‘ताली दोनों हाथों से बजती है…’:ललन सिंह ने अनंत को चुप कराया, संगठन को घेरा; क्या यह JDU में नई जंग की शुरुआत है

‘ताली दोनों हाथों से बजती है…’:ललन सिंह ने अनंत को चुप कराया, संगठन को घेरा; क्या यह JDU में नई जंग की शुरुआत है

बाहुबली विधायक अनंत सिंह अब JDU प्रत्याशी नीरज कुमार का सार्वजनिक रूप से विरोध नहीं करेंगे। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि उनसे हमारी बात हुई है। वह इस पर सहमत हैं। क्या वाकई अनंत-नीरज का विवाद खत्म हो गया, ललन सिंह ने क्या कहा, क्यों कहा जा रहा कि ललन सिंह-संजय झा में सब ठीक नहीं, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सबसे पहले ललन सिंह का पूरा बयान पढ़िए… 5 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ललन सिंह से उनके पटना स्थित आवास पर 20 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इसके बाद दिल्ली जाते वक्त केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने पटना एयरपोर्ट पर कहा… ललन सिंह ने आगे कहा, ‘अनंत सिंह जब चुनाव लड़ रहे थे तो वो (नीरज) उनके खिलाफ अभियान चला रहे थे। बात बिल्कुल सत्य है। हालांकि, मैंने अनंत सिंह से कहा है कि अब कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे। इस पर वह सहमत हैं। अब आगे वह सार्वजनिक रूप से बयान नहीं देंगे।’ सवाल-1ः …तो क्या अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच का विवाद खत्म हो गया? जवाब: फौरी तौर पर कह सकते हैं कि विवाद को शांत करा दिया गया है, लेकिन खत्म हुआ है, यह कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि ललन सिंह के बयान से साफ है कि अब यह सिर्फ अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार का विवाद नहीं रह गया है। इसके पीछे JDU के भीतर पुराने और नए पावर सेंटर के बीच खिंचाव है। इसके 3 संकेत… पहला संकेत- ललन ने व्यक्ति से ज्यादा संगठन को कटघरे में खड़ा किया अगर मामला सिर्फ नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच होता तो ललन सिंह सीधे नीरज की भूमिका पर बात कर सकते थे। लेकिन उन्होंने कहा, ‘पार्टी को कार्रवाई करनी चाहिए थी। नहीं हुई। प्रदेश इकाई से चूक हुई।’ यानी निशाना किसी एक व्यक्ति से ज्यादा संगठन की उस समय की भूमिका पर है। और यही बात इसे बड़ा राजनीतिक विवाद बनाती है। दूसरा संकेत- मौजूदा संगठन बनाम पुराने नेतृत्व की राजनीति JDU में पिछले कुछ समय में संगठनात्मक भूमिका और नेतृत्व की शैली में बदलाव दिखा है। एक तरफ संजय झा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर संगठन को संभाल रहे हैं, दूसरी तरफ ललन सिंह जैसे पुराने और प्रभावशाली नेता अभी भी पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण राजनीतिक वजन रखते हैं। ऐसे में अनंत सिंह का विवाद सिर्फ एक विधायक/नेता की नाराजगी का नहीं रह जाता। यह सवाल भी बनता है कि पार्टी के फैसले कौन ले रहा है और पुराने नेताओं की शिकायतों को कितना महत्व मिल रहा है? तीसरा संकेत- अनंत सिंह के पुराने योगदान को ध्यान में रखें अनंत सिंह ने खुद ललन सिंह को बताया कि उन्होंने पहले भी नीतीश सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के समय RJD में रहते हुए सरकार का समर्थन किया था। उनकी पत्नी ने सरकार का समर्थन किया था। यानी अनंत अपने वर्तमान विवाद को नीतीश के प्रति पुराने राजनीतिक संबंध और सम्मान से जोड़ रहे हैं। ललन सिंह ने भी इसी बात को सार्वजनिक रूप से सामने रखा। इसका मतलब है कि वह पार्टी के नेताओं को संदेश दे रहे हैं कि उनकी पुरानी राजनीतिक भूमिका और योगदान को पार्टी नेतृत्व देखें। कुछ दिन पहले बिहार सरकार के मंत्री