बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर NDA ने अपनी चुनावी रणनीति तेज कर दी है। गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने और वोटों के बिखराव को रोकने के लिए पटना में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। मुख्यमंत्री आवास पर कल देर शाम NDA के शीर्ष नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें बागी उम्मीदवारों, अंदरूनी असंतोष और चुनाव में वोटों के बिखराव को लेकर मंथन किया गया। अब इसी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 अक्टूबर को शाम 4 बजे NDA विधानमंडल दल की बड़ी बैठक बुलाई है। इसमें NDA के सभी विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख भी 9 अक्टूबर ही है। ऐसे में बैठक में बागियों की स्थिति साफ होने के बाद सभी 8 सीटों पर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। 7 अक्टूबर की बैठक में बागियों को मनाने पर फोकस मुख्यमंत्री आवास पर कल देर शाम हुई बैठक में NDA के घटक दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक का प्रमुख एजेंडा चुनाव में किसी भी तरह के वोट बंटवारे को रोकना था। खासतौर पर गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतरे बागी उम्मीदवारों को मनाने और नामांकन वापस कराने पर चर्चा हुई। नेताओं ने माना कि NDA के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से ज्यादा गठबंधन के अंदर संभावित वोटों के बिखराव को रोकना है। इसके लिए सभी दलों को अपने-अपने स्तर पर असंतुष्ट नेताओं और उम्मीदवारों से बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई है। 8 सीटों पर BJP-JDU के बीच 4-4 का बंटवारा विधान परिषद की इन 8 सीटों पर NDA के तहत भाजपा और जदयू 4-4 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। इनमें से 5 सीटों पर फिलहाल NDA का कब्जा है। खास बात यह है कि इन सीटों पर मौजूदा निवर्तमान सदस्य भी दोबारा चुनाव मैदान में हैं। NDA नेतृत्व की कोशिश है कि मौजूदा सीटों को बचाने के साथ-साथ बाकी सीटों पर भी गठबंधन के प्रत्याशियों को जीत दिलाई जाए। इसी लक्ष्य को लेकर पार्टी संगठन से लेकर सरकार के स्तर तक चुनावी तैयारियों को तेज किया जा रहा है। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच गतिरोध भी चर्चा में कल की बैठक में जदयू के विधायक अनंत सिंह और निवर्तमान एमएलसी नीरज कुमार के बीच चल रहे गतिरोध को लेकर भी चर्चा हुई। NDA नेतृत्व की कोशिश है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह का अंदरूनी विवाद गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशी के लिए नुकसान का कारण न बने। बैठक में नेताओं ने ऐसे सभी मामलों को आपसी बातचीत से सुलझाने और चुनाव के दौरान पूरी तरह एकजुट होकर काम करने पर जोर दिया। रामपुकार सिन्हा के नामांकन से भी बढ़ी चुनौती राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के नेता रामपुकार सिन्हा के नामांकन को लेकर पैदा हुए विवाद पर भी बैठक में चर्चा हुई। NDA नेतृत्व की कोशिश है कि गठबंधन के घटक दलों से जुड़े किसी भी असंतुष्ट उम्मीदवार की वजह से आधिकारिक प्रत्याशियों के वोट प्रभावित न हों। इसके लिए संबंधित दलों के नेताओं को अपने स्तर पर बातचीत कर स्थिति संभालने को कहा गया है। 9 अक्टूबर को नामांकन वापसी की आखिरी तारीख विधान परिषद चुनाव के लिए 9 अक्टूबर को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है। ऐसे में NDA के लिए शुक्रवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गठबंधन की कोशिश है कि नामांकन वापसी की समय सीमा खत्म होने तक बागी उम्मीदवारों को मनाकर मैदान से हटाया जाए। यदि बागी उम्मीदवार नामांकन वापस लेते हैं, तो NDA के आधिकारिक प्रत्याशियों के सामने गठबंधन के भीतर से होने वाला संभावित वोट विभाजन काफी हद तक रोका जा सकेगा। शाम 4 बजे होगी NDA विधानमंडल दल की महाबैठक नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 अक्टूबर को शाम 4 बजे NDA विधानमंडल दल की महाबैठक बुलाई है। इसमें गठबंधन के सभी विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को शामिल होने का निर्देश दिया गया है। बैठक में