नयी दिल्ली, चार अक्टूबर प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास ने रविवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आठ प्रतिशत की वृद्धि के बहुत करीब पहुंच गई है। दास ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी), लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण, बैंकिंग सुधारों और राजकोषीय अनुशासन जैसे व्यापक सुधारों से आर्थिक वृद्धि को मजबूती मिली है। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर दास ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूती से टिके रहना व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का परिणाम है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर से वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून अवधि को लिया जाए, तो भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि आठ प्रतिशत से कुछ अधिक है। यह कुछ महीने पहले फाइनेंशियल टाइम्स, लंदन को दिए मेरे बयान के अनुरूप है कि भारत आठ प्रतिशत की वृद्धि के बेहद करीब है।’’
भारत की जीडीपी जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत बढ़ी थी, जो अनुमान से बेहतर रही। दास ने इस मजबूत प्रदर्शन का श्रेय मजबूत घरेलू मांग और निवेश के अनुकूल माहौल को दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की मजबूती कोई संयोग नहीं है। यह व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का परिणाम है।’’
दास ने कहा कि पिछले एक दशक में किए गए सुधार कोई एक बार किए जाने वाले उपाय नहीं थे, बल्कि इनके जरिये ऐसे सुरक्षा उपाय तैयार किए गए जिनसे अर्थव्यवस्था को झटकों का सामना करने और तेजी से उबरने में मदद मिले। उन्होंने मुद्रास्फीति को तय लक्ष्य के आसपास रखने की नीति, जीएसटी लागू करने, राजकोषीय अनुशासन, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों को ऐसे प्रमुख कदमों में शामिल किया।
आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र और बाहरी क्षेत्र का सतर्क प्रबंधन भी आर्थिक वृद्धि के मजबूत आधार बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि निर्यात में विविधता, मुक्त व्यापार समझौते, सेवा व्यापार में लगातार अधिशेष और विदेशों से लगातार आने वाले धन से बाहरी क्षेत्र की स्थिति मजबूत बनी हुई है। आगे की राह के बारे में दास ने कहा कि भारत अपने विकास के महत्वपूर्ण दौर में है और ऊंची आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए उसे कृत्रिम मेधा (एआई) क्रांति का लाभ उठाना होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की एआई रणनीति दो पूरक स्तंभों पर आधारित है। पहला, देश में विकसित मूल एआई मॉडल, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं, सेमीकंडक्टर विकास और मजबूत नवाचार तंत्र में निवेश के जरिये अपनी एआई क्षमता विकसित करना।’’
दास ने भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता को समर्थन देने के लिए वित्तीय क्षेत्र को और मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र काफी विकसित हुआ है, लेकिन वृद्धि के अगले चरण के लिए दीर्घकालीन वित्त और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वाली पूंजी की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि इसके लिए कॉरपोरेट बॉण्ड बाजार, पेंशन और बीमा कोष, नगर निकायों के वित्तपोषण तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नए वित्तपोषण माध्यमों को और विकसित करना होगा। दास ने रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया और स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से अलग-थलग होना नहीं है। उन्होंने कहा कि वृद्धि के अगले चरण में सतत विकास और जलवायु के क्षेत्र में नेतृत्व पर भी ध्यान देना होगा।
इसके लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक परिवहन, ऊर्जा दक्ष बुनियादी ढांचा, टिकाऊ कृषि और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसी पहलों को आगे बढ़ाना होगा। दास ने कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों की गति बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, ‘‘भारत की रणनीति केवल तेजी से बढ़ना नहीं है, बल्कि लंबे समय में टिकाऊ और मजबूत आर्थिक वृद्धि हासिल करना है।

