‘बिहार का CM कैसा हो-निशांत जैसा हो’ के नारे क्यों:नीतीश कुमार का काम, निशांत का नाम, JDU ने शुरू की 2030 की तैयारी

‘बिहार का CM कैसा हो-निशांत जैसा हो’ के नारे क्यों:नीतीश कुमार का काम, निशांत का नाम, JDU ने शुरू की 2030 की तैयारी

‘बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो.. निशांत भैया जैसा हो…’ , 4 अक्टूबर को जदयू ऑफिस में ये नारे लगाए गए। यह तो हुई कार्यकर्ताओं की बात, अब जदयू के दो सीनियर नेताओं के बयान पढ़िए… निशांत कुमार उप-मुख्यमंत्री से कम हैं क्या? वह आने वाले दिनों में हम सब के नेता हैं। हमारी पार्टी के भविष्य हैं।- श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग संगठन के साथ-साथ सरकार में भी उनका हस्तक्षेप होगा तो हमलोगों को खुशी है, अगर उप-मुख्यमंत्री बनते हैं तो और खुशी की बात होगी।- मदन सहनी, मंत्री, मद्य निषेद विभाग कार्यकर्ता हो या मंत्री, इन बयानों से साफ है कि स्वास्थ्य मंत्री और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जदयू 2030 के चुनाव में सीएम पद के चेहरा के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है। इससे पहले उन्हें डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग है। निशांत कुमार को लेकर जदयू की क्या तैयारी है? नीतीश कुमार के काम और निशांत का नाम आगे बढ़ाने के लिए क्या किया जा रहा है? निशांत किस तरह पार्टी की कमान अपने हाथों में ले रहे हैं? पढ़िए रिपोर्ट…। सबसे पहले जानिए जदयू की तैयारी क्या है? 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA की जीत के बाद नीतीश कुमार सीएम बने, लेकिन बाद में राज्यसभा चले गए। सीएम की कुर्सी छोड़ दी। नीतीश के दिल्ली जाने पर निशांत को राजनीति में डेब्यू कराया गया। निशांत बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। जदयू की रणनीति धीरे-धीरे निशांत को बड़े नेता के रूप में प्रोजेक्ट करने की है। निशांत को अभी पार्टी संगठन में किसी औपचारिक पद या चुनावी जिम्मेदारी नहीं दी गई है। जिस तरह उन्हें संगठन की बैठकों से लेकर विधायकों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम तक में जगह मिली, उससे उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज है। कैसे तैयार हो रहा निशांत का राजनीतिक चेहरा, 5 पॉइंट में समझें 1. संगठन में एंट्री से पहले कार्यकर्ताओं से कनेक्ट निशांत की राजनीतिक सक्रियता का सबसे अहम हिस्सा संगठन के स्तर पर उनकी मौजूदगी है। उन्हें सीधे चुनावी राजनीति या किसी बड़े पद के साथ लॉन्च करने की जगह पहले पार्टी के संगठनात्मक ढांचे से जोड़ा जा रहा है। वह नेताओं से मिल रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2025 में जीतकर आने वाले युवा विधायकों से संपर्क में हैं। पार्टी के जिलाध्यक्षों, प्रखंड अध्यक्षों और पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। जदयू का संगठन बूथ से लेकर प्रखंड और जिला स्तर तक फैला है। निशांत जब इन पदाधिकारियों के साथ सीधा संवाद करते हैं तो वह सिर्फ नेताओं से मुलाकात नहीं होती, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पहचान बनाने की प्रक्रिया भी होती है। अभी फोकस चुनावी टिकट या पद पर नहीं है। पार्टी के कार्यकर्ता निशांत को स्वीकार करें, इसके लिए जमीन तैयार की जा रही है। 