जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर विधान परिषद चुनाव को लेकर इन दिनों पूरी तरह से एक्शन मोड में हैं। अपनी रणनीतिक तैयारियों को धार देने के लिए लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार रात अचानक बेगूसराय पहुंचे। रतनपुर स्थित वरिष्ठ नेता अजीत गौतम के आवास पर देर रात तक बैठकों और मुलाकातों का दौर चलता रहा। इस दौरान उन्होंने जिले के प्रमुख चिकित्सकों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवी हस्तियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया। इस अनौपचारिक सह राजनीतिक कार्यक्रम में राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज रही। प्रशांत किशोर ने जनसुराज अभियान से जुड़ रहे नए सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत किया। बेगूसराय के सीनियर डॉक्टर डॉ. ए.के. राय का जनसुराज में शामिल होना जिले की भावी राजनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि समाज के प्रतिष्ठित और प्रबुद्ध वर्गों का जनसुराज के प्रति बढ़ता आकर्षण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिहार की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे से हटकर एक मजबूत और नया विकल्प तलाश रही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, शिक्षक, इंजीनियर और प्रबुद्ध नागरिक जब तक नीति-निर्धारण और राजनीति में सक्रिय भूमिका नहीं निभाएंगे, तब तक राज्य का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। विधान परिषद चुनाव में जनसुराज की तैयारियों और उम्मीदवार के नाम पर स्थिति साफ करते हुए प्रशांत किशोर ने बताया कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनसुराज के अधिकृत प्रत्याशी अनुज सिंह हैं। अनुज सिंह पूर्व में नवादा से जनसुराज के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं और क्षेत्र के शिक्षित मतदाताओं के बीच उनकी बेहतर पकड़ रही है। राजनीतिक गलियारों में चल रही विभिन्न अटकलों और विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा समर्थन दिए जाने के सवालों पर प्रशांत किशोर ने कहा कि कौन किसे समर्थन दे रहा है या किस दल में क्या बगावत चल रही है, यह संबंधित राजनीतिक दलों का अंदरूनी मामला है। ‘जनसुराज कोई खुला दरवाजा नहीं है’ प्रशांत किशोर ने कहा कि इससे जनसुराज का कोई लेना-देना नहीं है। लोकतंत्र में जनसुराज के सिद्धांतों से प्रभावित होकर लोग समर्थन करते हैं, लेकिन पार्टी अपनी तय प्राथमिकताओं और अनुशासन के आधार पर ही आगे बढ़ रही है। भारतीय जनता पार्टी और अन्य प्रमुख दलों के कुछ चर्चित चेहरों के जनसुराज में शामिल होने की चर्चाओं को भी प्रशांत किशोर ने खारिज किया। जनसुराज कोई ऐसा खुला दरवाजा नहीं है, जहां जिसका जब मन करे वह चला आए। संगठन में किसी भी व्यक्ति का प्रवेश उसकी सामाजिक छवि, निष्ठा और सार्वजनिक जीवन के ट्रैक रिकॉर्ड के मूल्यांकन के बाद ही तय होता है। राजनीतिक और सामाजिक शिष्टाचार के तहत होने वाली मुलाकातें एक अलग विषय हैं। कई नेताओं के परिवार के सदस्य पहले से ही जनसुराज में सक्रिय पदों पर कार्य कर रहे हैं। इसलिए ऐसी सामान्य मुलाकातों को बेवजह का राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने देश की चुनावी व्यवस्था और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी तीखा हमला बोला। सुप्रीम कोर्ट की ओर से चुनाव आयोग को जारी किए गए नोटिस पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई संस्था गड़बड़ी करेगी तो अदालत नोटिस तो जारी करेगी ही, लेकिन सिर्फ नोटिस देने से चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं आने वाला। न्यायपालिका को ऐसे गंभीर मामलों में सख्त और दंडात्मक कदम उठाने चाहिए थे। ‘किसी एक अधिकारी के हटने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आता’ आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की साख पर पिछले कई वर्षों से बट्टा लगा हुआ है और आम जनता का इस संवैधानिक संस्था पर से विश्वास लगातार कम होता जा रहा है। वोटर लिस्ट के निर्माण से लेकर आचार संहिता लागू करने, चुनाव की तिथियों की घोषणा करने और मतगणना तक हर चरण में गड़बड़ियां सामने आती रही हैं। दावा किया कि बिहार के चुनावों में पानी की तरह पैसा बहाकर और हजारों करोड़ रुपए खर्च करके वोटों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। जबकि आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं होती। जब तक चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के प्रभाव से मुक्त होकर काम नहीं करेगा, तब तक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की पवित्रता बहाल होना मुश्किल है। किसी एक अधिकारी के रहने या हटने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आता, बल्कि चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता स्वयं साबित करनी होगी। जिले में राजनीतिक हलचल तेज बेगूसराय में देर रात तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक और प्रशांत किशोर के तेवरों ने जिले के राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। विधान परिषद के स्नातक चुनाव को लेकर जनसुराज जिस तरह से प्रबुद्ध वर्ग और स्थानीय प्रभाव वाले चेहरों को अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रहा है, उससे अन्य राजनीतिक दलों की चिंताएं बढ़ सकती है। क्योंकि जनसुराज विधान परिषद चुनाव को केवल एक साधारण चुनाव के रूप में नहीं, बल्कि आगामी राज्यस्तरीय मुकाबलों के पूर्वाभ्यास के रूप में गंभीरता से ले रहा