जुलाई में यूपी की राजधानी लखनऊ के चौक-चौहारों पर पोस्टर लगे। इसमें बिहार के नेता चिराग पासवान की बड़ी सी तस्वीर थी। नारा था, ‘क्यों मांगे उधार अब अपना नेता है तैयार।’ यह UP चुनाव में चिराग पासवान की दस्तक थी। पिछले 4 महीनों से वे लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। संगठन को धार देने के बाद अब चिराग ने राज्यव्यापी रैली का आगाज किया है। 27 सितंबर को उन्होंने प्रयागराज में ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चिराग पासवान की क्या तैयारी है? इनके चुनाव लड़ने का क्या असर होगा? भाजपा को नुकसान होगा या फायदा। पढ़िए खास रिपोर्ट…। पहली बार बिहार की जगह UP में रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर आयोजन चिराग पासवान की पार्टी LJPR 8 अक्टूबर को लखनऊ में अपने संस्थापक नेता रामविलास पासवान की पुण्यतिथि मनाएगी। कार्यक्रम में राज्य भर के लोगों को लाने की तैयारी है। पहली बार रामविलास की पुण्यतिथि बिहार में नहीं मनाकर चिराग यूपी में मनाएंगे। अगले साल UP में विधानसभा चुनाव होना है। चिराग ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी यहां की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। चिराग के अलावा बिहार में NDA के सहयोगी JDU और महागठबंधन में शामिल VIP भी UP चुनाव में अपनी जमीन तलाश रहे हैं। चिराग कैसे बिहार वाला फॉर्मूला यूपी में लगा रहे हैं, 3 पॉइंट में समझिए 1- बिहार फर्स्ट की जगह यूपी फर्स्ट का नारा चिराग पासवान 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ने बिहार आए तब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं था। भले उनके पास लोकसभा में 5 सीटें थी, लेकिन बिहार में उनकी पार्टी शून्य पर खड़ी थी। उन्होंने नारा दिया, ‘बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट’। इसी थीम पर पूरे चुनाव में उनका कैंपेन चला और लोगों को आकर्षित किया। अब UP चुनाव में भी चिराग ने इसी नारे से शुरुआत की है। उन्होंने नारा दिया, ‘यूपी फर्स्ट, यूपी वाले फर्स्ट’। इस नारे के साथ चिराग पासवान की तस्वीर लगाई गई है। यानि यूपी विधानसभा चुनाव में भी उनका चुनावी कैंपेन इसी नारे के इर्द-गिर्द चलेगा। 2- केवल दलित चेहरा नहीं युवा नेता की छवि चिराग भले दलित सियासत के सिंबल हैं। भले उनके पिता रामविलास पासवान को दलित आइकॉन के रूप में माना जाता है। लेकिन, चिराग खुद को जाति के नेता से ऊपर युवा नेता के तौर स्थापित करने में जुटे हैं। बिहार लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान कैंडिडेट सिलेक्शन को देखें तो जाति से ऊपर उठकर इन्होंने युवाओं को तवज्जो दी। 3- यूपी में पासवान और पासी का गठजोड़ तैयार करेंगे बिहार चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा 186 रैली चिराग पासवान ने की थी। चिराग का यही अंदाज यूपी में भी दिख सकता है। इसकी शुरुआत वे प्रयागराज से कर चुके हैं। 8 अक्टूबर को लखनऊ में कार्यक्रम करेंगे। दुर्गापूजा के बाद यूपी के किसी बड़े शहर में यूथ बोले तो कार्यक्रम करने की तैयारी है। बिहार की तर्ज पर चुनाव से पहले यूपी में भी चिराग सभी 18 मंडल (कमिश्नरी) में नव संकल्प बदलाव सभा आयोजित करेंगे। चुनाव की घोषणा के बाद LJP(R) की तरफ से चुनावी रैली का आयोजन किया जाएगा। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जमुई सांसद अरुण भारती ने बताया, ‘पार्टी पिछले छह महीनों से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में सक्रिय है। इस दौरान पार्टी ने अपना आधार मजबूत करने के लिए ‘दलित चौपाल’, ‘चाणक्य चौपाल’ और ‘प्रबुद्ध सम्मेलनों’ का लगातार आयोजन कर रही।’ अब जानिए, चिराग के चुनाव लड़ने से किसे फायदा किसे नुकसान क्या UP दलित स्पेस में जगह बनाना चाहते हैं चिराग? इस सवाल पर पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल ने कहा, ‘चिराग पासवान युवा हैं। लंबा राजनीतिक सफर है। उनके पिता दिवंगत रामविलास पासवान की पकड़ बिहार की राजनीति पर थी। उनकी पहचान दलितों के राष्ट्रीय स्तर के नेता की थी।’ क्या चुनाव लड़कर चिराग BJP को फायदा पहुंचा सकते हैं? चिराग पासवान के UP में चुनाव लड़ने के पीछे BJP की स्ट्रेटजी होने की संभावना है। दरअसल, BJP को दलित वोटरों के मायावती, सपा-कांग्रेस की तरफ जाने की आशंका है। 2024 लोकसभा चुनाव का रिजल्ट इसका उदाहरण है…
JDU ने भी शुरू की तैयारी, सभा करेंगे निशांत LJP के अलावा बिहार में NDA की सहयोगी JDU भी UP में चुनव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। चुनाव से 6 महीने पहले पार्टी अपने संगठन को मजबूत बना रही है। पहली बार किसी राज्य के विधानसभा के चुनाव की कमान नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार संभालेंगे। VIP भी UP में तलाश रही अपनी जमीन विकासशील इंसान पार्टी भी UP में अपनी जमीन तलाश रही है। बिहार चुनाव में हार के बाद से ही मुकेश सहनी UP में एक्टिव हो गए हैं। वे लगातार वहां रैली और यात्रा का आयोजन कर रहे हैं। इसके साथ ही निषाद समाज के नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। 2002 के विधानसभा चुनाव में मुकेश सहनी की पार्टी VIP चिराग पासवान की तरह बिहार में NDA गठबंधन का हिस्सा रहते हुए यूपी में 105 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ी थी। पार्टी का पूरा फोकस पूर्वांचल की सीटों पर था, एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो पाई। यूपी चुुनाव के बाद बीजेपी ने उनके बिहार में सभी तीन विधायकों को अपने साथ मिला लिया था। गठबंधन तोड़कर मुकेश सहनी से मंत्रीपद भी छीन ली थी। जबकि जदयू 16 सीटों पर चुनाव लड़कर 2 सीट जीतने में सफल रही थी। जुलाई में यूपी की राजधानी लखनऊ के चौक-चौहारों पर पोस्टर लगे। इसमें बिहार के नेता चिराग पासवान की बड़ी सी तस्वीर थी। नारा था, ‘क्यों मांगे उधार अब अपना नेता है तैयार।’ यह UP चुनाव में चिराग पासवान की दस्तक थी। पिछले 4 महीनों से वे लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। संगठन को धार देने के बाद अब चिराग ने राज्यव्यापी रैली का आगाज किया है। 27 सितंबर को उन्होंने प्रयागराज में ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चिराग पासवान की क्या तैयारी है? इनके चुनाव लड़ने का क्या असर होगा? भाजपा को नुकसान होगा या फायदा। पढ़िए खास रिपोर्ट…। पहली बार बिहार की जगह UP में रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर आयोजन चिराग पासवान की पार्टी LJPR 8 अक्टूबर को लखनऊ में अपने संस्थापक नेता रामविलास पासवान की पुण्यतिथि मनाएगी। कार्यक्रम में राज्य भर के लोगों को लाने की तैयारी है। पहली बार रामविलास की पुण्यतिथि बिहार में नहीं मनाकर चिराग यूपी में मनाएंगे। अगले साल UP में विधानसभा चुनाव होना है। चिराग ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी यहां की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। चिराग के अलावा बिहार में NDA के सहयोगी JDU और महागठबंधन में शामिल VIP भी UP चुनाव में अपनी जमीन तलाश रहे हैं। चिराग कैसे बिहार वाला फॉर्मूला यूपी में लगा रहे हैं, 3 पॉइंट में समझिए 1- बिहार फर्स्ट की जगह यूपी फर्स्ट का नारा चिराग पासवान 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ने बिहार आए तब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं था। भले उनके पास लोकसभा में 5 सीटें थी, लेकिन बिहार में उनकी पार्टी शून्य पर खड़ी थी। उन्होंने नारा दिया, ‘बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट’। इसी थीम पर पूरे चुनाव में उनका कैंपेन चला और लोगों को आकर्षित किया। अब UP चुनाव में भी चिराग ने इसी नारे से शुरुआत की है। उन्होंने नारा दिया, ‘यूपी फर्स्ट, यूपी वाले फर्स्ट’। इस नारे के साथ चिराग पासवान की तस्वीर लगाई गई है। यानि यूपी विधानसभा चुनाव में भी उनका चुनावी कैंपेन इसी नारे के इर्द-गिर्द चलेगा। 