और JDU के सीनियर नेता अशोक चौधरी ने भी कहा था कि जब पार्टी संकट में थी तब अनंत सिंह पार्टी के साथ खड़े थे। सवाल-2ः …तो क्या अनंत-नीरज के बीच का विवाद गुटबाजी का नतीजा है? जवाबः पॉलिटिकल सर्किल की चर्चाओं की मानें तो JDU इस वक्त मुख्य रूप से 2 खेमों में बंटी दिख रही है। संजय झा और ललन सिंह का। एक तीसरा धड़ा भी है बिजेंद्र प्रसाद यादव का। हालांकि, आधिकारिक रूप से JDU किसी भी तरह की गुटबाजी की खबरों को सिरे से खारिज करती आई है। सवाल-3ः संजय झा और ललन सिंह के बीच सब ठीक नहीं है क्या? जवाबः सीधे तौर पर नहीं कह सकते। 20 सिंतबर 2026 को संजय झा ने साफ तौर पर कहा था कि पार्टी में कोई मनमुटाव नहीं है। सब लोग मिलजुलकर फैसला लेते हैं। हालांकि, अंदरखाने की चर्चाओं की मानें तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। अंदरखाने 2 तरह की चर्चा है, हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। 1. संजय झा केंद्रीय मंत्री बनना चाहते, ललन सिंह विरोध में पटना से दिल्ली तक चर्चा है कि संजय झा मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मंत्री बनना चाहते हैं। फिलहाल JDU कोटे से मोदी सरकार में एक केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और एक राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर शामिल हैं। पार्टी का दावा है कि इससे पहले राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश JDU कोटे से थे। अभी वह भाजपा कोटे से सांसद हैं। ऐसे में उनकी जगह JDU को एक केंद्रीय मंत्री या स्वतंत्र प्रभार वाला मंत्रालय दिया जाए। अंदरखाने चर्चा यह भी है कि अगर मोदी सरकार में एक कैबिनेट रैंक मिलता है तो संजय झा मंत्री बन सकते हैं। लेकिन ललन सिंह इसका विरोध कर रहे हैं। वह नहीं चाहते कि संजय झा मोदी कैबिनेट में शामिल हों। 2. विवाद के बाद कार्यकारी अध्यक्ष की जा सकती है कुर्सी पार्टी में जारी विवाद और खींचतान के बीच चर्चा है कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को बदला जा सकता है। चर्चा करने वालों का तर्क है कि पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। अनंत सिंह और नीरज कुमार विवाद से भी पार्टी का अनुशासन खत्म हो गया है। इन सब चीजों को काउंटर करने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष को बदला जा सकता है। हालांकि, फिलहाल ऐसा होने की संभावना बहुत कम है। अगर संजय झा मंत्री बनते हैं तब यह संभव है। सवाल-4ः अनंत सिंह की बगावत का पूरा मामला क्या है? जवाबः पटना स्नातक सीट पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 3 बार के विधान पार्षद नीरज कुमार को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट के अंदर 3 जिलों पटना, नालंदा और नवादा की 26 विधानसभा सीटें आती हैं। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने नीरज कुमार का खुला विरोध किया है। वे लगातार जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के साथ घूम रहे हैं और उनके लिए वोट मांग रहे हैं। 28 सितंबर को अनुज सिंह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अनंत सिंह ने कहा, ‘हमको उससे कोई मतलब नहीं है कि कौन लड़ रहा है। हम पूरी तरह से अनुज सिंह का समर्थन करेंगे। उनके लिए वोट मांगने पूरे इलाके में जाएंगे।’ अनंत सिंह ने आगे कहा, ‘आज तक हम हारे नहीं हैं। अनुज सिंह चुनाव भी जीत जाएंगे। मेरे लिए जनता ही भगवान है। वह हमें वोट देगी।’ 7 सितंबर की बैठक में नहीं बनी थी बात अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान 3 सितंबर को ही कर दिया था। इसके बाद बिहार JDU अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह और नीरज कुमार में सुलह कराने के लिए 7 सितंबर को बैठक की। लेकिन बात नहीं बनी। बाहुबली विधायक अनंत सिंह अब JDU प्रत्याशी नीरज कुमार का सार्वजनिक रूप से विरोध नहीं करेंगे। