बेतिया में अंचल कार्यालय के नाजिर का रिश्वत लेते VIDEO:प्रधान लिपिक के सस्पेंशन के दो दिन बाद सामने आया दूसरा वीडियो

बेतिया में अंचल कार्यालय के नाजिर का रिश्वत लेते VIDEO:प्रधान लिपिक के सस्पेंशन के दो दिन बाद सामने आया दूसरा वीडियो

बेतिया जिले के मझौलिया अंचल कार्यालय में कथित रिश्वतखोरी से जुड़ा एक और दूसरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रधान लिपिक रविभूषण प्रसाद श्रीवास्तव के रिश्वत लेते कथित वीडियो के वायरल होने के दो दिन बाद अब इसी अंचल कार्यालय के नाजिर अमित कुमार का दो हजार रुपये लेते हुए कथित वीडियो सामने आया है। प्रधान लिपिक के मामले में जिलाधिकारी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति अंचल कार्यालय में नाजिर अमित कुमार से बातचीत करता दिखाई दे रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ने अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी अंचल कार्यालय में किराये पर दी थी। रिकॉर्डिंग किए जाने को लेकर सवाल वाहन के किराये के भुगतान के एवज में कथित तौर पर उससे पांच हजार रुपये की मांग की गई थी। वीडियो में संबंधित व्यक्ति नाजिर को रुपये देते और नाजिर द्वारा रुपये गिनकर जेब में रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में नाजिर मोबाइल से रिकॉर्डिंग किए जाने को लेकर सवाल करते भी नजर आते हैं। बातचीत के दौरान संबंधित व्यक्ति से रिकॉर्डिंग करने के संबंध में पूछताछ होती दिखाई देती है। हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता है। प्रधान लिपिक का भी रिश्वत लेते वायरल हुआ था वीडियो वीडियो में मौजूद लोगों के पहनावे को देखकर इसके पुराना होने की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि, वीडियो कब का है और इसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम की वास्तविकता क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। दो दिन पहले मझौलिया अंचल कार्यालय के प्रधान लिपिक रविभूषण प्रसाद श्रीवास्तव का भी कथित तौर पर रिश्वत लेते वीडियो वायरल हुआ था। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। अब नाजिर से जुड़ा कथित वीडियो सामने आने के बाद अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच पर है। जांच में वीडियो सही पाए जाने पर नाजिर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। बेतिया जिले के मझौलिया अंचल कार्यालय में कथित रिश्वतखोरी से जुड़ा एक और दूसरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रधान लिपिक रविभूषण प्रसाद श्रीवास्तव के रिश्वत लेते कथित वीडियो के वायरल होने के दो दिन बाद अब इसी अंचल कार्यालय के नाजिर अमित कुमार का दो हजार रुपये लेते हुए कथित वीडियो सामने आया है। प्रधान लिपिक के मामले में जिलाधिकारी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति अंचल कार्यालय में नाजिर अमित कुमार से बातचीत करता दिखाई दे रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ने अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी अंचल कार्यालय में किराये पर दी थी। रिकॉर्डिंग किए जाने को लेकर सवाल वाहन के किराये के भुगतान के एवज में कथित तौर पर उससे पांच हजार रुपये की मांग की गई थी। वीडियो में संबंधित व्यक्ति नाजिर को रुपये देते और नाजिर द्वारा रुपये गिनकर जेब में रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में नाजिर मोबाइल से रिकॉर्डिंग किए जाने को लेकर सवाल करते भी नजर आते हैं। बातचीत के दौरान संबंधित व्यक्ति से रिकॉर्डिंग करने के संबंध में पूछताछ होती दिखाई देती है। हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता है। प्रधान लिपिक का भी रिश्वत लेते वायरल हुआ था वीडियो वीडियो में मौजूद लोगों के पहनावे को देखकर इसके पुराना होने की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि, वीडियो कब का है और इसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम की वास्तविकता क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। दो दिन पहले मझौलिया अंचल कार्यालय के प्रधान लिपिक रविभूषण प्रसाद श्रीवास्तव का भी कथित तौर पर रिश्वत लेते वीडियो वायरल हुआ था। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। अब नाजिर से जुड़ा कथित वीडियो सामने आने के बाद अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच पर है। जांच में वीडियो सही पाए जाने पर नाजिर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।  

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