2. जिलाध्यक्ष से लेकर प्रखंड अध्यक्ष तक पहुंच, संगठन की नब्ज समझने की कोशिश निशांत की भूमिका को सिर्फ बड़े नेताओं से मुलाकात तक सीमित नहीं रखा गया है। संगठन के निचले स्तर के पदाधिकारियों के साथ भी उनका संपर्क बढ़ाया जा रहा है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में पार्टी का असली चुनावी नेटवर्क बूथ स्तर पर काम करता है। कौन सा बूथ मजबूत है? कहां संगठन कमजोर है? किन इलाकों में कार्यकर्ताओं की सक्रियता कम है? स्थानीय स्तर पर किन मुद्दों को लेकर नाराजगी है? इन सबकी जानकारी संगठन के पदाधिकारियों के पास होती है। ऐसे में निशांत का जिलों और प्रमंडलों के संगठन पदाधिकारियों से बातचीत उन्हें पार्टी के जमीनी नेटवर्क से जोड़ने का काम कर रहा है। इसे 2030 की तैयारी को ध्यान में रखकर देखें तो यह महज औपचारिक संगठनात्मक दौरा नहीं रह जाता। यह निशांत को पार्टी के उस कैडर से परिचित कराने की प्रक्रिया है जो भविष्य में चुनावी राजनीति में उनके साथ खड़ा हो सकता है। पिछले छह महीनों में जदयू की प्रमुख बैठकें जिला अध्यक्षों और प्रखंड अध्यक्षों की बैठक: 21 अप्रैल 2026 को सरकार में निशांत की इंट्री के तुरंत बाद यह बैठक बुलाई गई थी। जदयू प्रदेश कार्यालय की सभी जिला अध्यक्षों और प्रखंड अध्यक्षों को निशांत से रूबरू कराया गया। पार्टी की अगली पीढ़ी से पहचान का यह पहला मौका था। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और जनता की अपेक्षाओं को प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई। जदयू राष्ट्रीय परिषद की बैठक: 21 जून 2026 को पटना में जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई। इसमें देशभर के पार्टी नेताओं और बिहार के प्रमुख पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में नीतीश कुमार को फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने का समर्थन किया गया। इसी दौरान पार्टी के भीतर निशांत कुमार को भविष्य की राजनीति से जोड़कर चर्चा की गई। विशेष प्रबोधन कार्यक्रम: 18 सितंबर 2026 को पटना स्थित जदयू ऑफिस में एक दिवसीय विशेष प्रबोधन आयोजित किया गया। इसमें विधायकों को संसदीय कार्य प्रणाली, विधायी प्रक्रियाओं, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा विधानसभा के नियमों की गहन जानकारी दी गई। बैठक में पार्टी के विधायक, विधान पार्षद और मंत्री शामिल हुए। यह साफ हो गया था कि जदयू का नेतृत्व किसके हाथों में जाएगा। इस कार्यक्रम में निशांत कुमार के अलावा किसी और नेता ने बैठक को संबोधित नहीं किया। 3- ओरिएंटेशन कार्यक्रम में सिर्फ मेहमान नहीं, एक राजनीतिक चेहरा निशांत की भूमिका में सबसे बड़ा बदलाव जदयू के विधायकों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में दिखाई दिया। यह कार्यक्रम पार्टी के विधायकों के लिए था। मंच पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ निशांत की मौजूदगी ने राजनीतिक संदेश को और बड़ा कर दिया। यहां निशांत ने सिर्फ उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं के सामने अपनी बात रखी। निशांत कुमार ने अपने दस मिनट के संबोधन में आगे की नीति स्पष्ट कर दी। कहा कि नीतीश कुमार के काम पर पार्टी आगे बढ़ेगी। इंफ्रास्ट्रचर, शिक्षा सामाजिक कार्य से लेकर अन्य काम को मिसाल के तौर पर देखा जाएगा। निशांत की भूमिका संगठन के युवा चेहरे से आगे बढ़कर पार्टी के राजनीतिक मंच के चेहरे के तौर पर दिखाई दी। 4- ‘निशांत नेता हैं’, श्रवण कुमार के बयान ने बढ़ाई चर्चा निशांत को लेकर जदयू के नेताओं के बयान इस पूरी कवायद को राजनीतिक महत्व देते हैं। ग्रामीण विकास मंत्री और जदयू के सीनियर नेता श्रवण कुमार ने निशांत को लेकर कहा था- “निशांत उप-मुख्यमंत्री से कम थोड़े हैं। वह हमारे नेता हैं। पार्टी के नेता हैं।” यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि निशांत के पास फिलहाल जदयू संगठन में बड़ा पद नहीं है। इसके बावजूद पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का उन्हें ‘हमारे नेता’ और ‘पार्टी के नेता’ कहना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना। इस बयान को निशांत की मौजूदा संगठनात्मक सक्रियता के साथ जोड़कर देखें तो तस्वीर कुछ और साफ होती है। एक तरफ निशांत संगठन के पदाधिकारियों से संवाद कर रहे हैं। दूसरी तरफ पार्टी के विधायकों के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी है। यानी निशांत की राजनीतिक पहचान सिर्फ ‘नीतीश कुमार के बेटे’ तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ‘जदयू के नेता’ के रूप में स्थापित करने की जमीन तैयार होती दिख रही है। निशांत आगे क्या करने वाले हैं? अभी तक निशांत के दो कार्यक्रम फिक्स हुए हैं। पहला, यूपी चुनाव और दूसरा बिहार में जन संपर्क अभियान। निशांत उत्तर प्रदेश में रैली और जनसंपर्क अभियान चलाने जा रहे हैं। 25 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में उनका बड़ा कार्यक्रम है। यूपी चुनाव प्रचार का औपचारिक घोषणा होने जा रही है। निशांत बिहार में जन संपर्क अभियान चलाएंगे। वह जिलों का दौरा करेंगे। इसकी शुरुआत आने वाले दिनों में करने जा रहें हैं। उत्तर प्रदेश से सटे जिलों में वह कार्यक्रम करेंगे। इसी के साथ वह स्वास्थ्य महकमे में औचक निरीक्षण का काम करेंगे। 5. 2030 के लिए रणनीति नीतीश का काम, निशांत का चेहरा जदयू के सामने आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती सिर्फ संगठन को मजबूत करना नहीं, बल्कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। इसमें निशांत की भूमिका महत्वपूर्ण है। पार्टी के लिए नीतीश कुमार का सबसे बड़ा राजनीतिक आधार उनका लंबा शासनकाल, योजनाएं और विकास का दावा है। पार्टी उनके काम और निशांत के नाम को आगे लेकर चलने की तैयारी में है। काम नीतीश कुमार का, विरासत नीतीश कुमार की और आगे की पीढ़ी का चेहरा निशांत कुमार। इस फॉर्मूले में निशांत को नीतीश से अलग करके नहीं, बल्कि नीतीश की राजनीतिक विरासत के विस्तार के रूप में पेश करने की कोशिश दिखाई देती है। यही वजह है कि संगठन में सक्रियता से लेकर बड़े पार्टी कार्यक्रमों तक निशांत की मौजूदगी को सिर्फ व्यक्तिगत गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। ‘बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो.. निशांत भैया जैसा हो…’ , 4 अक्टूबर को जदयू ऑफिस में ये नारे लगाए गए। यह तो हुई कार्यकर्ताओं की बात, अब जदयू के दो सीनियर नेताओं के बयान पढ़िए… निशांत कुमार उप-मुख्यमंत्री से कम हैं क्या? वह आने वाले दिनों में हम सब के नेता हैं। हमारी पार्टी के भविष्य हैं।- श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग संगठन के साथ-साथ सरकार में भी उनका हस्तक्षेप होगा तो हमलोगों को खुशी है, अगर उप-मुख्यमंत्री बनते हैं तो और खुशी की बात होगी।- मदन सहनी, मंत्री, मद्य निषेद विभाग कार्यकर्ता हो या मंत्री, इन बयानों से साफ है कि स्वास्थ्य मंत्री और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जदयू 2030 के चुनाव में सीएम पद के चेहरा के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है। इससे पहले उन्हें डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग है। निशांत कुमार को लेकर जदयू की क्या तैयारी है? नीतीश कुमार के काम और निशांत का नाम आगे बढ़ाने के लिए क्या किया जा रहा है? निशांत किस तरह पार्टी की कमान अपने हाथों में ले रहे हैं? पढ़िए रिपोर्ट…। सबसे पहले जानिए जदयू की तैयारी क्या है? 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA की जीत के बाद नीतीश कुमार सीएम बने, लेकिन बाद में राज्यसभा चले गए। सीएम की कुर्सी छोड़ दी। नीतीश के दिल्ली जाने पर निशांत को राजनीति में डेब्यू कराया गया। निशांत बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। जदयू की रणनीति धीरे-धीरे निशांत को बड़े नेता के रूप में प्रोजेक्ट करने की है। निशांत को अभी पार्टी संगठन में किसी औपचारिक पद या चुनावी जिम्मेदारी नहीं दी गई है। जिस तरह उन्हें संगठन की बैठकों से लेकर विधायकों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम तक में जगह मिली, उससे उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज है। कैसे तैयार हो रहा निशांत का राजनीतिक चेहरा, 5 पॉइंट में समझें 1. संगठन में एंट्री से पहले कार्यकर्ताओं से कनेक्ट निशांत की राजनीतिक सक्रियता का सबसे अहम हिस्सा संगठन के स्तर पर उनकी मौजूदगी है। उन्हें सीधे चुनावी राजनीति या किसी बड़े पद के साथ लॉन्च करने की जगह पहले पार्टी के संगठनात्मक ढांचे से जोड़ा जा रहा है। वह नेताओं से मिल रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2025 में जीतकर आने वाले युवा विधायकों से संपर्क में हैं। पार्टी के जिलाध्यक्षों, प्रखंड अध्यक्षों और पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। जदयू का संगठन बूथ से लेकर प्रखंड और जिला स्तर तक फैला है। निशांत जब इन पदाधिकारियों के साथ सीधा संवाद करते हैं तो वह सिर्फ नेताओं से मुलाकात नहीं होती, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पहचान बनाने की प्रक्रिया भी होती है। अभी फोकस चुनावी टिकट या पद पर नहीं है। पार्टी के कार्यकर्ता निशांत को स्वीकार करें, इसके लिए जमीन तैयार की जा रही है। 2. जिलाध्यक्ष से लेकर प्रखंड अध्यक्ष तक पहुंच, संगठन की नब्ज समझने की कोशिश निशांत की भूमिका को सिर्फ बड़े नेताओं से मुलाकात तक सीमित नहीं रखा गया है। संगठन के निचले स्तर के पदाधिकारियों के साथ भी उनका संपर्क बढ़ाया जा रहा है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में पार्टी का असली चुनावी नेटवर्क बूथ स्तर पर काम करता है। कौन सा बूथ मजबूत है? कहां संगठन कमजोर है? किन इलाकों में कार्यकर्ताओं की सक्रियता कम है? स्थानीय स्तर पर किन मुद्दों को लेकर नाराजगी है? इन सबकी जानकारी संगठन के पदाधिकारियों के पास होती है। ऐसे में निशांत का जिलों और प्रमंडलों के संगठन पदाधिकारियों से बातचीत उन्हें पार्टी के जमीनी नेटवर्क से जोड़ने का काम कर रहा है। इसे 2030 की तैयारी को ध्यान में रखकर देखें तो यह महज औपचारिक संगठनात्मक दौरा नहीं रह जाता। यह निशांत को पार्टी के उस कैडर से परिचित कराने की प्रक्रिया है जो भविष्य में चुनावी राजनीति में उनके साथ खड़ा हो सकता है। पिछले छह महीनों में जदयू की प्रमुख बैठकें जिला अध्यक्षों और प्रखंड अध्यक्षों की बैठक: 21 अप्रैल 2026 को सरकार में निशांत की इंट्री के तुरंत बाद यह बैठक बुलाई गई थी। जदयू प्रदेश कार्यालय की सभी जिला अध्यक्षों और प्रखंड अध्यक्षों को निशांत से रूबरू कराया गया। पार्टी की अगली पीढ़ी से पहचान का यह पहला मौका था। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और जनता की अपेक्षाओं को प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई। जदयू राष्ट्रीय परिषद की बैठक: 21 जून 2026 को पटना में जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई। इसमें देशभर के पार्टी नेताओं और बिहार के प्रमुख पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में नीतीश कुमार को फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने का समर्थन किया गया। इसी दौरान पार्टी के भीतर निशांत कुमार को भविष्य की राजनीति से जोड़कर चर्चा की गई। विशेष प्रबोधन कार्यक्रम: 18 सितंबर 2026 को पटना स्थित जदयू ऑफिस में एक दिवसीय विशेष प्रबोधन आयोजित किया गया। इसमें विधायकों को संसदीय कार्य प्रणाली, विधायी प्रक्रियाओं, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा विधानसभा के नियमों की गहन जानकारी दी गई। बैठक में पार्टी के विधायक, विधान पार्षद और मंत्री शामिल हुए। यह साफ हो गया था कि जदयू का नेतृत्व किसके हाथों में जाएगा। इस कार्यक्रम में निशांत कुमार के अलावा किसी और नेता ने बैठक को संबोधित नहीं किया। 