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि उनसे हमारी बात हुई है। वह इस पर सहमत हैं। क्या वाकई अनंत-नीरज का विवाद खत्म हो गया, ललन सिंह ने क्या कहा, क्यों कहा जा रहा कि ललन सिंह-संजय झा में सब ठीक नहीं, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सबसे पहले ललन सिंह का पूरा बयान पढ़िए… 5 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ललन सिंह से उनके पटना स्थित आवास पर 20 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इसके बाद दिल्ली जाते वक्त केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने पटना एयरपोर्ट पर कहा… ललन सिंह ने आगे कहा, ‘अनंत सिंह जब चुनाव लड़ रहे थे तो वो (नीरज) उनके खिलाफ अभियान चला रहे थे। बात बिल्कुल सत्य है। हालांकि, मैंने अनंत सिंह से कहा है कि अब कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे। इस पर वह सहमत हैं। अब आगे वह सार्वजनिक रूप से बयान नहीं देंगे।’ सवाल-1ः …तो क्या अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच का विवाद खत्म हो गया? जवाब: फौरी तौर पर कह सकते हैं कि विवाद को शांत करा दिया गया है, लेकिन खत्म हुआ है, यह कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि ललन सिंह के बयान से साफ है कि अब यह सिर्फ अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार का विवाद नहीं रह गया है। इसके पीछे JDU के भीतर पुराने और नए पावर सेंटर के बीच खिंचाव है। इसके 3 संकेत… पहला संकेत- ललन ने व्यक्ति से ज्यादा संगठन को कटघरे में खड़ा किया अगर मामला सिर्फ नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच होता तो ललन सिंह सीधे नीरज की भूमिका पर बात कर सकते थे। लेकिन उन्होंने कहा, ‘पार्टी को कार्रवाई करनी चाहिए थी। नहीं हुई। प्रदेश इकाई से चूक हुई।’ यानी निशाना किसी एक व्यक्ति से ज्यादा संगठन की उस समय की भूमिका पर है। और यही बात इसे बड़ा राजनीतिक विवाद बनाती है। दूसरा संकेत- मौजूदा संगठन बनाम पुराने नेतृत्व की राजनीति JDU में पिछले कुछ समय में संगठनात्मक भूमिका और नेतृत्व की शैली में बदलाव दिखा है। एक तरफ संजय झा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर संगठन को संभाल रहे हैं, दूसरी तरफ ललन सिंह जैसे पुराने और प्रभावशाली नेता अभी भी पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण राजनीतिक वजन रखते हैं। ऐसे में अनंत सिंह का विवाद सिर्फ एक विधायक/नेता की नाराजगी का नहीं रह जाता। यह सवाल भी बनता है कि पार्टी के फैसले कौन ले रहा है और पुराने नेताओं की शिकायतों को कितना महत्व मिल रहा है? तीसरा संकेत- अनंत सिंह के पुराने योगदान को ध्यान में रखें अनंत सिंह ने खुद ललन सिंह को बताया कि उन्होंने पहले भी नीतीश सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के समय RJD में रहते हुए सरकार का समर्थन किया था। उनकी पत्नी ने सरकार का समर्थन किया था। यानी अनंत अपने वर्तमान विवाद को नीतीश के प्रति पुराने राजनीतिक संबंध और सम्मान से जोड़ रहे हैं। ललन सिंह ने भी इसी बात को सार्वजनिक रूप से सामने रखा। इसका मतलब है कि वह पार्टी के नेताओं को संदेश दे रहे हैं कि उनकी पुरानी राजनीतिक भूमिका और योगदान को पार्टी नेतृत्व देखें। कुछ दिन पहले बिहार सरकार के मंत्री और JDU के सीनियर नेता अशोक चौधरी ने भी कहा था कि जब पार्टी संकट में थी तब अनंत सिंह पार्टी के साथ खड़े थे। सवाल-2ः …तो क्या अनंत-नीरज के बीच का विवाद गुटबाजी का नतीजा है? जवाबः पॉलिटिकल सर्किल की चर्चाओं की मानें तो JDU इस वक्त मुख्य रूप से 2 खेमों में बंटी दिख रही है। संजय झा और ललन सिंह का। एक तीसरा धड़ा भी है बिजेंद्र प्रसाद यादव का। हालांकि, आधिकारिक रूप से JDU किसी भी तरह की गुटबाजी की खबरों को सिरे से खारिज करती आई है। सवाल-3ः संजय झा और ललन सिंह के बीच सब ठीक नहीं है क्या? जवाबः सीधे तौर पर नहीं कह सकते। 