बांदा में गैंगस्टर एक्ट के मामले में तीन दोषी:हत्या, लूट और वसूली समेत कई मुकदमों का था आपराधिक इतिहास; 4-4 साल की सजा

बांदा में गैंगस्टर एक्ट के मामले में तीन दोषी:हत्या, लूट और वसूली समेत कई मुकदमों का था आपराधिक इतिहास; 4-4 साल की सजा

बांदा में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, वसूली, मारपीट और धमकी समेत कई गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी रहे तीन अभियुक्तों को गैंगस्टर एक्ट के मामले में विशेष अदालत ने दोषी माना है। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीपाल सिंह की अदालत ने गुरुवार को रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह और बलराम उर्फ बल्लू को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत दोषसिद्ध किया। अदालत ने तीनों को चार-चार वर्ष के कठोर कारावास और छह-छह हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। संगठित गिरोह बनाकर अपराध करने का आरोप मामला कोतवाली नगर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार तीनों अभियुक्त संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे और आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए अपराध करते थे। इनके आपराधिक इतिहास और आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंगचार्ट तैयार किया गया था। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद तीनों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। गैंगचार्ट में हत्या से लेकर शस्त्र अधिनियम तक के मुकदमे विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह गिरोह का नेतृत्व करता था। कल्लू सिंह, सुशील सिंह और बलराम उर्फ बल्लू को गिरोह के सक्रिय सदस्य बताया गया था। गैंगचार्ट में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट-वसूली, मारपीट, धमकी, शस्त्र अधिनियम, गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमों का उल्लेख किया गया। अभियोजन के अनुसार हत्या के एक मामले में संबंधित अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा भी हो चुकी है। सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त की मौत मामले में शुरुआत में चार अभियुक्त थे। विचारण के दौरान सुशील सिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। शेष तीन अभियुक्तों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना दोषी अभियोजन ने गैंगचार्ट, आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमों के अभिलेख, एफआईआर, जीडी, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति समेत दस्तावेज अदालत में पेश किए। बचाव पक्ष ने अभियुक्तों को निर्दोष बताते हुए अभियोजन के साक्ष्यों और गैंगचार्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों को गैंगस्टर एक्ट की धारा 3 के तहत दोषी माना और सजा सुनाई। जेल में बिताई अभिरक्षा अवधि सजा में समायोजित होगी अदालत ने पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। फैसला सुनाए जाने के बाद तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार बांदा भेज दिया गया।

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