यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है। अगर यह और बढ़ता गया तो नाटो देशों की परेशानी बढ़ सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पुर्तगाल में पत्रकारों से बात करते हुए यह चेतावनी दी।
रूबियो ने साफ कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध खतरनाक गतिरोध पर अटक गया है। दोनों तरफ से ड्रोन हमले बढ़ रहे हैं। ये हमले अब सिर्फ सीमा पर नहीं रुकते। ऊर्जा प्लांट, रिफाइनरी, बंदरगाह, तेल और अनाज ले जाने वाले जहाज, ई-कॉमर्स गोदाम और हाल ही में डेटा सेंटर तक निशाने पर आ रहे हैं।
जंग को खत्म कराने में जुटा अमेरिका
रूबियो ने खुलकर कहा- यह सिलसिला अगर जारी रहा तो पड़ोसी नाटो देशों में तोड़फोड़ की मुहिम शुरू हो सकती है। फिर यह जंग दो देशों की नहीं रह जाएगी। पूरा इलाका आग में जल सकता है।
अमेरिका इस जंग को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है। रूबियो ने कहा- हम चाहते हैं कि इस युद्ध का कोई स्थायी, टिकाऊ और उचित समझौता हो। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं।
अमेरिका पहुंचने वाला है यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार पिछले कुछ हफ्तों से बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिश में जुटी है। यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार और शनिवार को अमेरिका में वार्ता के लिए पहुंचने वाला है।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चार साल बीत गए हैं। दोनों तरफ भारी नुकसान हो चुका है। रूबियो ने जोर दिया कि जल्दी समझौता हो, उतना ही बेहतर। अमेरिका मध्यस्थता के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कोशिश की गई है और आगे भी की जाएगी।
नाटो देश भी इस आग में घिर गए तो स्थिति और बिगड़ जाएगी
रूबियो ने कहा- अगर कोई ठोस प्रगति नहीं होती तो बेकार की प्रक्रिया में समय बर्बाद नहीं किया जाएगा। रूबियो की ये बातें ऐसे समय आई हैं जब युद्ध का असर सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है।
अगर नाटो देश भी इस आग में घिर गए तो स्थिति और बिगड़ जाएगी। अमेरिका की कोशिश है कि बातचीत से रास्ता निकले। लेकिन दोनों पक्ष कितना तैयार हैं, यह अभी साफ नहीं है।


Zelenskyy said in Pryluky that Trump and the United States can and should increase pressure on Russia to force Putin into negotiations: European aid helps, but American leverage is stronger. According to him, Putin is instead escalating the war, whereas readiness for peace…
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