नगर निगम पर सफाई व्यवस्था ठप करने का आरोप:कांग्रेस पार्षदों ने किया प्रदर्शन, दशहरा मेले से मुशायरा व कव्वाली हटाने पर जताया ऐतराज

नगर निगम पर सफाई व्यवस्था ठप करने का आरोप:कांग्रेस पार्षदों ने किया प्रदर्शन, दशहरा मेले से मुशायरा व कव्वाली हटाने पर जताया ऐतराज

कोटा नगर निगम में विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था और राष्ट्रीय दशहरा मेले के आयोजन को लेकर निगम प्रशासन और कांग्रेस पार्षदों के बीच सियासी रार बढ़ गई है। कोटा के वार्ड 6 से कांग्रेस की पार्षद आईना महक ने अन्य पार्षदों के साथ मिलकर निगम प्रशासन और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्षद ने निगम में आयुक्त कक्ष के बाहर विरोध जताते हुए निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली, राजनीतिक भेदभाव और अधिकारियों के रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए। पार्षद आईना महक ने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष राजनीतिक द्वेषता की भावना से काम कर रहा है। कांग्रेस पार्षदों के वार्डों की उपेक्षा करने के उद्देश्य से सफाई कर्मचारियों और सेक्टरों का अनुचित फेरबदल किया गया है। राजनीतिक द्वेषता के चलते सफाई व्यवस्था ठप, कागजों में चल रहे कर्मचारी पार्षद आईना महक ने कहा कि डीसीएम क्षेत्र में रहने वाले सफाईकर्मियों को रायपुरा सेक्टर में तैनात कर दिया गया है, जिससे कर्मचारी आने-जाने में ही समय गंवा रहे हैं और क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के दावों की हवा निकल चुकी है; धरातल पर कर्मचारी नदारद हैं, जबकि कागजों में उनकी हाजिरी पूरी दिखाई जा रही है। बिना सूचना दिए शिविरों का आयोजन, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी आईना महक ने कहा कि नगर निगम द्वारा जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लगाए जा रहे राहत शिविरों की पूर्व सूचना क्षेत्र के चुने हुए पार्षदों को नहीं दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनप्रतिनिधियों को ही शिविरों की जानकारी नहीं होगी, तो वे आम जनता को इसका लाभ कैसे दिला पाएंगे? शिविरों के नाम पर महज एक टेबल लगाकर समस्याओं के समाधान की खानापूर्ति की जा रही है। दशहरा मेले से मुशायरा व कव्वाली हटाने पर कड़ा ऐतराज कोटा के सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय दशहरा मेले की तैयारियों पर बात करते हुए पार्षद ने निगम प्रशासन पर सर्वसमाज के सौहार्द को चोट पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दशहरा मेले के आयोजन को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बैठक नहीं बुलाई गई है। इसके साथ ही वर्षों से चली आ रही मुशायरे और कव्वाली के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की परंपरा को इस बार सूची से हटा दिया गया है, जो सीधे तौर पर एक वर्ग विशेष के साथ भेदभाव है। उन्होंने कहा कि यदि निगम किसी एक वर्ग विशेष का ही मेला आयोजित करना चाहता है, तो उसे लिखित में यह स्पष्ट कर देना चाहिए। आयुक्त द्वारा पार्षदों को समय दिए बिना चले जाने पर उन्होंने कहा कि अधिकारी अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से ज्यादा दिन तक नहीं भाग सकते।

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