नयी दिल्ली, सात अक्टूबर ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों के नेता निर्वाचन आयोग के मामले को लेकर लगातार दूसरे दिन सड़क पर उतरे और एक बार फिर राहुल गांधी प्रतिपक्ष की इस मुहिम की अगुवाई करते दिखाई दिए। नयी दिल्ली के जनपथ से जंतर-मंतर की तरफ विपक्ष के करीब तीन घंटे के मार्च के बाद पुलिस ने राहुल गांधी और कई अन्य को हिरासत में ले लिया। कुछ देर बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का यह अभियान तक तब जारी रहेगा जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते। विपक्षी दलों के सांसद पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से आयोजित दोपहर भोज में जनपथ रोड पर ‘सागर रत्ना’ रेस्तरां में शाकाहारी दक्षिण भारतीय व्यंजनों का लुत्फ उठाया और आगे की रणनीति पर चर्चा की। इसके बाद वे तीन बसों में सवार होकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए रवाना हुए।
विपक्षी सांसदों को पुलिस ने अशोक रोड पर शांगरी-ला होटल के सामने रोक दिया। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। राहुल गांधी और कुछ अन्य नेताओं को एक टेंपो ट्रैवलर में बिठाकर मौके से ले जाया गया।
राहुल को हिरासत में लिए जाने के बाद कई कांग्रेस कार्यकर्ता ट्रैवलर की छत पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे। मौके पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बीच काफी देर तक नारेबाजी होती रही। पुलिस द्वारा रोके जाने पर प्रियंका गांधी वाद्रा ने विरोध जताया और सड़क पर लेट गईं।
इस दौरान उनके हाथ में संविधान की प्रति थी। विपक्षी सांसद निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जाना चाहते थे। कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि राहुल गांधी को जिस वाहन में ले जाया जा रहा था, उसे अग्रसेन की बावली के पास पार्टी कार्यकर्ताओं ने ‘‘पंचर’’ कर दिया।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी और कुछ अन्य नेताओं को बाराखंबा थाने ले जाया गया। कांग्रेस और विपक्ष के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया। जंतर-मंतर की तरफ मार्च से पहले खरगे द्वारा आयोजित भोज में विपक्ष के कम से कम 100 सांसद शामिल हुए और उसके बाद वे जंतर-मंतर के लिए रवाना हुए।
भोज में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के सांसद शामिल हुए। समाजवादी पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) का कोई प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुआ। इसे लेकर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि दोपहर के भोज का फैसला मंगलवार देर रात लिया गया और उसी समय इसकी जानकारी दी गई, इसलिए कुछ दलों के प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हो सके।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज के भोज के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन भोज का फैसला कल देर रात लिया गया और उसी समय इसकी जानकारी दी गई। इसलिए स्वाभाविक था कि कुछ दलों के प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हो सके।’’
रमेश ने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों में इसे लेकर ‘‘बेवजह टिप्पणी’’ की जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन और अन्य विपक्षी दल ‘वोट चोरी’, एसआईआर और परिसीमन के खिलाफ एकजुट हैं तथा एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।
भोज के बाद खरगे ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सहयोगी दल जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। खरगे ने आरोप लगाया, ‘‘निर्वाचन आयोग जो भी कर रहा है, उसके पीछे नरेन्द्र मोदी हैं। इसका मतलब है कि मोदी जी खुद लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि विपक्षी दल मिलकर देश की जनता को यह बताना चाहते हैं कि उसके अधिकार छीने जा रहे हैं।
खरगे ने कहा कि जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्षी नेताओं और सांसदों पर कितने भी मामले दर्ज किए जाएं, वे डरने या रुकने वाले नहीं हैं। वहीं, राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के करीब 300 सांसद बुधवार को चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘करीब 300 सांसद कल निर्वाचन आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन वे हमसे नहीं मिले।
दिल्ली पुलिस ने हमें रोका और कहा कि यहां प्रदर्शन नहीं कर सकते।’’
गांधी ने कहा कि इसलिए विपक्षी सांसद अब प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल जंतर-मंतर जाकर बैठेंगे और देश को बताएंगे कि ज्ञानेश कुमार ‘‘देश के वैध मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र को खत्म किया है। उन्होंने कहा कि ‘‘इन पर कार्रवाई होगी’’ और ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना पड़ेगा। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का विरोध प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने तक जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ऐसा कुछ नहीं कर सकते जिससे उनका विरोध रुक जाए। विपक्षी सांसदों के जंतर-मंतर जाने के कार्यक्रम को मंगलवार के घटनाक्रम की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा था कि विपक्ष के करीब 300 सांसद मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं।
उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था। ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को संसद से निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया था, लेकिन पुलिस ने संसद मार्ग के पास बैरिकेड लगाकर मार्च रोक दिया था। इसके बाद कई विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना दिया था।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कम से कम 260 लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें ‘इंडिया’ गठबंधन के 10 सांसद भी शामिल थे। बाद में, सभी को छोड़ दिया गया। प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए थे।

