पाकुड़ के डुमरचीर में 75 साल से हो रही दुर्गापूजा:52 साल पहले बना था मंदिर, इस बार 5 लाख तक का खर्च; भीड़ कंट्रोल के लिए खास इंतजाम

पाकुड़ के डुमरचीर में 75 साल से हो रही दुर्गापूजा:52 साल पहले बना था मंदिर, इस बार 5 लाख तक का खर्च; भीड़ कंट्रोल के लिए खास इंतजाम

पाकुड़ जिले में दुर्गापूजा को लेकर भक्तों में खासा उत्साह है। पूजा समितियां तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। अमड़ापाड़ा प्रखंड के डुमरचीर गांव में पिछले 75 वर्षों से दुर्गापूजा का आयोजन होता आ रहा है। यहां स्थित दुर्गा स्थान से आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों की आस्था जुड़ी है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के मंदिर में 75 वर्षों से शारदीय नवरात्रि के तहत मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। पहले 23 वर्षों तक मां दुर्गा की पूजा एक अन्य स्थान पर होती थी। इसके बाद करीब 52 वर्ष पहले वर्तमान पूजा समिति के अध्यक्ष टिंकू प्रसाद भगत के पूर्वजों ने मां के स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर बनने के बाद धीरे-धीरे लोगों की आस्था इससे जुड़ती गई। इसके बाद दुर्गापूजा समिति का गठन कर मंदिर में भव्य तरीके से पूजा का आयोजन शुरू किया गया। समय के साथ मंदिर की ख्याति आसपास के क्षेत्रों में भी फैलती गई और अब शारदीय दुर्गापूजा के दौरान दर्जनों गांवों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं। फूस के मंदिर से भव्य मंदिर तक पहुंचा पूजा का सफर दुर्गापूजा समिति के सदस्य दिलीप भगत, संजय भगत (मुन्ना), बास्की भगत, अरुण भगत और सत्यनारायण भगत (बबलु) ने बताया कि पहले फूस से बने मंदिर में मां दुर्गा की पूजा होती थी। करीब 52 वर्ष पहले मां के स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। इसके बाद से दुर्गापूजा समिति की देखरेख में नियमित रूप से पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है। समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर और मां दुर्गा की प्रतिमा का पूरा खर्च पूजा समिति के अध्यक्ष टिंकू प्रसाद भगत उठाते हैं। इस वर्ष भी पूजा को भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है। पूजा आयोजन में करीब चार से पांच लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। मेले की भी तैयारी, भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम दुर्गापूजा के दौरान डुमरचीर गांव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए पूजा समिति की ओर से भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने की तैयारी की गई है। समिति के सदस्य मेले के आयोजन को लेकर भी तैयारियों में जुटे हैं। पूजा के दौरान आने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था की जा रही है। समिति सदस्यों ने बताया कि प्रशासन की ओर से दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पूजा का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। समिति का प्रयास है कि 75 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को इस वर्ष भी भव्य और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *