारी, आरोपी ने किया सरेंडर मामला संज्ञान में आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद 2 अक्टूबर को सुबह में वैध आदेश के आधार पर सतीश चौहान को नियमानुसार जेल से रिहा किया गया। वहीं, गलत पहचान के कारण बाहर आए चंद्रदीप चौहान ने 2 अक्टूबर को ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन दोपहर 3:00 बजे उसे फिर से मंडल कारा भेज दिया गया। जांच में खुली पोल, तीन नपे मामले की गंभीरता को देखते हुए नालंदा जिला पदाधिकारी ने पूरे प्रकरण की संयुक्त जांच के आदेश दिए। अनुमंडल पदाधिकारी बिहार शरीफ, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 बिहार शरीफ की संयुक्त जांच रिपोर्ट में कर्मियों की गंभीर लापरवाही और चूक की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकार ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए जेल उपाधीक्षक अरविंद कुमार, सहायक जेल अधीक्षक अमरेंद्र कुमार और कक्षपाल सह प्रवेश शाखा सहायक नवीस कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तीनों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। नालंदा स्थित मंडल कारा में घोर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। जेल प्रशासन ने रिहाई के आदेश पर एक बंदी की जगह दूसरे विचाराधीन बंदी को जेल से बाहर भेज दिया। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जेल उपाधीक्षक समेत तीन अधिकारियों-कर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। नाम और पिता के नाम में उलझा प्रशासन अस्थावां थाना कांड संख्या 201/26 और 203/26 के तहत विचाराधीन बंदी सोयवापर गांव निवासी नागो बिंद के बेटे सतीश चौहान उर्फ सतीश बिंद की रिहाई का आदेश आया था। 24 सितंबर को जेल प्रशासन ने सत्यापन में भारी चूक करते हुए सतीश की जगह उसी गांव और पिता के नाम वाले दूसरे विचाराधीन बंदी चंद्रदीप चौहान उर्फ चंद्रदीप बिंद को अनाधिकृत रूप से रिहा कर दिया। चंद्रदीप अस्थावां थाना कांड संख्या 362/25 का आरोपी था। गलती सुधारी, आरोपी ने किया सरेंडर मामला संज्ञान में आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद 2 अक्टूबर को सुबह में वैध आदेश के आधार पर सतीश चौहान को नियमानुसार जेल से रिहा किया गया। वहीं, गलत पहचान के कारण बाहर आए चंद्रदीप चौहान ने 2 अक्टूबर को ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन दोपहर 3:00 बजे उसे फिर से मंडल कारा भेज दिया गया। जांच में खुली पोल, तीन नपे मामले की गंभीरता को देखते हुए नालंदा जिला पदाधिकारी ने पूरे प्रकरण की संयुक्त जांच के आदेश दिए। अनुमंडल पदाधिकारी बिहार शरीफ, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 बिहार शरीफ की संयुक्त जांच रिपोर्ट में कर्मियों की गंभीर लापरवाही और चूक की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकार ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए जेल उपाधीक्षक अरविंद कुमार, सहायक जेल अधीक्षक अमरेंद्र कुमार और कक्षपाल सह प्रवेश शाखा सहायक नवीस कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तीनों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।  

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