कुछ ही दिनों पहले फ्लाईदुबई के एक विमान में डरावना वाकया हुआ था। को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला बोल दिया। इसका मकसद साफ था- प्लेन को क्रैश कराना।
विमान महज 30 सेकंड में 16,000 फीट नीचे गिर गया। इसमें कैप्टन स्मित मच्छार घायल हो गए लेकिन उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद यात्रियों ने मिलकर को-पायलट को काबू में कर लिया।
एक यात्री ने प्लेन को संभालने में मदद की और बोर्ड पर मौजूद स्टैंडबाय क्रू मेंबर ने विमान को सुरक्षित उतार दिया। यह घटना पूरी दुनिया के एयरलाइन उद्योग को हिला गई है।
‘कोई पागल आदमी बैठ जाए तो उसके लिए कानून बनाना बहुत मुश्किल’
ब्रसेल्स में एयरलाइंस फॉर यूरोप की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रमुख एयरलाइन चीफ्स ने पहली बार इस पर बात की। रयानएयर के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव माइकल ओलेरी ने साफ कहा- अगर कॉकपिट में कोई पागल आदमी बैठ जाए तो उसके लिए कानून बनाना बहुत मुश्किल है। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा के मानक ऊंचे हैं लेकिन पूरी तरह गारंटी देना नामुमकिन है।
याद आई साल 2015 की घटना
इस बीच, लुफ्थांसा के चीफ एग्जीक्यूटिव कार्स्टन स्पोहर ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि एविएशन में सौ फीसदी सुरक्षा और सुरक्षा का दावा नहीं किया जा सकता। मानसिक स्वास्थ्य की जांच पहले से ही सख्त है लेकिन हर घटना को रोका नहीं जा सकता।
उन्होंने याद दिलाया कि आखिरी ऐसी बड़ी घटना जर्मनविंग्स की थी जो दस साल पहले हुई थी। 2015 में जर्मनविंग्स के को-पायलट ने कैप्टन को कॉकपिट से बाहर कर दिया और प्लेन को पहाड़ों में टकरा दिया। उस हादसे में 150 लोग मारे गए थे।
को-पायलट ने माना- पहले ही यह हमला प्लान कर रखा था
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाईदुबई को-पायलट ने यूएई में पूछताछ के दौरान बताया कि उसने एयरलाइन में जॉइन करने से पहले ही यह हमला प्लान कर रखा था। दो इजराइली अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। हालांकि, यूएई ने अभी तक कोई औपचारिक आरोप तय नहीं किया है।
सऊदी अरब ने इस घटना की हवाई जांच शुरू कर दी है। अलग से यूएई में आपराधिक जांच भी चल रही है। एयरलाइन प्रमुखों का साफ संदेश है कि सुरक्षा मानक ऊंचे हैं लेकिन रॉग पायलट यानी गलत इरादे वाले पायलट के खिलाफ पूरी सुरक्षा मुश्किल है।


Itay Blumental (@ItayBlumental)
Representação de IA sobre o acontecimento com o voo Flydubai