2- केवल दलित चेहरा नहीं युवा नेता की छवि चिराग भले दलित सियासत के सिंबल हैं। भले उनके पिता रामविलास पासवान को दलित आइकॉन के रूप में माना जाता है। लेकिन, चिराग खुद को जाति के नेता से ऊपर युवा नेता के तौर स्थापित करने में जुटे हैं। बिहार लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान कैंडिडेट सिलेक्शन को देखें तो जाति से ऊपर उठकर इन्होंने युवाओं को तवज्जो दी। 3- यूपी में पासवान और पासी का गठजोड़ तैयार करेंगे बिहार चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा 186 रैली चिराग पासवान ने की थी। चिराग का यही अंदाज यूपी में भी दिख सकता है। इसकी शुरुआत वे प्रयागराज से कर चुके हैं। 8 अक्टूबर को लखनऊ में कार्यक्रम करेंगे। दुर्गापूजा के बाद यूपी के किसी बड़े शहर में यूथ बोले तो कार्यक्रम करने की तैयारी है। बिहार की तर्ज पर चुनाव से पहले यूपी में भी चिराग सभी 18 मंडल (कमिश्नरी) में नव संकल्प बदलाव सभा आयोजित करेंगे। चुनाव की घोषणा के बाद LJP(R) की तरफ से चुनावी रैली का आयोजन किया जाएगा। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जमुई सांसद अरुण भारती ने बताया, ‘पार्टी पिछले छह महीनों से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में सक्रिय है। इस दौरान पार्टी ने अपना आधार मजबूत करने के लिए ‘दलित चौपाल’, ‘चाणक्य चौपाल’ और ‘प्रबुद्ध सम्मेलनों’ का लगातार आयोजन कर रही।’ अब जानिए, चिराग के चुनाव लड़ने से किसे फायदा किसे नुकसान क्या UP दलित स्पेस में जगह बनाना चाहते हैं चिराग? इस सवाल पर पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल ने कहा, ‘चिराग पासवान युवा हैं। लंबा राजनीतिक सफर है। उनके पिता दिवंगत रामविलास पासवान की पकड़ बिहार की राजनीति पर थी। उनकी पहचान दलितों के राष्ट्रीय स्तर के नेता की थी।’ क्या चुनाव लड़कर चिराग BJP को फायदा पहुंचा सकते हैं? चिराग पासवान के UP में चुनाव लड़ने के पीछे BJP की स्ट्रेटजी होने की संभावना है। दरअसल, BJP को दलित वोटरों के मायावती, सपा-कांग्रेस की तरफ जाने की आशंका है। 2024 लोकसभा चुनाव का रिजल्ट इसका उदाहरण है…
JDU ने भी शुरू की तैयारी, सभा करेंगे निशांत LJP के अलावा बिहार में NDA की सहयोगी JDU भी UP में चुनव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। चुनाव से 6 महीने पहले पार्टी अपने संगठन को मजबूत बना रही है। पहली बार किसी राज्य के विधानसभा के चुनाव की कमान नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार संभालेंगे। VIP भी UP में तलाश रही अपनी जमीन विकासशील इंसान पार्टी भी UP में अपनी जमीन तलाश रही है। बिहार चुनाव में हार के बाद से ही मुकेश सहनी UP में एक्टिव हो गए हैं। वे लगातार वहां रैली और यात्रा का आयोजन कर रहे हैं। इसके साथ ही निषाद समाज के नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। 2002 के विधानसभा चुनाव में मुकेश सहनी की पार्टी VIP चिराग पासवान की तरह बिहार में NDA गठबंधन का हिस्सा रहते हुए यूपी में 105 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ी थी। पार्टी का पूरा फोकस पूर्वांचल की सीटों पर था, एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो पाई। यूपी चुुनाव के बाद बीजेपी ने उनके बिहार में सभी तीन विधायकों को अपने साथ मिला लिया था। गठबंधन तोड़कर मुकेश सहनी से मंत्रीपद भी छीन ली थी। जबकि जदयू 16 सीटों पर चुनाव लड़कर 2 सीट जीतने में सफल रही थी।

