उज्जैन के देवास रोड औद्योगिक क्षेत्र से लगे पार्श्वनाथ सिटी के रहवासी मंगलवार को दूषित भूमिगत जल की शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। महिलाएं और पुरुष डब्बे में गंदा पानी भरकर कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे और अधिकारियों को पानी दिखाया। रहवासियों का आरोप है कि कॉलोनी के पीछे संचालित केमिकल, फार्मास्युटिकल, पेस्टीसाइड और अन्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट जमीन में छोड़े जाने से भूजल प्रदूषित हो रहा है। इसे भागीरथपुरा मत बनाओ। तीन महीने से दे रहे आवेदन, कई जगह शिकायत पार्श्वनाथ सिटी रहवासी सहकारी सोसायटी के लोगों ने बताया कि वे करीब तीन महीने से लगातार शिकायत कर रहे हैं। इस दौरान जनसुनवाई, कलेक्टर कार्यालय, जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र (डीआईसी), नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभागों को आवेदन दिए गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। रहवासियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में होने के बावजूद उन्हें दूषित पानी की समस्या से राहत नहीं मिली है। कलेक्टर नहीं थे, जिला पंचायत सीईओ को दिखाया पानी रहवासी जब कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, उस समय कलेक्टर जनसुनवाई में मौजूद नहीं थे। उन्होंने जिला पंचायत सीईओ से मुलाकात कर समस्या बताई और डब्बे में लाया गया दूषित पानी दिखाया। बाद में कलेक्टर के जनसुनवाई में पहुंचने पर रहवासियों ने उन्हें भी समस्या बताकर कार्रवाई की मांग की। 90 जलस्रोत ट्यूबवेल पर निर्भर, पानी में झाग और दुर्गंध का आरोप रहवासी रविंद्र चंद्रवंशी ने बताया कि कॉलोनी के करीब 90 जलस्रोत ट्यूबवेल पर निर्भर हैं। उन्होंने अधिकारियों को पानी का जार दिखाते हुए कहा कि पानी में गंदगी, झाग, रंग और दुर्गंध है। रहवासियों का आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र से नालों और अन्य माध्यमों से रासायनिक अपशिष्ट जमीन में छोड़ा जा रहा है, जिससे भूजल खराब हो रहा है और कॉलोनी के लोगों को इसी पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अलग-अलग लैब से जांच और दोषी इकाइयों पर कार्रवाई की मांग रहवासियों ने प्रशासन से कॉलोनी और औद्योगिक क्षेत्र के भूजल के नमूने लेकर अलग-अलग प्रयोगशालाओं से जांच कराने की मांग की है। साथ ही रासायनिक अपशिष्ट के निस्तारण को तत्काल रोकने, संदिग्ध स्थानों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराने तथा वहां से सैंपल लेने की मांग रखी है। सोसायटी ने प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सील करने की मांग भी की। इसके अलावा कॉलोनी के लिए वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की गई है। रविंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि वे तीन महीने से आवेदन दे रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने आशंका जताई कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आगे गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

