त्योहार पर खरीदारी के लिए बाजार पहुंचेंगे, तो सबसे पहले दुकान नहीं, सड़क तलाशनी पड़ेगी। शहर के प्रमुख बाजारों में दुकानों के बाहर फैलता सामान, सड़क पर लगे होर्डिंग, टेबल-कुर्सियां और ठेलों ने राहगीरों के हिस्से की जगह तक निगल ली है। हालात यह है कि 40 फीट चौड़ी सड़क कई जगह 30 फीट बन जाती है। बाजार में भीड़ बढ़ने के साथ सड़क और सिकुड़ रही है। ऐसे में ग्राहक पैदल चलने के बजाय वाहनों के बीच से निकलने को मजबूर है। त्योहारी सीजन में खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़ कई गुना बढ़ेगी, तब यही अतिक्रमण जाम और अव्यवस्था को और बढ़ाएगा। चास के चेकपोस्ट से जोधाडीह मोड़ तक बाजार की तस्वीर अलग-अलग है, लेकिन समस्या एक ही है… दुकान की सीमा खत्म होते ही सड़क पर कब्जा शुरू। कहीं कपड़े और अन्य सामान दुकान से कई फीट बाहर तक सजा है तो कहीं अस्थायी दुकानें लग गई हैं। थोड़ी बची हुई जगह भी ठेलों और सब्जी वालों ने घेर ली है। नतीजा यह कि सड़क पर चलने वाले वाहन और पैदल ग्राहक आवाजाही के लिए जूझ रहे हैं। सड़क का हिस्सा ही कमाई का जरिया एक दुकानदार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ ठेला संचालक दुकान के आगे जगह लेने के लिए करीब 200 रुपए रोजाना देते हैं। आइसक्रीम की गाड़ियों से इससे अधिक पैसे मिलते हैं। यानी जहां ग्राहक के चलने की जगह होनी चाहिए, वहां रोज कमाई किया जा रहा है। कुछ पैसों की लालच में अपनी दुकान के आगे ठेला लगवाते हैं। ठेला या अस्थाई दुकानों के साथ यह समस्या है कि सड़क के किनारे और दुकान के बीच अपनी दुकान लगाते है। निगम का दावा- रखी जा रही है निगरानी चास के मेनरोड स्थित महावीर चौक के पास लगी सड़क जाम। चास में कई व्यापारियों ने दुकान के बाहर चार फीट से अधिक जगह तक सामान फैला रखा है। इससे पैदल रास्ता खत्म हो गया है। दुकानों के सामने वाहनों की पार्किंग ने समस्या और बढ़ा दी है। ग्राहक सड़क के बीच से निकलने को मजबूर हैं। वन-वे व्यवस्था के बावजूद रॉन्ग साइड वाहन निकलते नजर आते हैं। धर्मशाला चौक, महावीर चौक के आसपास के बाजारों में दुकानों के बाहर सामान बढ़ने से सड़क की वास्तविक उपयोगी चौड़ाई घटती जा रही है। कई जगह बिजली के खंभों से सटकर भी दुकानें लग रही हैं। इससे दुर्घटना की संभावना रहती है। सड़क पर सामान के कारण पार्किंग की भी समस्या त्योहार पर खरीदारी के लिए बाजार पहुंचेंगे, तो सबसे पहले दुकान नहीं, सड़क तलाशनी पड़ेगी। शहर के प्रमुख बाजारों में दुकानों के बाहर फैलता सामान, सड़क पर लगे होर्डिंग, टेबल-कुर्सियां और ठेलों ने राहगीरों के हिस्से की जगह तक निगल ली है। हालात यह है कि 40 फीट चौड़ी सड़क कई जगह 30 फीट बन जाती है। बाजार में भीड़ बढ़ने के साथ सड़क और सिकुड़ रही है। ऐसे में ग्राहक पैदल चलने के बजाय वाहनों के बीच से निकलने को मजबूर है। त्योहारी सीजन में खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़ कई गुना बढ़ेगी, तब यही अतिक्रमण जाम और अव्यवस्था को और बढ़ाएगा। चास के चेकपोस्ट से जोधाडीह मोड़ तक बाजार की तस्वीर अलग-अलग है, लेकिन समस्या एक ही है… दुकान की सीमा खत्म होते ही सड़क पर कब्जा शुरू। कहीं कपड़े और अन्य सामान दुकान से कई फीट बाहर तक सजा है तो कहीं अस्थायी दुकानें लग गई हैं। थोड़ी बची हुई जगह भी ठेलों और सब्जी वालों ने घेर ली है। नतीजा यह कि सड़क पर चलने वाले वाहन और पैदल ग्राहक आवाजाही के लिए जूझ रहे हैं। सड़क का हिस्सा ही कमाई का जरिया एक दुकानदार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ ठेला संचालक दुकान के आगे जगह लेने के लिए करीब 200 रुपए रोजाना देते हैं। आइसक्रीम की गाड़ियों से इससे अधिक पैसे मिलते हैं। यानी जहां ग्राहक के चलने की जगह होनी चाहिए, वहां रोज कमाई किया जा रहा है। कुछ पैसों की लालच में अपनी दुकान के आगे ठेला लगवाते हैं। ठेला या अस्थाई दुकानों के साथ यह समस्या है कि सड़क के किनारे और दुकान के बीच अपनी दुकान लगाते है। निगम का दावा- रखी जा रही है निगरानी चास के मेनरोड स्थित महावीर चौक के पास लगी सड़क जाम। चास में कई व्यापारियों ने दुकान के बाहर चार फीट से अधिक जगह तक सामान फैला रखा है। इससे पैदल रास्ता खत्म हो गया है। दुकानों के सामने वाहनों की पार्किंग ने समस्या और बढ़ा दी है। ग्राहक सड़क के बीच से निकलने को मजबूर हैं। वन-वे व्यवस्था के बावजूद रॉन्ग साइड वाहन निकलते नजर आते हैं। धर्मशाला चौक, महावीर चौक के आसपास के बाजारों में दुकानों के बाहर सामान बढ़ने से सड़क की वास्तविक उपयोगी चौड़ाई घटती जा रही है। कई जगह बिजली के खंभों से सटकर भी दुकानें लग रही हैं। इससे दुर्घटना की संभावना रहती है। सड़क पर सामान के कारण पार्किंग की भी समस्या

