भदोही के चौरी थाना क्षेत्र में युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अदालत ने अरुण कुमार जायसवाल को दोषी ठहराया है। अपर सत्र न्यायाधीश दुर्गेश की अदालत ने गुरुवार को उसे 5 साल के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर दोषी को 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कंप्यूटर सेंटर पर पढ़ाती थी युवती मामला 19 जून 2018 का है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी अरुण कुमार जायसवाल के कंप्यूटर सेंटर पर पढ़ाती थी। घटना वाले दिन अरुण ने फोन कर बताया कि युवती ने फांसी लगा ली है। आरोप है कि उसे अस्पताल ले जाते समय अरुण रास्ते से भाग गया था। मामले में पुलिस ने धारा 306 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना की। पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के निर्देश पर ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत मामले में प्रभावी पैरवी की गई। स्थानीय पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और एडीजीसी देवेंद्र कुमार सिंह की पैरवी के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अरुण कुमार जायसवाल को दोषी ठहराया और 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