है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर विधान परिषद चुनाव को लेकर इन दिनों पूरी तरह से एक्शन मोड में हैं। अपनी रणनीतिक तैयारियों को धार देने के लिए लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार रात अचानक बेगूसराय पहुंचे। रतनपुर स्थित वरिष्ठ नेता अजीत गौतम के आवास पर देर रात तक बैठकों और मुलाकातों का दौर चलता रहा। इस दौरान उन्होंने जिले के प्रमुख चिकित्सकों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवी हस्तियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया। इस अनौपचारिक सह राजनीतिक कार्यक्रम में राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज रही। प्रशांत किशोर ने जनसुराज अभियान से जुड़ रहे नए सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत किया। बेगूसराय के सीनियर डॉक्टर डॉ. ए.के. राय का जनसुराज में शामिल होना जिले की भावी राजनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि समाज के प्रतिष्ठित और प्रबुद्ध वर्गों का जनसुराज के प्रति बढ़ता आकर्षण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिहार की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे से हटकर एक मजबूत और नया विकल्प तलाश रही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, शिक्षक, इंजीनियर और प्रबुद्ध नागरिक जब तक नीति-निर्धारण और राजनीति में सक्रिय भूमिका नहीं निभाएंगे, तब तक राज्य का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। विधान परिषद चुनाव में जनसुराज की तैयारियों और उम्मीदवार के नाम पर स्थिति साफ करते हुए प्रशांत किशोर ने बताया कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनसुराज के अधिकृत प्रत्याशी अनुज सिंह हैं। अनुज सिंह पूर्व में नवादा से जनसुराज के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं और क्षेत्र के शिक्षित मतदाताओं के बीच उनकी बेहतर पकड़ रही है। राजनीतिक गलियारों में चल रही विभिन्न अटकलों और विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा समर्थन दिए जाने के सवालों पर प्रशांत किशोर ने कहा कि कौन किसे समर्थन दे रहा है या किस दल में क्या बगावत चल रही है, यह संबंधित राजनीतिक दलों का अंदरूनी मामला है। ‘जनसुराज कोई खुला दरवाजा नहीं है’ प्रशांत किशोर ने कहा कि इससे जनसुराज का कोई लेना-देना नहीं है। लोकतंत्र में जनसुराज के सिद्धांतों से प्रभावित होकर लोग समर्थन करते हैं, लेकिन पार्टी अपनी तय प्राथमिकताओं और अनुशासन के आधार पर ही आगे बढ़ रही है। भारतीय जनता पार्टी और अन्य प्रमुख दलों के कुछ चर्चित चेहरों के जनसुराज में शामिल होने की चर्चाओं को भी प्रशांत किशोर ने खारिज किया। जनसुराज कोई ऐसा खुला दरवाजा नहीं है, जहां जिसका जब मन करे वह चला आए। संगठन में किसी भी व्यक्ति का प्रवेश उसकी सामाजिक छवि, निष्ठा और सार्वजनिक जीवन के ट्रैक रिकॉर्ड के मूल्यांकन के बाद ही तय होता है। राजनीतिक और सामाजिक शिष्टाचार के तहत होने वाली मुलाकातें एक अलग विषय हैं। कई नेताओं के परिवार के सदस्य पहले से ही जनसुराज में सक्रिय पदों पर कार्य कर रहे हैं। इसलिए ऐसी सामान्य मुलाकातों को बेवजह का राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने देश की चुनावी व्यवस्था और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी तीखा हमला बोला। सुप्रीम कोर्ट की ओर से चुनाव आयोग को जारी किए गए नोटिस पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई संस्था गड़बड़ी करेगी तो अदालत नोटिस तो जारी करेगी ही, लेकिन सिर्फ नोटिस देने से चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं आने वाला। न्यायपालिका को ऐसे गंभीर मामलों में सख्त और दंडात्मक कदम उठाने चाहिए थे। ‘किसी एक अधिकारी के हटने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आता’ आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की साख पर पिछले कई वर्षों से बट्टा लगा हुआ है और आम जनता का इस संवैधानिक संस्था पर से विश्वास लगातार कम होता जा रहा है। वोटर लिस्ट के निर्माण से लेकर आचार संहिता लागू करने, चुनाव की तिथियों की घोषणा करने और मतगणना तक हर चरण में गड़बड़ियां सामने आती रही हैं। दावा किया कि बिहार के चुनावों में पानी की तरह पैसा बहाकर और हजारों करोड़ रुपए खर्च करके वोटों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। जबकि आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं होती। जब तक चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के प्रभाव से मुक्त होकर काम नहीं करेगा, तब तक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की पवित्रता बहाल होना मुश्किल है। किसी एक अधिकारी के रहने या हटने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आता, बल्कि चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता स्वयं साबित करनी होगी। जिले में राजनीतिक हलचल तेज बेगूसराय में देर रात तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक और प्रशांत किशोर के तेवरों ने जिले के राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। विधान परिषद के स्नातक चुनाव को लेकर जनसुराज जिस तरह से प्रबुद्ध वर्ग और स्थानीय प्रभाव वाले चेहरों को अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रहा है, उससे अन्य राजनीतिक दलों की चिंताएं बढ़ सकती है। क्योंकि जनसुराज विधान परिषद चुनाव को केवल एक साधारण चुनाव के रूप में नहीं, बल्कि आगामी राज्यस्तरीय मुकाबलों के पूर्वाभ्यास के रूप में गंभीरता से ले रहा है।

