6000 वर्गमीटर तक जमीन का लैंड यूज बदलना हुआ आसान:अब नहीं काटने होंगे शासन के चक्कर, KDA बोर्ड ही देगा मंजूरी

6000 वर्गमीटर तक जमीन का लैंड यूज बदलना हुआ आसान:अब नहीं काटने होंगे शासन के चक्कर, KDA बोर्ड ही देगा मंजूरी

कानपुर में जमीन का भू-उपयोग (लैंड यूज) बदलवाने के लिए अब लोगों को शासन तक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शासन ने 6 हजार वर्गमीटर तक की जमीन का भू-उपयोग परिवर्तन करने का अधिकार कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) बोर्ड को दे दिया है। इससे आवेदकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब इस क्षेत्रफल तक के भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े आवेदनों पर केडीए बोर्ड ही फैसला ले सकेगा। इससे अधिक क्षेत्रफल की जमीन के भू-उपयोग परिवर्तन के लिए पहले की तरह शासन से अनुमति लेनी होगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद ने आदेश जारी कर दिया है। शासन के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति अब तक भू-उपयोग परिवर्तन के सभी आवेदनों को केडीए बोर्ड से संस्तुति मिलने के बाद शासन को भेजना पड़ता था। शासन स्तर पर फाइलें महीनों तक लंबित रहती थीं। इस दौरान भू-उपयोग परिवर्तन की अनुमति मिलने या आवेदन निरस्त होने तक निर्माण सामग्री और विकास कार्यों की लागत काफी बढ़ जाती थी। इससे आवेदकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था और उनकी परियोजनाएं भी समय से पूरी नहीं हो पाती थीं। अब 6 हजार वर्गमीटर तक की जमीन के मामलों में केडीए बोर्ड के स्तर पर ही निर्णय होने से प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। भू-उपयोग परिवर्तन की नियमावली 2014 में तीसरा संशोधन कर 2026 में नई नियमावली जारी की गई है। अधिकारियों के अनुसार, आदेश के तहत एक शर्त भी लगा दी गई है, जिसके तहत किसी भी मौजूदा भू-उपयोग का सिर्फ एक प्रतिशत तक ही बोर्ड बदल सकेगा। इसका आदेश भी केडीए को पहुंच गया और अधिसूचना भी जारी हो गई है। भू-उपयोग परिवर्तन के शुल्क में भी राहत इसके अलावा शासन ने अब भू-उपयोग परिवर्तन के शुल्क में भी राहत दी है। नई व्यवस्था के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की दरों में 5 से 50 प्रतिशत तक की कमी की गई है। इससे जमीन का भू-उपयोग बदलवाने वाले लोगों पर आर्थिक बोझ कम होगा। पहले इस शुल्क का भुगतान चार तिमाही किश्तों में एक साल के अंदर करना होता था। इस पर 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना पड़ता था। अब आवेदक चार तिमाही किश्तों में एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) से एक प्रतिशत अधिक वार्षिक दर पर भुगतान कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर केडीए उपाध्यक्ष को आवेदन देकर भुगतान की अवधि एक साल और बढ़ाई जा सकती है। ग्रीन बेल्ट और सार्वजनिक सुविधाओं की जमीन सुरक्षित नई नियमावली में ग्रीन वर्ज (सड़क के किनारे या दो सड़कों के बीच घास, पौधों या पेड़ों की एक हरी-भरी पट्टी) और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित जमीन के उपयोग में बदलाव नहीं होगा।
मास्टर प्लान में एसटीपी, पावर स्टेशन, बिजली घर, बस अड्डे, बस स्टॉप और पार्क जैसी सुविधाओं के लिए निर्धारित जमीन का उपयोग नहीं बदला जा सकेगा। इसके अलावा जिस भू-उपयोग के मद की जमीन का परिवर्तित किया जाना है, उसमें मास्टर प्लान में उस मद में दी गई कुल जमीन का एक प्रतिशत से ज्यादा आवेदन न हो।

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