रिटायरमेंट के लिए बचत करना हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए जरूरी है। इसी मकसद से सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि यानी Provident Fund की व्यवस्था है। सरकारी कर्मचारियों के लिए जनरल प्रोविडेंट फंड यानी जीपीएफ की व्यवस्था है, जबकि संगठित प्राइवट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए एंप्लॉइज प्रोविडेंट फंड यानी ईपीएफ लागू होता है। ये दोनों एक जैसे नहीं हैं। दोनों में पैसा जमा होता है, लेकिन योगदान, नियम और जरूरत पड़ने पर रकम निकालने की शर्तें अलग-अलग हैं।
यहां एक बात जानना जरूरी है। साल 2004 के बाद सरकारी सेवा में शामिल होने वाले कर्मचारी जीपीएफ के दायरे में नहीं आते, क्योंकि वे नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS के तहत आते हैं। इसलिए जीपीएफ से जुड़े नियम मुख्य रूप से उन सरकारी कर्मचारियों पर लागू होते हैं, जो पुरानी पेंशन व्यवस्था के तहत जीपीएफ में शामिल हैं।
GPF में जरूरत पड़ने पर निकाल सकते हैं पैसा
जीपीएफ खाताधारक नौकरी के दौरान कुछ खास जरूरतों के लिए अपने जमा फंड से एडवांस ले सकते हैं। इसमें बच्चों की पढ़ाई, इलाज, शादी, घर खरीदने या बनाने और कुछ उपभोक्ता सामान खरीदने जैसी जरूरतें शामिल हो सकती हैं। आम तौर पर जीपीएफ से मिलने वाला एडवांस 12 महीने की सैलरी या जीपीएफ खाते में जमा रकम के तीन-चौथाई, इनमें से जो कम हो, तक सीमित रहता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में मंजूरी देने वाला अधिकारी जीपीएफ बैलेंस का 90% तक निकालने की अनुमति भी दे सकता है।
| विवरण | GPF | EPF |
|---|---|---|
| किसके लिए | सरकारी कर्मचारी | निजी क्षेत्र के कर्मचारी |
| कौन योगदान करता है | केवल कर्मचारी | कर्मचारी और नियोक्ता दोनों |
| ब्याज दर | 7.1% | 8.25% |
| प्रबंधन/संचालन | पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग | EPFO |
| ज्वाइनिंग कट-ऑफ | 1 जनवरी 2004 से पहले नौकरी ज्वाइन करने वाले कर्मचारी | कोई कट-ऑफ नहीं |
| वेतन सीमा | कोई वेतन सीमा नहीं | ₹25,000 प्रति माह |
वापस चुकाना पड़ता है GPF एडवांस का पैसा
जीपीएफ से लिया गया एडवांस सामान्य बैंक लोन जैसा नहीं होता। इस पर ब्याज नहीं लिया जाता। हालांकि, निकाली गई रकम को वापस जमा करना पड़ता है। आमतौर पर इसकी वसूली अधिकतम 60 मासिक किस्तों में की जा सकती है। यानी कर्मचारी एक साथ बड़ी रकम चुकाने के बजाय धीरे-धीरे पैसा वापस कर सकता है। खास बात यह भी है कि जीपीएफ में एक से ज्यादा एडवांस लिया जा सकता है। अगर पहले वाला एडवांस पूरी तरह वापस नहीं हुआ है और नया एडवांस मंजूर हो जाता है, तो बची हुई रकम को नए एडवांस में जोड़कर किस्तों को दोबारा तय किया जा सकता है।
GPF एडवांस के लिए डॉक्यूमेंट्स देने की जरूरत नहीं
जीपीएफ एडवांस के मामले में कर्मचारी को आमतौर पर क्लेम के साथ अलग से दस्तावेजी सबूत देने की जरूरत नहीं होती। रिक्वेस्ट मिलने के बाद मंजूरी देने वाले अधिकारी को पात्र एडवांस को 15 दिन के भीतर मंजूर कर खाते में जमा करना होता है। यानी प्रक्रिया को ज्यादा लंबा खींचने की व्यवस्था नहीं है।
EPF में निकाली गई रकम वापस नहीं करनी पड़ती
अब EPF की बात करें तो यहां नियम कुछ अलग हैं। ईपीएफ से किसी तय जरूरत के लिए निकाली गई रकम को वापस जमा नहीं करना पड़ता। यानी यह आपके रिटायरमेंट फंड से स्थायी निकासी मानी जाती है। ईपीएफ सदस्य शादी, इलाज, पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए रकम निकाल सकते हैं। नौकरी छूटने या नौकरी छोड़ने के बाद बेरोजगारी की स्थिति में भी ईपीएफ से पैसा निकाला जा सकता है। कितना पैसा निकलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रकम किस काम के लिए चाहिए।
नौकरी छूटने पर EPF से कितना पैसा निकाल सकते हैं?
अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ देता है या उसकी नौकरी चली जाती है, तो वह तुरंत अपने ईपीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकता है। बाकी रकम निकालने के लिए 12 महीने तक बेरोजगार रहना पड़ सकता है। इसलिए नौकरी बदलने या नौकरी छूटने की स्थिति में ईपीएफ का पैसा निकालने से पहले यह देखना जरूरी है कि तत्काल जरूरत कितनी है और रिटायरमेंट के लिए कितना पैसा बचाकर रखना है।
किस-किस काम के लिए निकाल सकते हैं EPF से पैसा
ईपीएफओ मेंबर खुद की या परिवार के सदस्य की शिक्षा से जुड़े खर्च के लिए भी ईपीएफ से रकम निकाल सकते हैं। यह सुविधा पूरी ईपीएफ सदस्यता के दौरान 10 बार तक ली जा सकती है। यानी बार-बार पढ़ाई से जुड़े खर्च आने पर भी तय सीमा के भीतर इस सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, इलाज के लिए ईपीएफ से एडवांस लेने की संख्या पर कोई निश्चित सीमा नहीं है। हालांकि, निकासी की पात्रता और रकम संबंधित ईपीएफ नियमों के मुताबिक तय होती है।
कर्मचारी अपनी शादी या पात्र परिवार के सदस्यों की शादी के खर्च के लिए भी ईपीएफ से रकम निकाल सकता है। इस तरह की निकासी की सुविधा पूरी ईपीएफ सदस्यता अवधि में पांच बार तक ली जा सकती है।


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