मनाली, सात अक्टूबर हिमाचल प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को मनाली के ऐतिहासिक हिडिंबा मंदिर और रोहतांग स्थित अटल सुरंग की यात्रा की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। राज्यपाल कविंदर गुप्ता के साथ राष्ट्रपति ने समुद्र तल से 10,000 फुट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित 9.02 किलोमीटर लंबी एक-मार्ग वाली मुख्य राजमार्ग सुरंग ‘अटल टनल’ का दौरा किया।
उन्होंने सुरंग की निर्माण शैली और तकनीकी विशेषताओं में गहरी रुचि दिखाई, जिस पर उन्हें इसके तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। इस दौरान उन्होंने आसपास के हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद लिया। सुरंग के उत्तरी द्वार पर स्थानीय निवासियों ने राष्ट्रपति का पारंपरिक ढंग से स्वागत किया।
राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान आतिथ्य मंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, मंडी की सांसद कंगना रनौत, विधायक अनुराधा राणा, उपायुक्त किरण भडाना, जिला प्रशासन के अधिकारियों और सेना के अधिकारियों ने भी उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति मुर्मू मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे बाहंग हेलीपैड पर उतरीं। राज्यपाल कविंदर गुप्ता, सांसद कंगना रनौत और मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने उनकी अगवानी की।
राष्ट्रपति हेलीपैड से मनाली स्थित सर्किट हाउस पहुंचीं, जहां वह आठ अक्टूबर तक रहेंगी। राष्ट्रपति ने बुधवार को मनाली स्थित मॉल रोड की भी सैर की, जबकि उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू ने नग्गर स्थित ‘निकोलस रोरिख आर्ट गैलरी एंड एस्टेट’ का दौरा किया। संग्रहालय की क्यूरेटर डॉ. लारिसा सुरगिना से बातचीत के दौरान इतिश्री ने ‘‘पर्वतों के चित्रकार’’ के रूप में प्रसिद्ध रोरिख की कृतियों की सराहना की और राष्ट्रपति मुर्मू के साथ दोबारा गैलरी आने की इच्छा जताई।
उन्होंने बच्चों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। राष्ट्रपति की यात्रा के मद्देनजर मनाली और लाहौल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ‘पीटीआई-वीडियो’ से बात करते हुए रनौत ने कहा कि यह स्थानीय लोगों का सौभाग्य है कि राष्ट्रपति अपने परिवार के साथ इन खूबसूरत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पहाड़ियों के दौरे पर आयी हैं।
यहां जारी एक वक्तव्य में लोकभवन ने कहा कि अटल सुरंग उत्कृष्ट निर्माण कला का एक अनुपम उदाहरण है, जिसने लाहौल-स्पीति को देश के शेष हिस्सों के काफी करीब ला दिया है। वक्तव्य में कहा गया कि यह सुरंग सुदूर और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जोड़ने की भारत की दृष्टि, प्रोद्योगिकी क्षमता और अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

