नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार शाम जिस डबल डेकर बस में आग लगी, उसके खिलाफ परिवहन विभाग पहले ही 36 चालान कर चुका था। इसके बावजूद बस दिल्ली से मुजफ्फरपुर के लिए 32 यात्रियों को लेकर सड़क पर दौड़ रही थी। सेक्टर-148 के पास इंजन से धुआं और बदबू आने के बाद चालक ने बस रोक दी। करीब 5 से 7 मिनट में सभी यात्रियों को बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। बस नंबर BR-28-P-3433 के खिलाफ परिवहन विभाग की ओर से 36 चालान किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब सवाल उठ रहा है कि लगातार चालान होने के बावजूद बस का संचालन कैसे जारी रहा। क्या बस की फिटनेस और तकनीकी सुरक्षा की जांच हुई थी, या चालान की कार्रवाई तक ही मामला सीमित रहा? हादसे के बाद लंबी दूरी की निजी बसों की निगरानी और फिटनेस जांच पर सवाल खड़े हो गए हैं। इंजन से धुआं उठा, यात्री तुरंत उतारे बस मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे दिल्ली के लाल किला से मुजफ्फरपुर जा रही थी। सेक्टर-148 के पास चालक और परिचालक को इंजन के पास धुआं और बदबू महसूस हुई। उन्होंने बस रोककर यात्रियों को नीचे उतारा। सभी 32 यात्रियों के बाहर निकलते ही आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। यात्रियों का सामान जलकर राख हो गया। 5 दमकल गाड़ियों ने बुझाई आग सूचना पर दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हादसे में कोई यात्री घायल नहीं हुआ। बाद में यात्रियों को दूसरी बसों से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। कुछ दिन पहले 9 यात्रियों की गई थी जान यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब कुछ दिन पहले ही यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत हुई थी। ऐसे में 36 चालान वाली बस के आग की चपेट में आने ने निजी बसों की फिटनेस और सुरक्षा जांच की व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