20 सिंतबर 2026 को संजय झा ने साफ तौर पर कहा था कि पार्टी में कोई मनमुटाव नहीं है। सब लोग मिलजुलकर फैसला लेते हैं। हालांकि, अंदरखाने की चर्चाओं की मानें तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। अंदरखाने 2 तरह की चर्चा है, हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। 1. संजय झा केंद्रीय मंत्री बनना चाहते, ललन सिंह विरोध में पटना से दिल्ली तक चर्चा है कि संजय झा मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मंत्री बनना चाहते हैं। फिलहाल JDU कोटे से मोदी सरकार में एक केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और एक राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर शामिल हैं। पार्टी का दावा है कि इससे पहले राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश JDU कोटे से थे। अभी वह भाजपा कोटे से सांसद हैं। ऐसे में उनकी जगह JDU को एक केंद्रीय मंत्री या स्वतंत्र प्रभार वाला मंत्रालय दिया जाए। अंदरखाने चर्चा यह भी है कि अगर मोदी सरकार में एक कैबिनेट रैंक मिलता है तो संजय झा मंत्री बन सकते हैं। लेकिन ललन सिंह इसका विरोध कर रहे हैं। वह नहीं चाहते कि संजय झा मोदी कैबिनेट में शामिल हों। 2. विवाद के बाद कार्यकारी अध्यक्ष की जा सकती है कुर्सी पार्टी में जारी विवाद और खींचतान के बीच चर्चा है कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को बदला जा सकता है। चर्चा करने वालों का तर्क है कि पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। अनंत सिंह और नीरज कुमार विवाद से भी पार्टी का अनुशासन खत्म हो गया है। इन सब चीजों को काउंटर करने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष को बदला जा सकता है। हालांकि, फिलहाल ऐसा होने की संभावना बहुत कम है। अगर संजय झा मंत्री बनते हैं तब यह संभव है। सवाल-4ः अनंत सिंह की बगावत का पूरा मामला क्या है? जवाबः पटना स्नातक सीट पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 3 बार के विधान पार्षद नीरज कुमार को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट के अंदर 3 जिलों पटना, नालंदा और नवादा की 26 विधानसभा सीटें आती हैं। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने नीरज कुमार का खुला विरोध किया है। वे लगातार जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के साथ घूम रहे हैं और उनके लिए वोट मांग रहे हैं। 28 सितंबर को अनुज सिंह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अनंत सिंह ने कहा, ‘हमको उससे कोई मतलब नहीं है कि कौन लड़ रहा है। हम पूरी तरह से अनुज सिंह का समर्थन करेंगे। उनके लिए वोट मांगने पूरे इलाके में जाएंगे।’ अनंत सिंह ने आगे कहा, ‘आज तक हम हारे नहीं हैं। अनुज सिंह चुनाव भी जीत जाएंगे। मेरे लिए जनता ही भगवान है। वह हमें वोट देगी।’ 7 सितंबर की बैठक में नहीं बनी थी बात अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान 3 सितंबर को ही कर दिया था। इसके बाद बिहार JDU अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह और नीरज कुमार में सुलह कराने के लिए 7 सितंबर को बैठक की। लेकिन बात नहीं बनी।  

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