चुनाव की अंतिम रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। खासकर जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला कड़ा है, वहां नेताओं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। पांचों घटक दलों के बीच तालमेल पर जोर NDA में भाजपा और जदयू के अलावा लोजपा-रामविलास, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी शामिल हैं। विधान परिषद चुनाव में गठबंधन के सभी घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में सभी दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों से आधिकारिक प्रत्याशियों के पक्ष में एकजुट होकर प्रचार करने को कहा जा सकता है। कोशिश होगी कि अलग-अलग दलों के नेता अपने संगठन के वोटरों तक पहुंचें और गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान सुनिश्चित कराएं। संयुक्त प्रचार का रोडमैप होगा तैयार 9 अक्टूबर की बैठक में चुनाव प्रचार को लेकर भी विस्तृत रणनीति तैयार होने की उम्मीद है। NDA नेतृत्व चाहता है कि सभी घटक दल अलग-अलग नहीं, बल्कि साझा रणनीति के तहत चुनाव मैदान में उतरें। इसके लिए निर्वाचन क्षेत्रवार जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं। स्थानीय नेताओं, विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रचार की जिम्मेदारी दी जा सकती है। NDA का लक्ष्य 8 में 8 सीटें जीतना NDA की कोशिश इन आठों सीटों पर जीत हासिल करने की है। गठबंधन के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि गठबंधन के अंदर किसी तरह का वोट विभाजन नहीं हुआ और सभी घटक दल एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरे, तो सभी 8 सीटों पर जीत की संभावना मजबूत हो सकती है। 23 अक्टूबर को मतदान, 27 को आएगा परिणाम बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे। मतदान से पहले अब NDA के सामने सबसे बड़ी चुनौती बागियों को साधने और सभी घटक दलों के बीच जमीनी तालमेल मजबूत करने की है। 9 अक्टूबर की महाबैठक को इसी लिहाज से चुनावी अभियान की अंतिम तैयारियों के लिए अहम माना जा रहा है। बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर NDA ने अपनी चुनावी रणनीति तेज कर दी है। गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने और वोटों के बिखराव को रोकने के लिए पटना में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। मुख्यमंत्री आवास पर कल देर शाम NDA के शीर्ष नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें बागी उम्मीदवारों, अंदरूनी असंतोष और चुनाव में वोटों के बिखराव को लेकर मंथन किया गया। अब इसी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 अक्टूबर को शाम 4 बजे NDA विधानमंडल दल की बड़ी बैठक बुलाई है। इसमें NDA के सभी विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख भी 9 अक्टूबर ही है। ऐसे में बैठक में बागियों की स्थिति साफ होने के बाद सभी 8 सीटों पर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। 7 अक्टूबर की बैठक में बागियों को मनाने पर फोकस मुख्यमंत्री आवास पर कल देर शाम हुई बैठक में NDA के घटक दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक का प्रमुख एजेंडा चुनाव में किसी भी तरह के वोट बंटवारे को रोकना था। खासतौर पर गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतरे बागी उम्मीदवारों को मनाने और नामांकन वापस कराने पर चर्चा हुई। नेताओं ने माना कि NDA के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से ज्यादा गठबंधन के अंदर संभावित वोटों के बिखराव को रोकना है। इसके लिए सभी दलों को अपने-अपने स्तर पर असंतुष्ट नेताओं और उम्मीदवारों से बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई है। 8 सीटों पर BJP-JDU के बीच 4-4 का बंटवारा विधान परिषद की इन 8 सीटों पर NDA के तहत भाजपा और जदयू 4-4 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। इनमें से 5 सीटों पर फिलहाल NDA का कब्जा है। खास बात यह है कि इन सीटों पर मौजूदा निवर्तमान सदस्य भी दोबारा चुनाव मैदान में हैं। NDA नेतृत्व की कोशिश है कि मौजूदा सीटों को बचाने के साथ-साथ बाकी सीटों पर भी गठबंधन के प्रत्याशियों को जीत दिलाई जाए। इसी लक्ष्य को लेकर पार्टी संगठन से लेकर सरकार के स्तर तक चुनावी तैयारियों को तेज किया जा रहा है। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच गतिरोध भी चर्चा में कल की बैठक में जदयू के विधायक अनंत सिंह और निवर्तमान एमएलसी नीरज कुमार के बीच चल रहे गतिरोध को लेकर भी चर्चा हुई। NDA नेतृत्व की कोशिश है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह का अंदरूनी विवाद गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशी के लिए नुकसान का कारण न बने। बैठक में नेताओं ने ऐसे सभी मामलों को आपसी बातचीत से सुलझाने और चुनाव के दौरान पूरी तरह एकजुट होकर काम करने पर जोर दिया। रामपुकार सिन्हा के नामांकन से भी बढ़ी चुनौती राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के नेता रामपुकार सिन्हा के नामांकन को लेकर पैदा हुए विवाद पर भी बैठक में चर्चा हुई। NDA नेतृत्व की कोशिश है कि गठबंधन के घटक दलों से जुड़े किसी भी असंतुष्ट उम्मीदवार की वजह से आधिकारिक प्रत्याशियों के वोट प्रभावित न हों। इसके लिए संबंधित दलों के नेताओं को अपने स्तर पर बातचीत कर स्थिति संभालने को कहा गया है। 9 अक्टूबर को नामांकन वापसी की आखिरी तारीख विधान परिषद चुनाव के लिए 9 अक्टूबर को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है। ऐसे में NDA के लिए शुक्रवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गठबंधन की कोशिश है कि नामांकन वापसी की समय सीमा खत्म होने तक बागी उम्मीदवारों को मनाकर मैदान से हटाया जाए। यदि बागी उम्मीदवार नामांकन वापस लेते हैं, तो NDA के आधिकारिक प्रत्याशियों के सामने गठबंधन के भीतर से होने वाला संभावित वोट विभाजन काफी हद तक रोका जा सकेगा। शाम 4 बजे होगी NDA विधानमंडल दल की महाबैठक नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 अक्टूबर को शाम 4 बजे NDA विधानमंडल दल की महाबैठक बुलाई है। इसमें गठबंधन के सभी विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को शामिल होने का निर्देश दिया गया है। बैठक में चुनाव की अंतिम रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। खासकर जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला कड़ा है, वहां नेताओं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। पांचों घटक दलों के बीच तालमेल पर जोर NDA में भाजपा और जदयू के अलावा लोजपा-रामविलास, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी शामिल हैं। विधान परिषद चुनाव में गठबंधन के सभी घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में सभी दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों से आधिकारिक प्रत्याशियों के पक्ष में एकजुट होकर प्रचार करने को कहा जा सकता है। कोशिश होगी कि अलग-अलग दलों के नेता अपने संगठन के वोटरों तक पहुंचें और गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान सुनिश्चित कराएं। संयुक्त प्रचार का रोडमैप होगा तैयार 9 अक्टूबर की बैठक में चुनाव प्रचार को लेकर भी विस्तृत रणनीति तैयार होने की उम्मीद है। NDA नेतृत्व चाहता है कि सभी घटक दल अलग-अलग नहीं, बल्कि साझा रणनीति के तहत चुनाव मैदान में उतरें। इसके लिए निर्वाचन क्षेत्रवार जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं। स्थानीय नेताओं, विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रचार की जिम्मेदारी दी जा सकती है। NDA का लक्ष्य 8 में 8 सीटें जीतना NDA की कोशिश इन आठों सीटों पर जीत हासिल करने की है। गठबंधन के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि गठबंधन के अंदर किसी तरह का वोट विभाजन नहीं हुआ और सभी घटक दल एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरे, तो सभी 8 सीटों पर जीत की संभावना मजबूत हो सकती है। 23 अक्टूबर को मतदान, 27 को आएगा परिणाम बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे। मतदान से पहले अब NDA के सामने सबसे बड़ी चुनौती बागियों को साधने और सभी घटक दलों के बीच जमीनी तालमेल मजबूत करने की है। 9 अक्टूबर की महाबैठक को इसी लिहाज से चुनावी अभियान की अंतिम तैयारियों के लिए अहम माना जा रहा है।

