कानपुर के बेनाझाबर स्थित बृजेन्द्र स्वरूप पार्क में 26 से 30 नवंबर तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की प्रेरणा से भव्य हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले का आयोजन किया जाएगा। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के लेक्चर हॉल 1 में रविवार को हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले की तैयारियों को लेकर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपने, सोशल मीडिया के जरिए प्रचार करने और जनसांख्यिकी से जुड़े विषयों पर जागरूकता बढ़ाने सहित कई अहम निर्णय लिए गए। कार्यशाला में करीब 250 कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। 5 दिवसीय यह मेला पूरी तरह सर्वसमावेशी होगा, जिसमें जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर हर वर्ग के लोग हिस्सा ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि संघ के राष्ट्रव्यापी सेवा संस्कार जागरण अभियान के तहत आयोजित इस मेले में 400 से अधिक सेवा संगठनों की प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। 5 दिन तक होंगे सांस्कृतिक आयोजन मेले में अध्यात्म, सेवा, संस्कार और संस्कृति को एक साथ जोड़ने की पहल की जाएगी। श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में काशी विश्वनाथ, अयोध्या और वृंदावन धाम के विग्रहों के दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही प्रतिदिन गंगा अवतरणम्, संध्या आरती, युवाओं के लिए भजन जैमिंग, रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर नाट्य मंचन, परमवीर चक्र विजेता वंदन और मातृ-पितृ वंदन जैसे कार्यक्रम होंगे। इसमें संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत केंद्र और यूपी सरकार के कई मंत्रियों और राष्ट्रीय स्तर के संतों के शामिल होने की संभावना है। 400 से ज्यादा संगठनों की लगेगी प्रदर्शनी हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला के सदस्य सोमकांत शर्मा ने बताया कि मेले का उद्देश्य केवल लोगों को वक्ताओं के विचार सुनाना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कार और संस्कृति से जुड़े कार्यों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल करना है। उन्होंने कहा कि परिवारों में महिलाओं का सम्मान बढ़ाने के लिए कन्या वंदन और सुवासिनी वंदन जैसे आयोजन होंगे। माता-पिता, शिक्षकों, आचार्यों और अतिथियों के प्रति सम्मान का भाव विकसित करने के लिए भी विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। दादी-नानी सुनाएंगी पंचतंत्र की कहानियां नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए मेले में ‘दादी-नानी का घर’ बनाया जाएगा। यहां दादी-नानी बच्चों को पंचतंत्र और नैतिक शिक्षा से जुड़ी कहानियां सुनाएंगी। इसके अलावा वृक्ष, गौ और तुलसी वंदन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और भारतीय जीवनशैली के महत्व को समझाया जाएगा। हिंदू सम्मेलन के जरिए जाति-पाति, ऊंच-नीच और वर्गभेद से ऊपर उठकर परिवार, प्रकृति और राष्ट्र के विकास में सामूहिक भागीदारी का संदेश दिया जाएगा। राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने पर रहेगा जोर सोमकांत शर्मा ने बताया कि देश का भविष्य बाल, किशोर और युवा पीढ़ी पर निर्भर है। इसी सोच के साथ मेले में बच्चों और युवाओं में चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने पर जोर रहेगा। मेले का मूल मंत्र ‘मूल्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ और कार्य का ध्येय ‘साथ मिलकर काम करना, साथ मिलकर सोचना और साथ मिलकर सेवा करना’ है। 31 अक्टूबर को होगा सामूहिक वंदे मातरम मुख्य मेले से पहले शहर में स्वामी विवेकानंद रथयात्रा, विभिन्न प्रतियोगिताएं और नवरात्र में कन्या वंदन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का प्रमुख आकर्षण 31 अक्टूबर को प्रस्तावित सामूहिक वंदे मातरम होगा, जिसमें एक लाख से अधिक विद्यार्थियों और नागरिकों के एक साथ राष्ट्रगीत गाने का लक्ष्य रखा गया है। सोमकांत शर्मा ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 2009 में चेन्नई से हुई थी। वरिष्ठ विचारक एस. गुरुमूर्ति के प्रयासों से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक कई राज्यों में 36 मेले आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेले में किसी एक राजनीतिक दल के बजाय विभिन्न विचारधाराओं से जुड़े उन लोगों को आमंत्रित किया जाएगा, जो भारतीय संस्कृति, परंपरा और पूर्वजों के प्रति सम्मान रखते हैं। आयोजकों ने शहरवासियों से जातिगत भेदभाव भुलाकर मेले में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।