3- ओरिएंटेशन कार्यक्रम में सिर्फ मेहमान नहीं, एक राजनीतिक चेहरा निशांत की भूमिका में सबसे बड़ा बदलाव जदयू के विधायकों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में दिखाई दिया। यह कार्यक्रम पार्टी के विधायकों के लिए था। मंच पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ निशांत की मौजूदगी ने राजनीतिक संदेश को और बड़ा कर दिया। यहां निशांत ने सिर्फ उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं के सामने अपनी बात रखी। निशांत कुमार ने अपने दस मिनट के संबोधन में आगे की नीति स्पष्ट कर दी। कहा कि नीतीश कुमार के काम पर पार्टी आगे बढ़ेगी। इंफ्रास्ट्रचर, शिक्षा सामाजिक कार्य से लेकर अन्य काम को मिसाल के तौर पर देखा जाएगा। निशांत की भूमिका संगठन के युवा चेहरे से आगे बढ़कर पार्टी के राजनीतिक मंच के चेहरे के तौर पर दिखाई दी। 4- ‘निशांत नेता हैं’, श्रवण कुमार के बयान ने बढ़ाई चर्चा निशांत को लेकर जदयू के नेताओं के बयान इस पूरी कवायद को राजनीतिक महत्व देते हैं। ग्रामीण विकास मंत्री और जदयू के सीनियर नेता श्रवण कुमार ने निशांत को लेकर कहा था- “निशांत उप-मुख्यमंत्री से कम थोड़े हैं। वह हमारे नेता हैं। पार्टी के नेता हैं।” यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि निशांत के पास फिलहाल जदयू संगठन में बड़ा पद नहीं है। इसके बावजूद पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का उन्हें ‘हमारे नेता’ और ‘पार्टी के नेता’ कहना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना। इस बयान को निशांत की मौजूदा संगठनात्मक सक्रियता के साथ जोड़कर देखें तो तस्वीर कुछ और साफ होती है। एक तरफ निशांत संगठन के पदाधिकारियों से संवाद कर रहे हैं। दूसरी तरफ पार्टी के विधायकों के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी है। यानी निशांत की राजनीतिक पहचान सिर्फ ‘नीतीश कुमार के बेटे’ तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ‘जदयू के नेता’ के रूप में स्थापित करने की जमीन तैयार होती दिख रही है। निशांत आगे क्या करने वाले हैं? अभी तक निशांत के दो कार्यक्रम फिक्स हुए हैं। पहला, यूपी चुनाव और दूसरा बिहार में जन संपर्क अभियान। निशांत उत्तर प्रदेश में रैली और जनसंपर्क अभियान चलाने जा रहे हैं। 25 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में उनका बड़ा कार्यक्रम है। यूपी चुनाव प्रचार का औपचारिक घोषणा होने जा रही है। निशांत बिहार में जन संपर्क अभियान चलाएंगे। वह जिलों का दौरा करेंगे। इसकी शुरुआत आने वाले दिनों में करने जा रहें हैं। उत्तर प्रदेश से सटे जिलों में वह कार्यक्रम करेंगे। इसी के साथ वह स्वास्थ्य महकमे में औचक निरीक्षण का काम करेंगे। 5. 2030 के लिए रणनीति नीतीश का काम, निशांत का चेहरा जदयू के सामने आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती सिर्फ संगठन को मजबूत करना नहीं, बल्कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। इसमें निशांत की भूमिका महत्वपूर्ण है। पार्टी के लिए नीतीश कुमार का सबसे बड़ा राजनीतिक आधार उनका लंबा शासनकाल, योजनाएं और विकास का दावा है। पार्टी उनके काम और निशांत के नाम को आगे लेकर चलने की तैयारी में है। काम नीतीश कुमार का, विरासत नीतीश कुमार की और आगे की पीढ़ी का चेहरा निशांत कुमार। इस फॉर्मूले में निशांत को नीतीश से अलग करके नहीं, बल्कि नीतीश की राजनीतिक विरासत के विस्तार के रूप में पेश करने की कोशिश दिखाई देती है। यही वजह है कि संगठन में सक्रियता से लेकर बड़े पार्टी कार्यक्रमों तक निशांत की मौजूदगी को सिर्फ व्यक्तिगत गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।  

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