उम्र के इस पड़ाव पर जब किसी बुजुर्ग को सहारे की जरूरत होती है, वहीं 75 वर्षीय सुरेंद्र कुमार बाजपेई अपनी वृद्धावस्था पेंशन शुरू कराने के लिए दोनों हाथों और पैरों के सहारे सोमवार को दोपहर 2 बजे रेंगते हुए विकास भवन की चौखट तक पहुंच गए। माती स्थित मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में पहुंचे बुजुर्ग की हालत देखकर हर कोई भावुक हो गया। उनका कहना था कि पेंशन ही उनके रोजमर्रा के खर्च का एकमात्र सहारा है, लेकिन आवेदन के बाद भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सराय गांव निवासी सुरेंद्र ने बताया कि उनकी पत्नी का निधन करीब 12 वर्ष पहले हो चुका है। एकमात्र बेटी थी, जिसकी शादी कई साल पहले हो गई। कुछ समय पहले उनका कच्चा घर भी गिर गया। जमीन के नाम पर भी उनके पास कुछ नहीं है। ऐसे में रहने और खाने तक की समस्या खड़ी हो गई। हालात बिगड़ने पर वह कुछ महीनों से अकबरपुर क्षेत्र के चितेपुर स्थित वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन किया था। आवेदन के रिकॉर्ड में बीडीओ/एसडीएम स्तर से स्वीकृति और पीएफएमएस में स्वीकार किए जाने की स्थिति दर्ज है, लेकिन पेंशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। पेंशन शुरू कराने की उम्मीद में वह बुधवार को किसी तरह विकास भवन पहुंचे। विभाग में बाबू ने दस्तावेजों की जांच की बुजुर्ग की स्थिति देखकर दैनिक भास्कर की टीम ने उन्हें समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों से मिलवाया। विभाग में मौजूद बाबू ने दस्तावेजों की जांच की। जांच में सामने आया कि आवेदन के बाद दस्तावेजों के सत्यापन में कुछ खामी रह गई थी, जिसके कारण प्रक्रिया अटक गई। विभाग की ओर से दस्तावेजों को दोबारा सत्यापित कर आवेदन को फिर से आगे भेजने का आश्वासन दिया गया। सुरेंद्र ने बताया कि शरीर में कमजोरी और संतुलन की समस्या के कारण चलना बेहद मुश्किल है। दोनों तरफ सहारा लेकर ही वह दैनिक काम कर पाते हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका कोई सहारा नहीं है और निजी खर्च चलाने के लिए वृद्धावस्था पेंशन की उन्हें बेहद जरूरत है। समाज कल्याण विभाग की ओर से दस्तावेजों को दोबारा रिवर्ट कर आवश्यक प्रमाणपत्र अपलोड कराने की बात कही गई है।

