इटखोरी | जितिया पर्व पर रविवार को इटखोरी प्रखंड के शहरजाम, करनी, एरकी, सरहेता समेत कई गांवों में लोक संस्कृति का रंग दिखा। गांवों में झूमर कार्यक्रम हुए। मांदर की थाप बजी। लोकगीत गूंजे। ग्रामीण देर शाम तक झूमते रहे। शहरजाम में झूमर पिछले 60 वर्षों से लगातार हो रहा है। यह अब क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए प्रखंड के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शहरजाम के मुख्य झूमर कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने किया। आयोजकों और ग्रामीणों ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि सत्यानंद भोक्ता, प्राचार्य डॉ. दुलार ठाकुर, प्रखंड 20 सूत्री अध्यक्ष जागेश्वर यादव, राजद नेता अरुण यादव, जिप सदस्य सरिता देवी समेत मंचासीन अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक झूमर की प्रस्तुति हुई। मांदर की थाप पर कलाकारों के साथ ग्रामीण भी झूमे। पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता भी मांदर की थाप पर कलाकारों के साथ थिरके। इससे मौजूद लोगों का उत्साह बढ़ा। सत्यानंद भोक्ता ने कहा, जितिया माताओं के त्याग, तपस्या और संतान प्रेम का पर्व है। ऐसे पर्व सामाजिक व सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करते हैं। इटखोरी | जितिया पर्व पर रविवार को इटखोरी प्रखंड के शहरजाम, करनी, एरकी, सरहेता समेत कई गांवों में लोक संस्कृति का रंग दिखा। गांवों में झूमर कार्यक्रम हुए। मांदर की थाप बजी। लोकगीत गूंजे। ग्रामीण देर शाम तक झूमते रहे। शहरजाम में झूमर पिछले 60 वर्षों से लगातार हो रहा है। यह अब क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए प्रखंड के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शहरजाम के मुख्य झूमर कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने किया। आयोजकों और ग्रामीणों ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि सत्यानंद भोक्ता, प्राचार्य डॉ. दुलार ठाकुर, प्रखंड 20 सूत्री अध्यक्ष जागेश्वर यादव, राजद नेता अरुण यादव, जिप सदस्य सरिता देवी समेत मंचासीन अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक झूमर की प्रस्तुति हुई। मांदर की थाप पर कलाकारों के साथ ग्रामीण भी झूमे। पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता भी मांदर की थाप पर कलाकारों के साथ थिरके। इससे मौजूद लोगों का उत्साह बढ़ा। सत्यानंद भोक्ता ने कहा, जितिया माताओं के त्याग, तपस्या और संतान प्रेम का पर्व है। ऐसे पर्व सामाजिक व सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करते हैं।

