मॉस्को फॉर्मेट की बातचीत के दौरान अफगानिस्तान (Afghanistan) की तालिबान (Taliban) सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी (Amir Khan Muttaqi) ने कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच सुरक्षा, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों में बातचीत के बजाय सैन्य तरीका अपनाना पसंद करता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस वजह से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।
भारत के और करीब हो सकता है अफगानिस्तान
पाकिस्तान समय-समय पर अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक्स करते हुए तालिबान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन यह कदम बैकफायर कर सकता है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के ऐसा करने से अफगानिस्तान, भारत (India) के और करीब हो सकता है। ‘मिडिल ईस्ट मॉनिटर’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान सैन्य ताकत के ज़रिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान में एक्टिव आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), जिसे अफगान तालिबान का भी समर्थन मिला हुआ है, को लेकर भी पाकिस्तान ऐसा कर रहा है, क्योंकि पाकिस्तान में बढ़ रहे आतंकवाद के पीछे टीटीपी की अहम भूमिका है और इसी वजह से पाकिस्तान सैन्य ताकत के ज़रिए तालिबान पर दबाव बनाने के लिए अफगानिस्तान पर हमले कर रहा है। हालांकि इससे पाकिस्तान को फायदा होने की उम्मीद कम है और नुकसान यह हो सकता है कि भारत और अफगानिस्तान के संबंधों में और मज़बूती आ सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दोनों देशों के संबंधों में पिछले कुछ सालों में काफी सुधार हुआ है।
अफगानिस्तान मदद के लिए कर सकता है भारत का रुख
पाकिस्तान की सैन्य ताकत के आगे अपनी कमज़ोरी को कम करने के लिए अफगानिस्तान भारत का रुख कर सकता है। भारत ने तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता दिए बिना उसके साथ लगातार संबंध मज़बूत किए हैं। संकट के समय भारत सरकार ने अफगानिस्तान को मदद भी मुहैया कराई है। इससे तालिबान सरकार को पाकिस्तान से हटकर राजनयिक और आर्थिक गुंजाइश मिलती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तालिबान को अपनी सुरक्षा के लिए भी भारत से मदद मिल सकती है।

